अल-अहज़ाब · 41/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا اللَّهَ ذِكْرًا كَثِيرًا ۝٤١
Yaaa aiyuhal lazeena aamanuz kurul laaha zikran kaseera
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानवालों बाकसरत खुदा की याद किया करो और

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اذْكُرُوا اللَّهَ: अल्लाह को याद करो, उसका ज़िक्र करो।
  • ذِكْرًا كَثِيرًا: बहुत अधिक, अत्यधिक मात्रा में।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान लाने वालों! तुम जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल को दिल से स्वीकार किया और उसके आदेशों पर चलने का संकल्प किया, अल्लाह को बहुत अधिक याद करो। यह ज़िक्र केवल ज़ुबान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि दिल, ज़ुबान और हर अंग के साथ होना चाहिए। अल्लाह की याद को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लो—सुबह-शाम, खड़े-बैठे, चलते-फिरते, हर हालत में। जब तुम सुबह उठो तो अल्लाह को याद करो, जब रात को सोओ तो उसे याद करो, नमाज़ के बाद, काम के दौरान, खुशी और गम में—हर पल उसका नाम लो।

अल्लाह की याद का अर्थ केवल "सुब्हानअल्लाह" या "अल्हम्दुलिल्लाह" कहना नहीं है, बल्कि यह है कि तुम्हारा दिल हमेशा उसकी महानता, उसकी रहमत, उसके इनाम और उसकी पकड़ से जुड़ा रहे। तुम उसकी तारीफ करो, उसकी पवित्रता का वर्णन करो, उसकी बड़ाई बयान करो और उसकी पाकी बयान करो—हर अवस्था में, हर परिस्थिति में।

यह ज़िक्र तुम्हें अल्लाह की मुहब्बत की ओर ले जाता है। जब कोई व्यक्ति किसी से प्रेम करता है, तो वह उसे बार-बार याद करता है। अल्लाह की याद दिल को सुकून देती है, ज़ुबान को गुनाहों से बचाती है और तुम्हें हर अच्छे काम में मदद करती है। यह तुम्हारे लिए एक ढाल है जो तुम्हें बुराई से बचाती है और तुम्हें अच्छाई की राह पर चलाती है।

याद रखो, अल्लाह की याद ही वह चीज़ है जो तुम्हारे दिल को जीवित रखती है। जिस दिल में अल्लाह की याद नहीं, वह दिल मुर्दा है। इसलिए अपने जीवन को इस याद से रोशन करो, क्योंकि यही तुम्हारी सफलता और आख़िरत की भलाई का ज़रिया है। अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसे बहुत याद करते हैं, और उनके लिए उसकी रहमत और मग़फिरत के दरवाज़े खोल देता है।



📜 आयत 39-43 — अल-अहज़ाब

39الَّذِينَ يُبَلِّغُونَ رِسَالَاتِ اللَّهِ وَيَخْشَوْنَهُ وَلَا يَخْشَوْنَ أَحَدًا إِلَّا اللَّهَ ۗ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ حَسِيبًا
वह लोग जो खुदा के पैग़ामों को (लोगों तक जूँ का तूँ) पहुँचाते थे और उससे डरते थे और खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते थे (फिर तुम क्यों डरते हो) और हिसाब लेने के वास्ते तो खुद काफ़ी है
40مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَٰكِن رَّسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا
(लोगों) मोहम्मद तुम्हारे मर्दों में से (हक़ीक़तन) किसी के बाप नहीं हैं (फिर जैद की बीवी क्यों हराम होने लगी) बल्कि अल्लाह के रसूल और नबियों की मोहर (यानी ख़त्म करने वाले) हैं और खुदा तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
41يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا اللَّهَ ذِكْرًا كَثِيرًا
ऐ ईमानवालों बाकसरत खुदा की याद किया करो और
42وَسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
सुबह व शाम उसकी तसबीह करते रहो
43هُوَ الَّذِي يُصَلِّي عَلَيْكُمْ وَمَلَائِكَتُهُ لِيُخْرِجَكُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ ۚ وَكَانَ بِالْمُؤْمِنِينَ رَحِيمًا
वह वही तो है जो खुद तुमपर दूरूद (दर्दों रहमत) भेजता है और उसके फ़रिश्ते ताकि तुमको (कुफ़्र की) तारीक़ियों से निकालकर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और खुदा ईमानवालों पर बड़ा मेहरबान है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
41आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 41

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Tuesday, August 18, 2026

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