Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سَادَتَنَا – हमारे सरदार, नेता, बड़े लोग
- كُبَرَاءَنَا – हमारे बड़े-बुज़ुर्ग, जिन्हें हम अपना अभिभावक और अगुआ मानते थे
- فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا – उन्होंने हमें सीधे रास्ते से भटका दिया, हमें गुमराह कर दिया
तफ़सीर (व्याख्या):
क़यामत के दिन जब काफ़िरों को अपने किए पर पछतावा होगा और वे अपनी सच्ची हालत देख लेंगे, तो वे अल्लाह की बारगाह में अपनी बेबसी और मजबूरी ज़ाहिर करेंगे। वे कहेंगे: "ऐ हमारे रब! हमने अपने सरदारों और बड़े-बुज़ुर्गों की बात मानी, उन्हीं के इशारे पर चले, उन्हीं को अपना रहनुमा बनाया, और उन्होंने हमें सीधे रास्ते से भटका दिया। उन्होंने हमें ईमान और हिदायत के रास्ते से हटाकर कुफ्र और गुमराही के गड्ढे में धकेल दिया।"
यह वह मौका होगा जब ये लोग अपने नेताओं और बड़ों को ज़िम्मेदार ठहराएंगे, लेकिन अफसोस! यह पछतावा उस दिन किसी काम न आएगा। अल्लाह तआला ने इस आयत में हमें एक बहुत बड़ी सीख दी है कि इंसान को अंधी पैरवी नहीं करनी चाहिए। किसी भी इंसान की बात तभी माननी चाहिए जब वह अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की शिक्षाओं के अनुरूप हो। जो लोग अपने बड़ों की बात को अल्लाह की बात पर तरजीह देते हैं, वे दुनिया में भी नुकसान उठाते हैं और आख़िरत में भी रुसवा होंगे।
इस आयत से यह भी पता चलता है कि तक़लीद (अंधी पैरवी) और बड़ों की नाफ़रमानी में अंधी फॉलोइंग इंसान को जहन्नम तक ले जाती है। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल दी है, किताब दी है, और रसूल ﷺ का सुन्नत दी है — इन्हीं की रोशनी में हमें अपने जीवन का रास्ता चुनना चाहिए। अगर कोई बड़ा या सरदार हमें अल्लाह की नाफ़रमानी की तरफ बुलाए, तो हमें उसकी बात नहीं माननी चाहिए, चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो।
यह आयत हर मुसलमान के लिए एक चेतावनी है कि वह अपने आचरण, अपने नेताओं के चुनाव और अपनी पैरवी के बारे में सोचे। क़यामत के दिन कोई बहाना काम नहीं आएगा कि "हमने तो अपने बड़ों की बात मानी थी।" हर इंसान अपने किए का ज़िम्मेदार खुद होगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से बनाए जो सुनते हैं, समझते हैं और अल्लाह की राह पर चलते हैं। आमीन।
📜 आयत 65-69 — सूरा अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 67
सूरा अल-अहज़ाब आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहेंगे कि परवरदिगारहमने अपने सरदारों अपने बड़ों का कहना…सूरा आयत 67/73 — सूरा अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहज़ाब सुनें, सूरा अल-अहज़ाब अनुवाद, सूरा अल-अहज़ाब mp3, सूरा अल-अहज़ाब pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहज़ाब
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


