Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नख़्सिफ़ (نَخْسِفَ): धरती में धँसा देना, भूमि में समा देना।
- किसफ़न (كِسَفًا): टुकड़े, टुकड़े (आकाश से गिरने वाले अज़ाब के टुकड़े)।
- मुनीब (مُنِيب): रुजूअ करने वाला, तौबा करने वाला, अपने रब की ओर पलटने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या इन इन्कार करने वालों ने अपने सामने और अपने पीछे की चीज़ों पर नज़र नहीं डाली? यानी जो आसमान उनके ऊपर है और जो ज़मीन उनके नीचे है—क्या उन्होंने इन्हें देखकर अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) का अंदाज़ा नहीं लगाया? यही आसमान और यही ज़मीन उन्हें हर तरफ़ से घेरे हुए हैं। अगर अल्लाह चाहे तो उन्हें ज़मीन में धँसा दे, जैसे उसने क़ारून को धँसाया था, या उन पर आसमान से अज़ाब के टुकड़े गिरा दे, जैसे शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम पर आग बरसाई गई थी।
यानी जिस क़ुदरत ने यह आसमान और ज़मीन बनाए हैं, उसी क़ुदरत के आगे ये लोग बिल्कुल बेबस हैं। वे इन ताक़तों के मुक़ाबले में कुछ भी नहीं कर सकते। अगर अल्लाह चाहे तो एक पल में उनकी ज़मीन उन्हें निगल जाए, या आसमान उन पर टूट पड़े।
इसमें कोई शक नहीं कि इस पूरी कायनात में, इन आसमान और ज़मीन की बनावट में, और इन ताक़तों के इस्तेमाल के इख़्तियार (अधिकार) में, हर उस बंदे के लिए बड़ी निशानी है जो अपने रब की ओर रुजूअ करता है, तौबा करता है, और अपने दिल के साथ अपने अल्लाह की तरफ़ पलटता है।
जो बंदा अपने रब की तरफ़ लौटता है, वह इन निशानियों से सबक़ लेता है। वह समझता है कि जो अल्लाह आसमान और ज़मीन पैदा कर सकता है, जो चाहे तो ज़मीन को धँसा दे और चाहे तो आसमान से अज़ाब बरसा दे, वही अल्लाह मरने के बाद हमें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।
यही वह बंदा है जो अल्लाह की क़ुदरत को पहचानता है, उसकी वहदानियत (एकता) का इक़रार करता है, और अपनी इबादत को सिर्फ़ उसी के लिए ख़ालिस करता है। उसकी निगाहें इन निशानियों पर पड़ती हैं तो उसका ईमान मज़बूत होता है, उसका दिल अल्लाह की महब्बत से भर जाता है, और वह अपने रब की तरफ़ और करीब हो जाता है।
और जो बंदा इन निशानियों से आँखें बंद कर लेता है, वह अपने ही नुक़्सान का सामान करता है। क्योंकि अल्लाह की क़ुदरत से बचकर कोई नहीं जा सकता। यही वह पैग़ाम है जो हर मुसलमान को अपने रब की तरफ़ लौटने, उसकी इबादत में मुस्तक़िम (स्थिर) रहने, और उसकी रहमत की उम्मीद रखते हुए उसके अज़ाब से डरने की तरफ़ बुलाता है।
📜 आयत 7-11 — सूरा सबा
अनुवाद — सबा 9
सूरा सबा आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या उन लोगों ने आसमान और ज़मीन की तरफ…सूरा आयत 9/54 — सूरा सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा सबा सुनें, सूरा सबा अनुवाद, सूरा सबा mp3, सूरा सबा pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा सबा
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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