साद · 40/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَإِنَّ لَهُ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَآبٍ ۝٤٠
Wa inna lahoo `indanaa lazulfaa wa husna ma-aab
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक नहीं कि सुलेमान की हमारी बारगाह में कुर्ब व मज़ेलत और उमदा जगह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَزُلْفَىٰ: निकटता, क़ुर्ब (विशेष रूप से अल्लाह की ओर)
  • حُسْنَ مَآبٍ: अच्छा ठिकाना, बेहतरीन आख़िरी मंज़िल (यानी जन्नत)

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमा रहे हैं कि उनके लिए हमारे पास बड़ी ऊँची मर्तबा और क़ुर्ब है। यानी आख़िरत में उन्हें अल्लाह की विशेष निकटता प्राप्त होगी, और उनका आख़िरी ठिकाना बेहद ख़ूबसूरत होगा — वह जन्नत है, जो हर नेकी का अंजाम है।

हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को दुनिया में अल्लाह ने बादशाही, इल्म, हिकमत और कई करामाती ताक़तें अता की थीं — जिन्न और इंसान उनके ताबे थे, हवा उनके हुक्म में चलती थी, और पक्षी उनसे बातें करते थे। लेकिन इन सब दुनियावी नेअमतों के बावजूद, उनकी असली कामयाबी और सबसे बड़ी नेअमत आख़िरत में अल्लाह की क़ुर्ब और जन्नत है। यह बताता है कि दुनिया की चमक-दमक और ताक़त कुछ भी नहीं अगर आख़िरत में अल्लाह की नज़दीकी और उसकी रज़ा हासिल न हो।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को दुनिया में भी नेअमतें देता है और आख़िरत में भी उन्हें अपनी क़ुर्ब और जन्नत से नवाज़ता है। यह अल्लाह का फ़ज़ल और करम है कि वह अपने प्यारे बंदों को दोनों जहान की भलाई अता करता है।

हमें भी हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) की तरह अल्लाह की इबादत और शुक्रगुज़ारी में मशग़ूल रहना चाहिए, ताकि हम भी उसकी क़ुर्ब और हुस्ने मआब (जन्नत) के हक़दार बन सकें। याद रखिए, दुनिया की कोई भी नेअमत आख़िरत की नेअमत के मुक़ाबले में बहुत छोटी है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें अपनी क़ुर्ब और जन्नत अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 38-42 — साद

38وَآخَرِينَ مُقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ
सबको (ताबेए कर दिया और इसके अलावा) दूसरे देवों को भी जो ज़ंज़ीरों में जकड़े हुए थे
39هَٰذَا عَطَاؤُنَا فَامْنُنْ أَوْ أَمْسِكْ بِغَيْرِ حِسَابٍ
ऐ सुलेमान ये हमारी बेहिसाब अता है पस (उसे लोगों को देकर) एहसान करो या (सब) अपने ही पास रखो
40وَإِنَّ لَهُ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَآبٍ
और इसमें शक नहीं कि सुलेमान की हमारी बारगाह में कुर्ब व मज़ेलत और उमदा जगह है
41وَاذْكُرْ عَبْدَنَا أَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الشَّيْطَانُ بِنُصْبٍ وَعَذَابٍ
और (ऐ रसूल) हमारे (ख़ास) बन्दे अय्यूब को याद करो जब उन्होंने अपने परवरगिार से फरियाद की कि मुझको शैतान ने बहुत अज़ीयत और तकलीफ पहुँचा रखी है
42ارْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَٰذَا مُغْتَسَلٌ بَارِدٌ وَشَرَابٌ
तो हमने कहा कि अपने पाँव से (ज़मीन को) ठुकरा दो और चश्मा निकाला तो हमने कहा (ऐ अय्यूब) तुम्हारे नहाने और पीने के वास्ते ये ठन्डा पानी (हाज़िर) है
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अनुवाद — साद 40

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Tuesday, August 18, 2026

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