अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مِعْشَارَ: दसवाँ हिस्सा, दस में से एक भाग।
- نَكِيرِ: मेरा इनकार, मेरी सज़ा, मेरा क्रोध और प्रकोप।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनकी उम्मत को तसल्ली देते हुए बताते हैं कि ऐ नबी! आप अकेले नहीं हैं जिन्हें झुठलाया गया। आपसे पहले भी कई उम्मतें थीं—आद, समूद, क़ौमे लूत, क़ौमे इब्राहीम और अन्य—जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया। उन उम्मतों को अल्लाह ने ज़बरदस्त क़ुव्वत, बेशुमार माल, लंबी उम्र और ढेरों नेमतें दी थीं। मगर जब उन्होंने हक़ को नकारा और रसूलों की नाफ़रमानी की, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पड़ा और उन्हें तबाह कर दिया गया।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि मक्का के काफ़िरों ने भी तुम्हें झुठलाया है, लेकिन उन्हें उन पिछली उम्मतों का दसवाँ हिस्सा भी नहीं दिया गया था—ना उनकी क़ुव्वत, ना उनका माल, ना उनकी तादाद। फिर भी उन्होंने रसूलों को झुठलाया। जब पिछली उम्मतें अपनी ताक़त और सामर्थ्य के बावजूद अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सकीं, तो इन कमज़ोर लोगों का क्या हाल होगा?
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "देखो, मेरा इनकार और मेरी सज़ा कैसी थी!" यानी जब मैंने उन पर अपना प्रकोप उतारा, तो ना उनकी ताक़त काम आई, ना उनका माल, ना उनकी फ़ौजें। सब कुछ तबाह हो गया। यह एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है कि ऐ काफ़िरों! अगर तुम भी अपनी ज़िद और इनकार पर अड़े रहे, तो तुम्हारा अंजाम भी उन्हीं जैसा होगा।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ताक़त के आगे किसी की भी ताक़त नहीं चलती। जो लोग सच्चाई को झुठलाते हैं और हक़ के दुश्मन बनते हैं, उनका अंजाम हमेशा बुरा रहा है। इतिहास गवाह है कि जिन उम्मतों ने अपने नबियों को नकारा, वे मिटा दी गईं। मगर अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है—जो कोई भी अपनी ग़लती से तौबा करके सच्चाई की तरफ़ लौट आए, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसे कामयाबी देता है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें, उनके बताए रास्ते पर क़दम बढ़ाएँ, और कभी भी अपनी ताक़त या माल पर घमंड न करें। क्योंकि असली ताक़त अल्लाह की है, और वही सबसे बड़ा मददगार है। जो लोग अल्लाह के दीन की मदद करते हैं, अल्लाह उनकी मदद करता है और उन्हें इज़्ज़त देता है। आइए, हम उन लोगों में से बनें जो सच्चाई को क़बूल करते हैं और अल्लाह के फ़रमान के आगे सर झुकाते हैं, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 43-47 — सबा
अनुवाद — सबा 45
सूरा सबा आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग उनसे पहले गुज़र गए उन्होंने भी (पैग़म्बरों…सूरा आयत 45/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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