अल-अहज़ाब · 42/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا ۝٤٢
Wa sabbihoohu bukratanw wa aseela
📖 हिंदी अर्थ
सुबह व शाम उसकी तसबीह करते रहो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَبِّحُوهُ (सब्बिहूहु): उसकी पवित्रता का वर्णन करो, उसे हर कमी और दोष से पाक-साफ़ बताओ।
  • بُكْرَةً (बुकरतन): सुबह का समय, प्रातःकाल।
  • أَصِيلًا (असीलन): शाम का समय, सायंकाल।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालों! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल को दिल से माना और उसके आदेशों पर अमल किया! अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करो और उसे हर ऐब से पाक जानो — सुबह भी और शाम भी। यानी अपने दिन की शुरुआत और अंत अल्लाह की याद और उसकी तस्बीह से करो।

यह आदेश सिर्फ़ ज़ुबान से कहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह है कि तुम्हारा पूरा जीवन अल्लाह की याद में ढल जाए। सुबह उठते ही अल्लाह का ज़िक्र करो, उसकी तारीफ़ करो, और शाम को जब दिन ढले तो भी उसी की याद में अपना दिन समाप्त करो। यही वह समय है जब इंसान का दिल सुकून और राहत महसूस करता है, और अल्लाह से जुड़ाव और गहरा होता है।

इस आयत में "तस्बीह" से मुराद सिर्फ़ ज़ुबानी तस्बीह ही नहीं, बल्कि नमाज़ भी है — जैसे सुबह की नमाज़ (फज्र) और शाम की नमाज़ (अस्र)। ये वो नमाज़ें हैं जो इंसान को पूरे दिन गुनाहों से बचाती हैं और उसे अल्लाह की रहमत के करीब लाती हैं। कुछ मुफ़स्सिरीन ने कहा है कि इसका मतलब हर हालत में अल्लाह की तस्बीह और ज़िक्र करना है — चाहे सुबह हो या शाम, चाहे खड़े हों या बैठे हों।

अल्लाह की तस्बीह का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि यह दिल को अल्लाह की मुहब्बत से भर देती है। जो इंसान सुबह-शाम अल्लाह को याद करता है, उसका दिल गुनाहों से दूर रहता है, उसकी ज़ुबान बुराई से बचती है, और उसका पूरा जीवन अल्लाह की रज़ा के अनुसार चलने लगता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया की बेचैनियों से निकालकर सच्चे सुकून तक पहुँचाता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर लम्हा अल्लाह की याद से जुड़ा होना चाहिए। सुबह उठते ही "सुब्हानअल्लाह" कहें, दिन भर उसके दिए हुए रिज़्क़ का शुक्र अदा करें, और शाम को उसकी तारीफ़ के साथ दिन खत्म करें। यह आदत हमें न सिर्फ़ दुनिया में सुकून देगी, बल्कि आख़िरत में भी हमारे लिए रोशनी बनेगी। अल्लाह तआला हम सबको इस तौफ़ीक़ अता करे। आमीन।



📜 आयत 40-44 — अल-अहज़ाब

40مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَٰكِن رَّسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا
(लोगों) मोहम्मद तुम्हारे मर्दों में से (हक़ीक़तन) किसी के बाप नहीं हैं (फिर जैद की बीवी क्यों हराम होने लगी) बल्कि अल्लाह के रसूल और नबियों की मोहर (यानी ख़त्म करने वाले) हैं और खुदा तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
41يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا اللَّهَ ذِكْرًا كَثِيرًا
ऐ ईमानवालों बाकसरत खुदा की याद किया करो और
42وَسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
सुबह व शाम उसकी तसबीह करते रहो
43هُوَ الَّذِي يُصَلِّي عَلَيْكُمْ وَمَلَائِكَتُهُ لِيُخْرِجَكُم مِّنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ ۚ وَكَانَ بِالْمُؤْمِنِينَ رَحِيمًا
वह वही तो है जो खुद तुमपर दूरूद (दर्दों रहमत) भेजता है और उसके फ़रिश्ते ताकि तुमको (कुफ़्र की) तारीक़ियों से निकालकर (ईमान की) रौशनी में ले जाए और खुदा ईमानवालों पर बड़ा मेहरबान है
44تَحِيَّتُهُمْ يَوْمَ يَلْقَوْنَهُ سَلَامٌ ۚ وَأَعَدَّ لَهُمْ أَجْرًا كَرِيمًا
जिस दिन उसकी बारगाह में हाज़िर होंगे (उस दिन) उनकी मुरादात (उसकी तरफ से हर क़िस्म की) सलामती होगी और खुदा ने तो उनके वास्ते बहुत अच्छा बदला (बेहश्त) तैयार रखा है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 42

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Tuesday, August 18, 2026

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