सबा · 44/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَمَا آتَيْنَاهُم مِّن كُتُبٍ يَدْرُسُونَهَا ۖ وَمَا أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمْ قَبْلَكَ مِن نَّذِيرٍ ۝٤٤
Wa maaa aatainaahum min Kutubiny yadrusoonahaa wa maaa arsalnaaa ilaihim qablaka min nazeer
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमने तो उन लोगों को न (आसमानी) किताबें अता की तुम्हें जिन्हें ये लोग पढ़ते और न तुमसे पहले इन लोगों के पास कोई डरानेवाला (पैग़म्बर) भेजा (उस पर भी उन्होंने क़द्र न की)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آتَيْنَاهُم – हमने उन्हें दिया
  • كُتُبٍ – किताबें (ग्रंथ)
  • يَدْرُسُونَهَا – जिन्हें वे पढ़ते हों
  • نَذِيرٍ – डराने वाला (चेतावनी देने वाला पैगंबर)

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन काफ़िरों की उस झूठी दलील का खंडन कर रहे हैं जो वे पैगंबर मुहम्मद ﷺ के खिलाफ़ पेश करते थे। वे कहते थे कि आप ﷺ जो कुरआन लेकर आए हैं, यह कोई नई चीज़ नहीं है, बल्कि पुरानी किताबों से लिया गया जादू या मनगढ़ंत कहानी है। अल्लाह फ़रमाता है: हमने इन काफ़िरों को पहले कोई किताब नहीं दी थी जिसे वे पढ़ते हों और जिसके आधार पर वे यह दावा कर सकें कि यह कुरआन झूठ है। न ही हमने आप ﷺ से पहले उनके पास कोई डराने वाला पैगंबर भेजा था।

यहाँ अल्लाह तआला साफ़ कर रहे हैं कि इन लोगों के पास न तो कोई आसमानी किताब है, न ही कोई पिछला नबी आया है जो उन्हें सच्चाई की राह दिखाता। उनके पास न तो कोई इल्मी सबूत है और न ही कोई नबुव्वत का सिलसिला। वे सिर्फ़ अंदाज़ों और ख़यालात पर चल रहे हैं। यह उनकी बड़ी भूल है कि वे सच्चे पैगंबर ﷺ को झुठला रहे हैं, जबकि उनके पास कोई ठोस दलील नहीं है।

इस आयत में अल्लाह तआला यह भी बताना चाहते हैं कि मुहम्मद ﷺ का आना कोई अनोखी बात नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि वह हर क़ौम की तरफ़ नबी भेजता है। लेकिन इन लोगों के पास पहले कोई नबी नहीं आया था, इसलिए उनके पास यह कहने का कोई हक़ नहीं कि हमें पहले कोई चेतावनी देने वाला नहीं मिला। अब जब आप ﷺ आ गए हैं, तो उनके पास बहाने की कोई गुंजाइश नहीं बची।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने हमें कितनी बड़ी नेमत दी है – कुरआन और सुन्नत की शक्ल में। हमें इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए और इसे पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना चाहिए। जिन लोगों के पास कोई किताब या नबी नहीं था, उन पर अल्लाह की हुज्जत (दलील) क़ायम हो गई जब पैगंबर ﷺ आए। आज हमारे पास कुरआन मौजूद है – जो आख़िरी किताब है और हमारे पास आख़िरी नबी ﷺ की सुन्नत है। यह हमारे लिए सबसे बड़ी रहमत है। हमें चाहिए कि इस रहमत को पकड़ें और दूसरों तक पहुँचाएँ, ताकि हर इंसान सीधी राह पा सके। अल्लाह तआला हमें सच्ची समझ अता करे। आमीन।



📜 आयत 42-46 — सबा

42فَالْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ نَّفْعًا وَلَا ضَرًّا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
तब (खुदा फरमाएगा) आज तो तुममें से कोई न दूसरे के फायदे ही पहुँचाने का इख्तेयार रखता है और न ज़रर का और हम सरकशों से कहेंगे कि (आज) उस अज़ाब के मज़े चखो जिसे तुम (दुनिया में) झुठलाया करते थे
43وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا رَجُلٌ يُرِيدُ أَن يَصُدَّكُمْ عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُكُمْ وَقَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا إِفْكٌ مُّفْتَرًى ۚ وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और जब उनके सामने हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें पढ़ी जाती थीं तो बाहम कहते थे कि ये (रसूल) भी तो बस (हमारा ही जैसा) आदमी है ये चाहता है कि जिन चीज़ों को तुम्हारे बाप-दादा पूजते थे (उनकी परसतिश) से तुम को रोक दें और कहने लगे कि ये (क़ुरान) तो बस निरा झूठ है और अपने जी का गढ़ा हुआ है और जो लोग काफ़िर हो बैठो जब उनके पास हक़ बात आयी तो उसके बारे में कहने लगे कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
44وَمَا آتَيْنَاهُم مِّن كُتُبٍ يَدْرُسُونَهَا ۖ وَمَا أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمْ قَبْلَكَ مِن نَّذِيرٍ
और (ऐ रसूल) हमने तो उन लोगों को न (आसमानी) किताबें अता की तुम्हें जिन्हें ये लोग पढ़ते और न तुमसे पहले इन लोगों के पास कोई डरानेवाला (पैग़म्बर) भेजा (उस पर भी उन्होंने क़द्र न की)
45وَكَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ وَمَا بَلَغُوا مِعْشَارَ مَا آتَيْنَاهُمْ فَكَذَّبُوا رُسُلِي ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
और जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों को) झुठलाया था हालॉकि हमने जितना उन लोगों को दिया था ये लोग (अभी) उसके दसवें हिस्सा को (भी) नहीं पहुँचे उस पर उन लोगों न मेरे (पैग़म्बरों को) झुठलाया था तो तुमने देखा कि मेरा (अज़ाब उन पर) कैसा सख्त हुआ
46۞ قُلْ إِنَّمَا أَعِظُكُم بِوَاحِدَةٍ ۖ أَن تَقُومُوا لِلَّهِ مَثْنَىٰ وَفُرَادَىٰ ثُمَّ تَتَفَكَّرُوا ۚ مَا بِصَاحِبِكُم مِّن جِنَّةٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌ لَّكُم بَيْنَ يَدَيْ عَذَابٍ شَدِيدٍ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तुमसे नसीहत की बस एक बात कहता हूँ (वह) ये (है) कि तुम लोग बाज़ खुदा के वास्ते एक-एक और दो-दो उठ खड़े हो और अच्छी तरह ग़ौर करो तो (देख लोगे कि) तुम्हारे रफीक़ (मोहम्मद स0) को किसी तरह का जुनून नहीं वह तो बस तुम्हें एक सख्त अज़ाब (क़यामत) के सामने (आने) से डराने वाला है
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अनुवाद — सबा 44

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सूरा आयत 44/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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