Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عِزَّةٍ (इज़्ज़त): यहाँ इसका अर्थ है घमंड, अकड़ और हठ।
- شِقَاقٍ (शिक़ाक़): इसका अर्थ है विरोध, झगड़ा, और दुश्मनी।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की स्थिति बयान कर रहे हैं जिन्होंने सत्य को ठुकरा दिया। ये लोग, विशेष रूप से मक्का के काफ़िर, जब सच्चाई उनके सामने आई तो उन्होंने उसे स्वीकार करने के बजाय घमंड और अकड़ का रास्ता अपनाया। उनके दिलों में अपनी बड़ाई का भाव था, वे खुद को बड़ा समझते थे और इसी घमंड की वजह से उन्होंने अल्लाह की तौहीद (एकता) को कबूल करने से इनकार कर दिया।
साथ ही, वे नबी करीम ﷺ के विरोध में खड़े हो गए, उनसे दुश्मनी रखी और उनके खिलाफ झगड़ा किया। उनका यह रवैया सिर्फ सच्चाई से भटकना नहीं था, बल्कि वे जानबूझकर हठ और विरोध पर अड़े हुए थे। उनका घमंड और विरोध ही उनके इनकार का कारण बना, क्योंकि सच्चाई को स्वीकार करने के लिए नम्रता और खुले दिल की जरूरत होती है, जो उनमें नहीं थी।
यह आयत हमें सिखाती है कि घमंड और हठ इंसान को सत्य से दूर कर देते हैं। जब इंसान के दिल में अकड़ आ जाती है, तो वह सही बात को भी नहीं मानता, चाहे वह कितनी ही स्पष्ट क्यों न हो। इसलिए हमें हमेशा नम्रता और विनम्रता अपनानी चाहिए, क्योंकि यही वह गुण है जो इंसान को हिदायत (मार्गदर्शन) की ओर ले जाता है।
अल्लाह तआला हमें घमंड और हठ से बचाए और हमारे दिलों में सच्चाई को कबूल करने की तौफ़ीक़ (ताकत) पैदा करे। आमीन।
📜 आयत 1-4 — सूरा साद
अनुवाद — साद 2
सूरा साद आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर ये कुफ्फ़ार (ख्वाहमख्वाह) तकब्बुर और अदावत में (पड़े अंधे…सूरा आयत 2/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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