अल-अहज़ाब · 66/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ يَقُولُونَ يَا لَيْتَنَا أَطَعْنَا اللَّهَ وَأَطَعْنَا الرَّسُولَا ۝٦٦
Yawma tuqallabu wujoohuhum fin Naari yaqooloona yaa laitanaaa ata`nal laaha wa ata`nar Rasoolaa
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन उनके मुँह जहन्नुम की तरफ फेर दिए जाएँगें तो उस दिन अफ़सोसनाक लहजे में कहेंगे ऐ काश हमने खुदा की इताअत की होती और रसूल का कहना माना होता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ – उनके चेहरे पलटे जाएँगे (एक तरफ़ से दूसरी तरफ़)।
  • يَا لَيْتَنَا – काश! हमने… (पछतावे और अफ़सोस का कल्पना)।

तफ़सीर:

क़ियामत के दिन उन काफ़िरों के चेहरे आग में पलटे जाएँगे—कभी उन्हें आग की तरफ़ किया जाएगा, कभी उल्टा किया जाएगा, और वे जहन्नुम की आग में खींचे जाते हुए बुरी तरह तड़पेंगे। उस वक़्त उनकी ज़बान से निकलेगा: "काश! हमने दुनिया में अल्लाह की इताअत की होती और उसके रसूल का हुक्म माना होता।"

ये पुकार महज़ अफ़सोस और पछतावे का इज़हार होगी, जब उन्हें अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन वो एहसास उस वक़्त बेकार होगा। वे देखेंगे कि जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की बात मानी, वे जन्नत में हैं, और उन्होंने नाफ़रमानी की, तो अब वे जहन्नुम में हैं।

ये आयत हमें बताती है कि दुनिया की ज़िंदगी में अल्लाह और उसके रसूल की इताअत ही सच्ची कामयाबी है। रसूल ﷺ का पैग़ाम सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम है—जो उनकी इताअत करे, उसने अल्लाह की इताअत की।

प्यारे भाइयो और बहनो! आज हमारे पास मौक़ा है कि हम उस दिन के अफ़सोस से पहले ही अपनी ज़िंदगी को सही कर लें। ये कल्पना मत कीजिए कि हम कल तौबा कर लेंगे—मौत कब आ जाए, पता नहीं। आज ही अल्लाह की इताअत का रास्ता अपनाइए, रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनी ज़िंदगी में उतारिए, ताकि क़ियामत के दिन हम उन लोगों में से न हों जो पछताएँगे, बल्कि उन लोगों में से हों जिनके चेहरे जन्नत की नेमतों से चमकेंगे। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 64-68 — अल-अहज़ाब

64إِنَّ اللَّهَ لَعَنَ الْكَافِرِينَ وَأَعَدَّ لَهُمْ سَعِيرًا
ख़ुदा ने क़ाफिरों पर यक़ीनन लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है
65خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ لَّا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
जिसमें वह हमेशा अबदल आबाद रहेंगे न किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे न मद्दगार
66يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ يَقُولُونَ يَا لَيْتَنَا أَطَعْنَا اللَّهَ وَأَطَعْنَا الرَّسُولَا
जिस दिन उनके मुँह जहन्नुम की तरफ फेर दिए जाएँगें तो उस दिन अफ़सोसनाक लहजे में कहेंगे ऐ काश हमने खुदा की इताअत की होती और रसूल का कहना माना होता
67وَقَالُوا رَبَّنَا إِنَّا أَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَاءَنَا فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا
और कहेंगे कि परवरदिगारहमने अपने सरदारों अपने बड़ों का कहना माना तो उन्हों ही ने हमें गुमराह कर दिया
68رَبَّنَا آتِهِمْ ضِعْفَيْنِ مِنَ الْعَذَابِ وَالْعَنْهُمْ لَعْنًا كَبِيرًا
परवरदिगारा (हम पर तो अज़ाब सही है मगर) उन लोगों पर दोहरा अज़ाब नाज़िल कर और उन पर बड़ी से बड़ी लानत कर
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
66आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 66

सूरा अल-अहज़ाब आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन उनके मुँह जहन्नुम की तरफ फेर दिए जाएँगें…

सूरा आयत 66/73 — अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अहज़ाब सुनें, अल-अहज़ाब अनुवाद, अल-अहज़ाब mp3, अल-अहज़ाब pdf. आयत 64–68. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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