अल-अहज़ाब · 68/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
رَبَّنَا آتِهِمْ ضِعْفَيْنِ مِنَ الْعَذَابِ وَالْعَنْهُمْ لَعْنًا كَبِيرًا ۝٦٨
Rabbanaaa aatihim di`fai ni minal `azaabi wal`anhum la nan kabeera
📖 हिंदी अर्थ
परवरदिगारा (हम पर तो अज़ाब सही है मगर) उन लोगों पर दोहरा अज़ाब नाज़िल कर और उन पर बड़ी से बड़ी लानत कर
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आतिहिम (آتِهِمْ): उन्हें दे दे
  • दिअफ़ैन (ضِعْفَيْنِ): दोगुना, दो गुना अज़ाब
  • अल-अज़ाब (الْعَذَابِ): यातना, दंड
  • वल्अनहुम (وَالْعَنْهُمْ): और उन्हें लानत दे, अपनी रहमत से दूर कर दे
  • लअनन कबीरन (لَعْنًا كَبِيرًا): बहुत बड़ी लानत, अत्यधिक फटकार

तफ़सीर (व्याख्या):

क़यामत के दिन जब काफ़िर और गुनाहगार लोग अपने अंजाम को देखेंगे, तो वे अपने उन रहनुमाओं और बड़ों को कोसेंगे जिन्होंने उन्हें गुमराह किया। वे अल्लाह से फ़रियाद करेंगे और कहेंगे: "ऐ हमारे रब! हमने अपने सरदारों और बड़े लोगों की बात मानी, उन्होंने हमें सीधे रास्ते से भटका दिया और हमें तेरी इबादत से दूर कर दिया।"

फिर वे दुआ करेंगे: "ऐ हमारे पालनहार! इन गुमराह करने वालों को दोगुना अज़ाब दे — एक अज़ाब उनके कुफ़्र और गुनाह का, और दूसरा अज़ाब इसलिए कि उन्होंने हमें भी गुमराह किया। और उन्हें अपनी रहमत से पूरी तरह महरूम कर दे, उन पर ऐसी लानत भेज जो हमेशा के लिए हो और जिसका कोई अंत न हो।"

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की नाफ़रमानी में किसी की भी बात मानना — चाहे वह बड़ा हो, सरदार हो, या रहनुमा — इंसान को हलाकत की तरफ ले जाता है। जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं और जो उनकी बात मानकर गुमराह होते हैं, दोनों अज़ाब में शरीक होंगे, लेकिन गुमराह करने वालों का अज़ाब दोगुना होगा।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन में सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत (आज्ञा) को सबसे ऊपर रखना चाहिए। किसी भी इंसान की बात, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर वह क़ुरआन और सुन्नत के खिलाफ़ है, तो उसे क़बूल नहीं करना चाहिए। याद रखिए! क़यामत के दिन कोई किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकेगा, और हर इंसान अपने अमल का हिसाब खुद देगा।

अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें गुमराह करने वालों की सोहबत से बचाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 66-70 — अल-अहज़ाब

66يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ يَقُولُونَ يَا لَيْتَنَا أَطَعْنَا اللَّهَ وَأَطَعْنَا الرَّسُولَا
जिस दिन उनके मुँह जहन्नुम की तरफ फेर दिए जाएँगें तो उस दिन अफ़सोसनाक लहजे में कहेंगे ऐ काश हमने खुदा की इताअत की होती और रसूल का कहना माना होता
67وَقَالُوا رَبَّنَا إِنَّا أَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَاءَنَا فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا
और कहेंगे कि परवरदिगारहमने अपने सरदारों अपने बड़ों का कहना माना तो उन्हों ही ने हमें गुमराह कर दिया
68رَبَّنَا آتِهِمْ ضِعْفَيْنِ مِنَ الْعَذَابِ وَالْعَنْهُمْ لَعْنًا كَبِيرًا
परवरदिगारा (हम पर तो अज़ाब सही है मगर) उन लोगों पर दोहरा अज़ाब नाज़िल कर और उन पर बड़ी से बड़ी लानत कर
69يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ آذَوْا مُوسَىٰ فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمَّا قَالُوا ۚ وَكَانَ عِندَ اللَّهِ وَجِيهًا
ऐ ईमानवालों (ख़बरदार कहीं) तुम लोग भी उनके से न हो जाना जिन्होंने मूसा को तकलीफ दी तो खुदा ने उनकी तोहमतों से मूसा को बरी कर दिया और मूसा खुदा के नज़दीक एक रवादार (इज्ज़त करने वाले) (पैग़म्बर) थे
70يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَقُولُوا قَوْلًا سَدِيدًا
ऐ ईमानवालों खुदा से डरते रहो और (जब कहो तो) दुरूस्त बात कहा करो
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
68आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 68

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सूरा आयत 68/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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