साद · 41/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
وَاذْكُرْ عَبْدَنَا أَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الشَّيْطَانُ بِنُصْبٍ وَعَذَابٍ ۝٤١
Wazkur `abdanaaa Ayyoob; iz naada Rabbahooo annee massaniyash Shaitaanu binus binw wa `azaab
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमारे (ख़ास) बन्दे अय्यूब को याद करो जब उन्होंने अपने परवरगिार से फरियाद की कि मुझको शैतान ने बहुत अज़ीयत और तकलीफ पहुँचा रखी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُصْبٍ (नुस्बिन): अत्यधिक थकान, कष्ट और परिश्रम।
  • عَذَابٍ (अज़ाबिन): पीड़ा और दर्द, जो शरीर, धन या परिवार में हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपने उस नेक बंदे अय्यूब (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र कीजिए, जब उन्होंने अपने रब को पुकारा और कहा: "मेरे रब! मुझे शैतान ने कष्ट और पीड़ा में डाल दिया है।"

हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के बहुत ही प्यारे और सब्र करने वाले नबी थे। उन्हें अल्लाह ने धन, संतान और सेहत की भरपूर नेमतें दी थीं, लेकिन जब अल्लाह ने उन्हें आज़माया, तो उनका धन चला गया, संतान चली गई और शरीर बीमारी से टूट गया। इस लंबी और कठिन परीक्षा में भी उन्होंने अल्लाह से शिकायत नहीं की, बल्कि अदब के साथ यह कहा कि "मुझे शैतान ने कष्ट और पीड़ा में डाल दिया है।"

ग़ौर कीजिए कि उन्होंने अल्लाह की तरफ़ कोई बुराई नहीं जोड़ी, बल्कि पूरे अदब के साथ अपनी बेबसी और दर्द को रब के सामने रखा। यह एक बहुत बड़ी सीख है कि मुसीबत में इंसान को अल्लाह से शिकायत नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसी से मदद मांगनी चाहिए। हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ अल्लाह ने क़बूल की और उन्हें पूरी सेहत, धन और संतान से नवाज़ा, और उनके सब्र का अज्र दुनिया और आख़िरत दोनों में दिया।

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि जब भी कोई मुसीबत आए, तो हमें अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए, उसी से दुआ मांगनी चाहिए और सब्र करना चाहिए। अल्लाह अपने सब्र करने वाले बंदों को कभी निराश नहीं करता। हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) की तरह हमें भी यक़ीन रखना चाहिए कि हर मुसीबत के बाद अल्लाह की रहमत और मदद ज़रूर आती है। यही ईमान की निशानी है कि इंसान हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखे और उसी से उम्मीद रखे।



📜 आयत 39-43 — सूरा साद

39هَٰذَا عَطَاؤُنَا فَامْنُنْ أَوْ أَمْسِكْ بِغَيْرِ حِسَابٍ
ऐ सुलेमान ये हमारी बेहिसाब अता है पस (उसे लोगों को देकर) एहसान करो या (सब) अपने ही पास रखो
40وَإِنَّ لَهُ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَآبٍ
और इसमें शक नहीं कि सुलेमान की हमारी बारगाह में कुर्ब व मज़ेलत और उमदा जगह है
41وَاذْكُرْ عَبْدَنَا أَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الشَّيْطَانُ بِنُصْبٍ وَعَذَابٍ
और (ऐ रसूल) हमारे (ख़ास) बन्दे अय्यूब को याद करो जब उन्होंने अपने परवरगिार से फरियाद की कि मुझको शैतान ने बहुत अज़ीयत और तकलीफ पहुँचा रखी है
42ارْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَٰذَا مُغْتَسَلٌ بَارِدٌ وَشَرَابٌ
तो हमने कहा कि अपने पाँव से (ज़मीन को) ठुकरा दो और चश्मा निकाला तो हमने कहा (ऐ अय्यूब) तुम्हारे नहाने और पीने के वास्ते ये ठन्डा पानी (हाज़िर) है
43وَوَهَبْنَا لَهُ أَهْلَهُ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةً مِّنَّا وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ
और हमने उनको और उनके लड़के वाले और उनके साथ उतने ही और अपनी ख़ास मेहरबानी से अता किए
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
41आयत

अनुवाद — साद 41

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Monday, September 28, 2026

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