फातिर · 13/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُ ۚ وَالَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِ مَا يَمْلِكُونَ مِن قِطْمِيرٍ ۝١٣
Yoolijul laila fin nahaari wa yoolijun nahaara fil laili wa sakhkharash shamsa wal qamara kulluny yajree li ajalim musammaa; zaalikumul lahuu Rabbukum lahul mulk; wallazeena tad`oona min doonihee maa yamlikoona min qitmeer
📖 हिंदी अर्थ
वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल करता है (तो रात बढ़ जाती है) और वही दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल करता है (तो दिन बढ़ जाता है और) उसी ने सूरज और चाँद को अपना मुतीइ बना रखा है कि हर एक अपने (अपने) मुअय्यन (तय) वक्त पर चला करता है वही खुदा तुम्हारा परवरदिगार है उसी की सलतनत है और उसे छोड़कर जिन माबूदों को तुम पुकारते हो वह छुवारों की गुठली की झिल्ली के बराबर भी तो इख़तेयार नहीं रखते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُولِجُ: दाखिल करता है, प्रवेश कराता है।
  • قِطْمِيرٍ: खजूर की गुठली के ऊपर की पतली सफेद झिल्ली।

तफसीर:

अल्लाह तआला अपनी कुदरत के वो नज़ारे दिखा रहा है जो हर पल हमारी आँखों के सामने होते हैं। वह रात को दिन में दाखिल करता है, यानी जितना हिस्सा रात से घटता है, उतना दिन में बढ़ जाता है। और दिन को रात में दाखिल करता है, यानी जितना दिन से घटता है, उतना रात में बढ़ जाता है। इस तरह मौसम और समय का यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। यह कोई इत्तफ़ाक़ नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से तय किया हुआ निज़ाम है।

उसी ने सूरज और चाँद को तुम्हारे लिए मुसख़्खर (वश में) कर रखा है। दोनों अपनी-अपनी मंज़िल की तरफ बड़े नियम और अनुशासन के साथ चल रहे हैं। यह सिलसिला एक मुक़र्रर वक़्त तक जारी रहेगा, जिसे अल्लाह ही जानता है। यह वक़्त क़यामत का दिन है, जब यह पूरा निज़ाम खत्म हो जाएगा और एक नई दुनिया का आग़ाज़ होगा।

यह सब कुछ करने वाला अल्लाह ही है। वही तुम्हारा रब है, और उसी की सल्तनत है। सारी कायनात उसी के हुक्म में चल रही है। लेकिन अफ़सोस! तुम लोग उसके बजाय उन चीज़ों को पुकारते हो, जो न तो कुछ पैदा कर सकती हैं और न ही किसी चीज़ की मालिक हैं। वे तो खजूर की गुठली पर चढ़ी हुई उस बारीक झिल्ली के भी मालिक नहीं हैं, जो बेहद हक़ीर और बेक़दर होती है। तो फिर तुम उन्हें अपना रब कैसे बना सकते हो? क्या यह तुम्हारी अक़्ल का तक़ाज़ा है?

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस रब ने रात और दिन का यह शानदार निज़ाम बनाया, सूरज और चाँद को ताबेदार बनाया, क्या वह तुम्हारी इबादत का हक़दार नहीं? क्या उसके सिवा कोई और है जो तुम्हें ये नेअमतें दे सके? यही वह रब है जो अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें सीधी राह दिखाना चाहता है। जो लोग उसे छोड़कर दूसरों को पुकारते हैं, वह सिर्फ़ अपना नुक़सान करते हैं। अल्लाह तआला ने हमें यह समझाया है ताकि हम सिर्फ़ उसी की इबादत करें, उसी से मदद माँगें और उसी की रहमत के उम्मीदवार बनें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 11-15 — फातिर

11وَاللَّهُ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ جَعَلَكُمْ أَزْوَاجًا ۚ وَمَا تَحْمِلُ مِنْ أُنثَىٰ وَلَا تَضَعُ إِلَّا بِعِلْمِهِ ۚ وَمَا يُعَمَّرُ مِن مُّعَمَّرٍ وَلَا يُنقَصُ مِنْ عُمُرِهِ إِلَّا فِي كِتَابٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
और खुदा ही ने तुम लोगों को (पहले पहल) मिट्टी से पैदा किया फिर नतफ़े से फिर तुमको जोड़ा (नर मादा) बनाया और बग़ैर उसके इल्म (इजाज़त) के न कोई औरत हमेला होती है और न जनती है और न किसी शख्स की उम्र में ज्यादती होती है और न किसी की उम्र से कमी की जाती है मगर वह किताब (लौहे महफूज़) में (ज़रूर) है बेशक ये बात खुदा पर बहुत ही आसान है
12وَمَا يَسْتَوِي الْبَحْرَانِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ سَائِغٌ شَرَابُهُ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ ۖ وَمِن كُلٍّ تَأْكُلُونَ لَحْمًا طَرِيًّا وَتَسْتَخْرِجُونَ حِلْيَةً تَلْبَسُونَهَا ۖ وَتَرَى الْفُلْكَ فِيهِ مَوَاخِرَ لِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(उसकी कुदरत देखो) दो समन्दर बावजूद मिल जाने के यकसाँ नहीं हो जाते ये (एक तो) मीठा खुश ज़ाएका कि उसका पीना सुवारत (ख़ुश्गवार) है और ये (दूसरा) खारी कड़ुवा है और (इस इख़तेलाफ पर भी) तुम लोग दोनों से (मछली का) तरो ताज़ा गोश्त (यकसाँ) खाते हो और (अपने लिए ज़ेवरात (मोती वग़ैरह) निकालते हो जिन्हें तुम पहनते हो और तुम देखते हो कि कश्तियां दरिया में (पानी को) फाड़ती चली जाती हैं ताकि उसके फज्ल (व करम तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम लोग शुक्र करो
13يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُ ۚ وَالَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِ مَا يَمْلِكُونَ مِن قِطْمِيرٍ
वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल करता है (तो रात बढ़ जाती है) और वही दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल करता है (तो दिन बढ़ जाता है और) उसी ने सूरज और चाँद को अपना मुतीइ बना रखा है कि हर एक अपने (अपने) मुअय्यन (तय) वक्त पर चला करता है वही खुदा तुम्हारा परवरदिगार है उसी की सलतनत है और उसे छोड़कर जिन माबूदों को तुम पुकारते हो वह छुवारों की गुठली की झिल्ली के बराबर भी तो इख़तेयार नहीं रखते
14إِن تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَاءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍ
अगर तुम उनको पुकारो तो वह तुम्हारी पुकार को सुनते नहीं अगर (बिफ़रज़े मुहाल) सुनों भी तो तुम्हारी दुआएँ नहीं कुबूल कर सकते और क़यामत के दिन तुम्हारे शिर्क से इन्कार कर बैठेंगें और वाक़िफकार (शख्स की तरह कोई दूसरा उनकी पूरी हालत) तुम्हें बता नहीं सकता
15۞ يَا أَيُّهَا النَّاسُ أَنتُمُ الْفُقَرَاءُ إِلَى اللَّهِ ۖ وَاللَّهُ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَمِيدُ
लोगों तुम सब के सब खुदा के (हर वक्त) मोहताज हो और (सिर्फ) खुदा ही (सबसे) बेपरवा सज़ावारे हम्द (व सना) है
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अनुवाद — फातिर 13

सूरा फातिर आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल करता है…

सूरा आयत 13/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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