अस-सजदा · 6/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-सजदा
ذَٰلِكَ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝٦
Zaalika `aalimul ghaybi wa shahaadatil `azeezur raheem
📖 हिंदी अर्थ
वही (मुदब्बिर) पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

यह वही अल्लाह है जो छिपे और प्रकट सब कुछ जानने वाला है, सब पर प्रभुत्व रखने वाला और अपने बंदों पर अत्यंत दयालु है।

शब्दों के अर्थ:

  • الْغَيْبِ (अल-ग़ैब): वह सब कुछ जो आँखों से छिपा हो, जैसे भविष्य की घटनाएँ, दिलों के भेद, और वे चीज़ें जो इंद्रियों की पहुँच से परे हैं।
  • الشَّهَادَةِ (अश-शहादाह): वह सब कुछ जो दिखाई देता है, सुना जाता है, या जिसे हम महसूस कर सकते हैं — यानी प्रत्यक्ष संसार।
  • الْعَزِيزُ (अल-अज़ीज़): सर्वशक्तिमान, जो अपनी ताकत और प्रभुत्व में अजेय है, कोई उसे हरा नहीं सकता।
  • الرَّحِيمُ (अर-रहीम): अत्यंत दयालु, जो अपने बंदों पर विशेष रूप से दया करता है।

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उस महान सत्य की ओर इशारा करती है जो पिछली आयतों में वर्णित अल्लाह के कार्यों का निष्कर्ष है। जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में बनाया, जो आकाश से पानी उतारता है और उससे मृत भूमि को जीवित करता है, वही अल्लाह हर चीज़ का जानने वाला है। वह न केवल उन चीज़ों को जानता है जो हमारी आँखों के सामने हैं, बल्कि वह सब कुछ भी जानता है जो हमारी नज़रों से छिपा है — चाहे वह दिलों के राज़ हों, सीने में छिपे भेद हों, या भविष्य के रहस्य। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी, न खुली और न छिपी।

वह अज़ीज़ है — अर्थात सर्वशक्तिमान और अजेय। उसकी शक्ति के आगे कोई नहीं टिक सकता, उसके फैसले को कोई बदल नहीं सकता। वह जो चाहता है करता है और जो चाहता है आदेश देता है। उसकी शक्ति का कोई मुकाबला नहीं कर सकता, और वह अपने दुश्मनों से पूरा बदला लेने वाला है।

साथ ही वह रहीम है — अर्थात अपने ईमानवाले बंदों पर अत्यंत दयालु है। उसकी दया उसकी शक्ति के साथ जुड़ी हुई है। वह जितना शक्तिशाली है, उतना ही दयालु भी है। वह अपने बंदों की भलाई चाहता है, उन्हें मार्गदर्शन देता है, उनके पापों को क्षमा करता है, और उन्हें जन्नत की ओर बुलाता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारा रब हर चीज़ को देख रहा है और जान रहा है। जब हमें यह यकीन हो जाए कि अल्लाह हमारे अंदर और बाहर सब कुछ जानता है, तो हमें अपने अंदर और बाहर दोनों को सुधारना चाहिए। हमें चाहिए कि हम अकेले में भी वही करें जो अल्लाह को पसंद है, क्योंकि वह हमें देख रहा है। और जब हम गलती कर बैठें, तो उसकी दया से निराश न हों — क्योंकि वह रहीम है, क्षमा करने वाला है। उसकी शक्ति हमें भय देती है, और उसकी दया हमें आशा देती है। इन दोनों के बीच संतुलन ही एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि जो व्यक्ति इस अल्लाह पर ईमान रखता है और उसकी शक्ति और दया को पहचानता है, वह कभी अकेला और असहाय महसूस नहीं करता। उसे मालूम है कि उसका रब हर पल उसके साथ है, उसकी हर बात सुनता है, उसकी हर दुआ जानता है, और उसकी हर ज़रूरत को पूरा करने पर क़ादिर है। यही वह विश्वास है जो दिल को सुकून देता है और जीवन को अर्थ प्रदान करता है।



📜 आयत 4-8 — सूरा अस-सजदा

4اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ مَا لَكُم مِّن دُونِهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا شَفِيعٍ ۚ أَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने सारे आसमान और ज़मीन और जितनी चीज़े इन दोनो के दरमियान हैं छह: दिन में पैदा की फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ उसके सिवा न कोई तुम्हारा सरपरस्त है न कोई सिफारिशी तो क्या तुम (इससे भी) नसीहत व इबरत हासिल नहीं करते
5يُدَبِّرُ الْأَمْرَ مِنَ السَّمَاءِ إِلَى الْأَرْضِ ثُمَّ يَعْرُجُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ أَلْفَ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ
आसमान से ज़मीन तक के हर अम्र का वही मुद्ब्बिर (व मुन्तज़िम) है फिर ये बन्दोबस्त उस दिन जिस की मिक़दार तुम्हारे शुमार से हज़ार बरस से होगी उसी की बारगाह में पेश होगा
6ذَٰلِكَ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
वही (मुदब्बिर) पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है
7الَّذِي أَحْسَنَ كُلَّ شَيْءٍ خَلَقَهُ ۖ وَبَدَأَ خَلْقَ الْإِنسَانِ مِن طِينٍ
वह (क़ादिर) जिसने जो चीज़ बनाई (निख सुख से) ख़ूब (दुरुस्त) बनाई और इन्सान की इबतेदाई ख़िलक़त मिट्टी से की
8ثُمَّ جَعَلَ نَسْلَهُ مِن سُلَالَةٍ مِّن مَّاءٍ مَّهِينٍ
उसकी नस्ल (इन्सानी जिस्म के) खुलासा यानी (नुत्फे के से) ज़लील पानी से बनाई
अस-सजदाकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अस-सजदा 6

सूरा अस-सजदा आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वही (मुदब्बिर) पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला (सब पर)…

सूरा आयत 6/30 — सूरा अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-सजदा सुनें, सूरा अस-सजदा अनुवाद, सूरा अस-सजदा mp3, सूरा अस-सजदा pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए