अल-अहज़ाब · 67/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَقَالُوا رَبَّنَا إِنَّا أَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَاءَنَا فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا ۝٦٧
Wa qaaloo Rabbanaaa innaaa ata`naa saadatanaa wa kubaraaa`anaa fa adalloonas sabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
और कहेंगे कि परवरदिगारहमने अपने सरदारों अपने बड़ों का कहना माना तो उन्हों ही ने हमें गुमराह कर दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سَادَتَنَا – हमारे सरदार, नेता, बड़े लोग
  • كُبَرَاءَنَا – हमारे बड़े-बुज़ुर्ग, जिन्हें हम अपना अभिभावक और अगुआ मानते थे
  • فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا – उन्होंने हमें सीधे रास्ते से भटका दिया, हमें गुमराह कर दिया

तफ़सीर (व्याख्या):

क़यामत के दिन जब काफ़िरों को अपने किए पर पछतावा होगा और वे अपनी सच्ची हालत देख लेंगे, तो वे अल्लाह की बारगाह में अपनी बेबसी और मजबूरी ज़ाहिर करेंगे। वे कहेंगे: "ऐ हमारे रब! हमने अपने सरदारों और बड़े-बुज़ुर्गों की बात मानी, उन्हीं के इशारे पर चले, उन्हीं को अपना रहनुमा बनाया, और उन्होंने हमें सीधे रास्ते से भटका दिया। उन्होंने हमें ईमान और हिदायत के रास्ते से हटाकर कुफ्र और गुमराही के गड्ढे में धकेल दिया।"

यह वह मौका होगा जब ये लोग अपने नेताओं और बड़ों को ज़िम्मेदार ठहराएंगे, लेकिन अफसोस! यह पछतावा उस दिन किसी काम न आएगा। अल्लाह तआला ने इस आयत में हमें एक बहुत बड़ी सीख दी है कि इंसान को अंधी पैरवी नहीं करनी चाहिए। किसी भी इंसान की बात तभी माननी चाहिए जब वह अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की शिक्षाओं के अनुरूप हो। जो लोग अपने बड़ों की बात को अल्लाह की बात पर तरजीह देते हैं, वे दुनिया में भी नुकसान उठाते हैं और आख़िरत में भी रुसवा होंगे।

इस आयत से यह भी पता चलता है कि तक़लीद (अंधी पैरवी) और बड़ों की नाफ़रमानी में अंधी फॉलोइंग इंसान को जहन्नम तक ले जाती है। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल दी है, किताब दी है, और रसूल ﷺ का सुन्नत दी है — इन्हीं की रोशनी में हमें अपने जीवन का रास्ता चुनना चाहिए। अगर कोई बड़ा या सरदार हमें अल्लाह की नाफ़रमानी की तरफ बुलाए, तो हमें उसकी बात नहीं माननी चाहिए, चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो।

यह आयत हर मुसलमान के लिए एक चेतावनी है कि वह अपने आचरण, अपने नेताओं के चुनाव और अपनी पैरवी के बारे में सोचे। क़यामत के दिन कोई बहाना काम नहीं आएगा कि "हमने तो अपने बड़ों की बात मानी थी।" हर इंसान अपने किए का ज़िम्मेदार खुद होगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से बनाए जो सुनते हैं, समझते हैं और अल्लाह की राह पर चलते हैं। आमीन।



📜 आयत 65-69 — अल-अहज़ाब

65خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ لَّا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
जिसमें वह हमेशा अबदल आबाद रहेंगे न किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे न मद्दगार
66يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ يَقُولُونَ يَا لَيْتَنَا أَطَعْنَا اللَّهَ وَأَطَعْنَا الرَّسُولَا
जिस दिन उनके मुँह जहन्नुम की तरफ फेर दिए जाएँगें तो उस दिन अफ़सोसनाक लहजे में कहेंगे ऐ काश हमने खुदा की इताअत की होती और रसूल का कहना माना होता
67وَقَالُوا رَبَّنَا إِنَّا أَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَاءَنَا فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا
और कहेंगे कि परवरदिगारहमने अपने सरदारों अपने बड़ों का कहना माना तो उन्हों ही ने हमें गुमराह कर दिया
68رَبَّنَا آتِهِمْ ضِعْفَيْنِ مِنَ الْعَذَابِ وَالْعَنْهُمْ لَعْنًا كَبِيرًا
परवरदिगारा (हम पर तो अज़ाब सही है मगर) उन लोगों पर दोहरा अज़ाब नाज़िल कर और उन पर बड़ी से बड़ी लानत कर
69يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ آذَوْا مُوسَىٰ فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمَّا قَالُوا ۚ وَكَانَ عِندَ اللَّهِ وَجِيهًا
ऐ ईमानवालों (ख़बरदार कहीं) तुम लोग भी उनके से न हो जाना जिन्होंने मूसा को तकलीफ दी तो खुदा ने उनकी तोहमतों से मूसा को बरी कर दिया और मूसा खुदा के नज़दीक एक रवादार (इज्ज़त करने वाले) (पैग़म्बर) थे
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
67आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 67

सूरा अल-अहज़ाब आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहेंगे कि परवरदिगारहमने अपने सरदारों अपने बड़ों का कहना…

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Tuesday, August 18, 2026

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