सबा · 8/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
أَفْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَم بِهِ جِنَّةٌ ۗ بَلِ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ فِي الْعَذَابِ وَالضَّلَالِ الْبَعِيدِ ۝٨
Aftaraa `alal laahi kaziban am bihee jinnah; balil lazeena laa yu`minoona bil Aakhirati fil`azaabi waddad laalil ba`eed
📖 हिंदी अर्थ
क्या उस शख्स (मोहम्मद) ने खुदा पर झूठ तूफान बाँधा है या उसे जुनून (हो गया) है (न मोहम्मद झूठा है न उसे जुनून है) बल्कि खुद वह लोग जो आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते अज़ाब और पहले दरजे की गुमराही में पड़े हुए हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَفْتَرَى: झूठ गढ़ा, आरोप लगाया
  • جِنَّةٌ: पागलपन, दीवानगी
  • الْعَذَابِ: यातना, दंड
  • الضَّلَالِ الْبَعِيدِ: परम पथभ्रष्टता, सत्य से बहुत दूर की गुमराही

तफसीर (व्याख्या):

काफिरों ने आप (ﷺ) के बारे में कहा कि क्या इस व्यक्ति ने अल्लाह पर झूठ गढ़ा है, या इसे पागलपन है जो बिना समझे बोल रहा है? उन्होंने आपके द्वारा लाए गए सत्य को झुठलाने के लिए ये बहाने बनाए। लेकिन अल्लाह ने उनके इस झूठे आरोप का खंडन करते हुए फरमाया कि ऐसा नहीं है जैसा वे कहते हैं। यह व्यक्ति (मुहम्मद ﷺ) सबसे सच्चा है, और उसने अल्लाह की ओर से सत्य के अलावा कुछ नहीं पहुँचाया।

अल्लाह तआला फरमाते हैं कि असल में जो लोग आख़िरत (पुनरुत्थान) पर ईमान नहीं रखते, वही दुनिया में सत्य से दूर की गुमराही में हैं, और आख़िरत में उनके लिए स्थायी यातना है। उनका यह कहना कि "हम मरने के बाद दोबारा उठाए जाएँगे?" यह उनकी गुमराही का सबूत है, क्योंकि अल्लाह जो पहली बार पैदा कर चुका है, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूर्ण रूप से सक्षम है।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हमें आख़िरत पर पूर्ण ईमान रखना चाहिए और उसकी तैयारी करनी चाहिए। जो लोग आख़िरत को भूल जाते हैं, वे दुनिया में भटक जाते हैं और आख़िरत में भी उन्हें सख्त अज़ाब का सामना करना पड़ेगा। यह आयत हमें सच्चाई को स्वीकार करने की तरफ बुलाती है और झूठे आरोपों से बचने की तालीम देती है। अल्लाह का दीन सच्चाई पर आधारित है, और उसका रसूल (ﷺ) सबसे सच्चा और अमानतदार है। हमें चाहिए कि हम उनकी लाई हुई हिदायत को क़बूल करें और उस पर अमल करें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल हो।



📜 आयत 6-10 — सूरा सबा

6وَيَرَى الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ الَّذِي أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ هُوَ الْحَقَّ وَيَهْدِي إِلَىٰ صِرَاطِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
और (ऐ रसूल) जिन लोगों को (हमारी बारगाह से) इल्म अता किया गया है वह जानते हैं कि जो (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल हुआ है बिल्कुल ठीक है और सज़ावार हम्द (व सना) ग़ालिब (खुदा) की राह दिखाता है
7وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا هَلْ نَدُلُّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍ يُنَبِّئُكُمْ إِذَا مُزِّقْتُمْ كُلَّ مُمَزَّقٍ إِنَّكُمْ لَفِي خَلْقٍ جَدِيدٍ
और कुफ्फ़ार (मसख़रेपन से बाहम) कहते हैं कि कहो तो हम तुम्हें ऐसा आदमी (मोहम्मद) बता दें जो तुम से बयान करेगा कि जब तुम (मर कर सड़ ग़ल जाओगे और) बिल्कुल रेज़ा रेज़ा हो जाओगे तो तुम यक़ीनन एक नए जिस्म में आओगे
8أَفْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَم بِهِ جِنَّةٌ ۗ بَلِ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ فِي الْعَذَابِ وَالضَّلَالِ الْبَعِيدِ
क्या उस शख्स (मोहम्मद) ने खुदा पर झूठ तूफान बाँधा है या उसे जुनून (हो गया) है (न मोहम्मद झूठा है न उसे जुनून है) बल्कि खुद वह लोग जो आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते अज़ाब और पहले दरजे की गुमराही में पड़े हुए हैं
9أَفَلَمْ يَرَوْا إِلَىٰ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۚ إِن نَّشَأْ نَخْسِفْ بِهِمُ الْأَرْضَ أَوْ نُسْقِطْ عَلَيْهِمْ كِسَفًا مِّنَ السَّمَاءِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّكُلِّ عَبْدٍ مُّنِيبٍ
तो क्या उन लोगों ने आसमान और ज़मीन की तरफ भी जो उनके आगे और उनके पीछे (सब तरफ से घेरे) हैं ग़ौर नहीं किया कि अगर हम चाहे तो उन लोगों को ज़मीन में धँसा दें या उन पर आसमान का कोई टुकड़ा ही गिरा दें इसमें शक नहीं कि इसमें हर रूजू करने वाले बन्दे के लिए यक़ीनी बड़ी इबरत है
10۞ وَلَقَدْ آتَيْنَا دَاوُودَ مِنَّا فَضْلًا ۖ يَا جِبَالُ أَوِّبِي مَعَهُ وَالطَّيْرَ ۖ وَأَلَنَّا لَهُ الْحَدِيدَ
और हमने यक़ीनन दाऊद को अपनी बारगाह से बुर्जुग़ी इनायत की थी (और पहाड़ों को हुक्म दिया) कि ऐ पहाड़ों तसबीह करने में उनका साथ दो और परिन्द को (ताबेए कर दिया) और उनके वास्ते लोहे को (मोम की तरह) नरम कर दिया था
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अनुवाद — सबा 8

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Wednesday, September 30, 2026

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