अस-सजदा · 25/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-सजदा
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ۝٢٥
Inna rabbaka huwa yafsilu bainahum yawmal qiyaamati feemaa kaanoo feehi yakhtalifoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) हसमें शक़ नहीं कि जिन बातों में लोग (दुनिया में) बाहम झगड़ते रहते हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार क़तई फैसला कर देगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَفْصِلُ – फैसला करेगा, न्याय करेगा
  • يَخْتَلِفُونَ – वे लोग मतभेद करते थे

तफसीर:

ऐ नबी! आपका रब ही क़ियामत के दिन उन सबके बीच फैसला करेगा, जो लोग दुनिया में अलग-अलग रास्तों पर चले और धर्म के मामलों में मतभेद रखते रहे। यह फैसला अल्लाह की पूर्ण न्यायपूर्णता के साथ होगा, जिसमें कोई कमी नहीं होगी।

बनी इसराईल के मोमिन और काफिर, और हर उस इंसान के बीच जिसने हक़ को क़बूल किया या उसे ठुकराया, अल्लाह तआला क़ियामत के दिन सच और झूठ को साफ़ करके दिखा देगा। जो लोग नबियों की लाई हुई शिक्षाओं पर चले, वे जन्नत में दाखिल होंगे, और जिन्होंने उनका विरोध किया और झूठ पर डटे रहे, वे जहन्नुम की आग में झोंके जाएँगे।

यह आयत हमें बताती है कि दुनिया में अक्सर हक़ और बातिल के बीच उलझन पैदा हो जाती है, कभी-कभी सच्चे लोगों को कमज़ोर समझा जाता है और झूठे लोग बड़े दिखते हैं। लेकिन यह सब अस्थायी है। असली फैसला अल्लाह के पास है, और वह उस दिन होगा जब हर इंसान को उसके अमल का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी तसल्ली है कि जो लोग सच्चाई पर हैं, चाहे उन्हें दुनिया में कितनी भी मुश्किलें क्यों न उठानी पड़ें, अल्लाह उनका हक़ ज़रूर दिलाएगा। और जो लोग ज़ुल्म और झूठ पर हैं, उनकी सज़ा से कोई नहीं बचा सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम सच्चाई पर साबित-क़दम रहें, क्योंकि अल्लाह का फैसला कभी गलत नहीं होता और उसका न्याय हर चीज़ से बेहतर है।



📜 आयत 23-27 — सूरा अस-सजदा

23وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَلَا تَكُن فِي مِرْيَةٍ مِّن لِّقَائِهِ ۖ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ
और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब) तौरेत अता की थी तुम भी इस किताब (कुरान) के (अल्लाह की तरफ से) मिलने में शक में न पड़े रहो और हमने इस (तौरेत) तो तुम को भी बनी इसराईल के लिए रहनुमा क़रार दिया था
24وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُوا ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يُوقِنُونَ
और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को चूंकि उन्होंने (मुसीबतों पर) सब्र किया था पेशवा बनाया जो हमारे हुक्म से (लोगो की) हिदायत करते थे और (इसके अलावा) हमारी आयतो का दिल से यक़ीन रखते थे
25إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) हसमें शक़ नहीं कि जिन बातों में लोग (दुनिया में) बाहम झगड़ते रहते हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार क़तई फैसला कर देगा
26أَوَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ ۖ أَفَلَا يَسْمَعُونَ
क्या उन लोगों को ये मालूम नहीं कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला जिन के घरों में ये लोग चल फिर रहें हैं बेशक उसमे (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं तो क्या ये लोग सुनते नहीं हैं
27أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّا نَسُوقُ الْمَاءَ إِلَى الْأَرْضِ الْجُرُزِ فَنُخْرِجُ بِهِ زَرْعًا تَأْكُلُ مِنْهُ أَنْعَامُهُمْ وَأَنفُسُهُمْ ۖ أَفَلَا يُبْصِرُونَ
क्या इन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम चटियल मैदान (इफ़तादा) ज़मीन की तरफ पानी को जारी करते हैं फिर उसके ज़रिए से हम घास पात लगाते हैं जिसे उनके जानवर और ये ख़ुद भी खाते हैं तो क्या ये लोग इतना भी नहीं देखते
अस-सजदाकुरान सूची
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25आयत

अनुवाद — अस-सजदा 25

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Friday, October 2, 2026

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