अल-अहज़ाब · 40/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَٰكِن رَّسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا ۝٤٠
Maa kaana Muhammmadun abaaa ahadim mir rijaalikum wa laakir Rasoolal laahi wa Khaataman Nabiyyeen; wa kaanal laahu bikulli shai`in `Aleema
📖 हिंदी अर्थ
(लोगों) मोहम्मद तुम्हारे मर्दों में से (हक़ीक़तन) किसी के बाप नहीं हैं (फिर जैद की बीवी क्यों हराम होने लगी) बल्कि अल्लाह के रसूल और नबियों की मोहर (यानी ख़त्म करने वाले) हैं और खुदा तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अबा (पिता): यहाँ अर्थ है जैविक पिता।
  • ख़ातमुन नबिय्यीन (خاتم النبيين): अंतिम नबी, जिनके बाद कोई नबी नहीं आएगा।
  • अलीमन (عليماً): सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान से कुछ भी छिपा न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी मुहम्मद ﷺ की महान स्थिति को स्पष्ट करते हुए फ़रमाता है कि मुहम्मद ﷺ तुम्हारे किसी भी पुरुष के जैविक पिता नहीं हैं। यह बात उस समय के सामाजिक संदर्भ में विशेष महत्व रखती थी, जब रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत ज़ैद बिन हारिसा (रज़ियल्लाहु अन्हु) को गोद लिया था और लोग उन्हें "ज़ैद बिन मुहम्मद" कहकर पुकारते थे। अल्लाह ने यह स्पष्ट कर दिया कि गोद लेने से किसी का जैविक पिता नहीं बना जाता, और यह प्रथा इस्लाम में समाप्त कर दी गई।

इसके बाद अल्लाह तआला अपने रसूल की सबसे बड़ी विशेषता बयान करता है: "वह अल्लाह के रसूल और नबियों की मुहर (अंतिम कड़ी) हैं।" यानी मुहम्मद ﷺ अल्लाह के भेजे हुए संदेशवाहक हैं और उनके बाद कोई नबी नहीं आएगा। वे नबुव्वत की श्रृंखला की अंतिम कड़ी हैं, जो आदम (अलैहिस्सलाम) से शुरू होकर उन पर पूरी हो गई। यह उनकी सबसे बड़ी विशेषता है जो उन्हें सभी नबियों से अलग करती है।

आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है: "अल्लाह हर चीज़ का ज्ञान रखने वाला है।" यानी अल्लाह को हर बात का पूर्ण ज्ञान है — चाहे वह लोगों के दिलों के राज़ हों, उनके कर्म हों, या उसकी अपनी तदबीरें (योजनाएँ) हों। उसने अपने नबी के लिए जो कुछ भी चुना, वही सबसे उत्तम और उचित था।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को सबसे अंतिम और सबसे पूर्ण दीन (धर्म) के साथ भेजा। हमें चाहिए कि हम उनकी शिक्षाओं पर अमल करें और उनके बताए रास्ते पर चलें। यह हमारे लिए सबसे बड़ी सौगात है कि हम उस उम्मत (समुदाय) से हैं जिसके नबी ﷺ सभी नबियों के सरताज हैं। हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए और अपने जीवन को उनकी सुन्नत के अनुसार ढालने की कोशिश करनी चाहिए। जो व्यक्ति उनके पैग़ाम को अपना लेता है, वह सच्ची भलाई और सफलता की राह पर चल पड़ता है।



📜 आयत 38-42 — सूरा अल-अहज़ाब

38مَّا كَانَ عَلَى النَّبِيِّ مِنْ حَرَجٍ فِيمَا فَرَضَ اللَّهُ لَهُ ۖ سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلُ ۚ وَكَانَ أَمْرُ اللَّهِ قَدَرًا مَّقْدُورًا
जो हुक्म खुदा ने पैग़म्बर पर फर्ज क़र दिया (उसके करने) में उस पर कोई मुज़ाएका नहीं जो लोग (उनसे) पहले गुज़र चुके हैं उनके बारे में भी खुदा का (यही) दस्तूर (जारी) रहा है (कि निकाह में तंगी न की) और खुदा का हुक्म तो (ठीक अन्दाज़े से) मुक़र्रर हुआ होता है
39الَّذِينَ يُبَلِّغُونَ رِسَالَاتِ اللَّهِ وَيَخْشَوْنَهُ وَلَا يَخْشَوْنَ أَحَدًا إِلَّا اللَّهَ ۗ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ حَسِيبًا
वह लोग जो खुदा के पैग़ामों को (लोगों तक जूँ का तूँ) पहुँचाते थे और उससे डरते थे और खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते थे (फिर तुम क्यों डरते हो) और हिसाब लेने के वास्ते तो खुद काफ़ी है
40مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَٰكِن رَّسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا
(लोगों) मोहम्मद तुम्हारे मर्दों में से (हक़ीक़तन) किसी के बाप नहीं हैं (फिर जैद की बीवी क्यों हराम होने लगी) बल्कि अल्लाह के रसूल और नबियों की मोहर (यानी ख़त्म करने वाले) हैं और खुदा तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
41يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا اللَّهَ ذِكْرًا كَثِيرًا
ऐ ईमानवालों बाकसरत खुदा की याद किया करो और
42وَسَبِّحُوهُ بُكْرَةً وَأَصِيلًا
सुबह व शाम उसकी तसबीह करते रहो
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 40

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Monday, September 28, 2026

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