Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- عَطَاؤُنَا – हमारा उपहार, हमारी ओर से दिया गया।
- فَامْنُنْ – तो तुम दो (अर्थात जिसे चाहो दे दो)।
- أَمْسِكْ – रोको (अर्थात जिसे चाहो न दो)।
- بِغَيْرِ حِسَابٍ – बिना किसी हिसाब के, बिना किसी पूछ-गवाह के।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के सम्मान में कही गई है। अल्लाह तआला ने उन्हें एक ऐसा अद्भुत साम्राज्य और शक्ति प्रदान की थी जो किसी और को नहीं दी गई थी। उनके आदेश पर हवाएँ चलती थीं, जिन्नात उनके लिए काम करते थे, कुछ निर्माण करते थे, कुछ समुद्र में गोता लगाकर मोती निकालते थे, और कुछ को ज़ंजीरों में जकड़ दिया गया था। यह सब कुछ अल्लाह की ओर से एक विशेष उपहार था।
इसी संदर्भ में अल्लाह तआला फरमाता है: "यह हमारा उपहार है, ऐ सुलेमान! तो तुम जिसे चाहो दो और जिससे चाहो रोको, इस पर तुमसे कोई हिसाब नहीं लिया जाएगा।" यानी अल्लाह ने उन्हें पूर्ण अधिकार दिया था कि वे अपनी इच्छा से दें या न दें, और यह उनकी महानता और अल्लाह की ओर से विशेष कृपा थी।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को जो नेमतें देता है, वह उनके लिए आज़माइश भी होती हैं और सम्मान भी। हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) ने इस अधिकार का उपयोग पूरी न्याय और हिकमत के साथ किया, और हमेशा अल्लाह के शुक्रगुज़ार रहे।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह जब किसी को धन, अधिकार या शक्ति देता है, तो उसे चाहिए कि वह इसे अल्लाह की राह में खर्च करे, ज़रूरतमंदों की मदद करे, और किसी पर ज़ुल्म न करे। साथ ही, यह भी याद रखे कि यह सब अल्लाह की देन है, और उसे इसका हिसाब देना है। लेकिन हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के लिए यह एक विशेष मर्तबा था कि उन्हें बिना हिसाब के देने और रोकने की इजाज़त दी गई।
इस आयत में एक और बात समझने की है कि अल्लाह तआला अपने प्यारे नबियों को जो कुछ देता है, वह उनके लिए दुनिया में भी नेमत है और आख़िरत में भी। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की दी हुई नेमतों पर शुक्र करें और उन्हें अल्लाह की राह में खर्च करें, ताकि हम भी अल्लाह के प्यारे बंदों में शामिल हो सकें।
📜 आयत 37-41 — सूरा साद
अनुवाद — साद 39
सूरा साद आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ सुलेमान ये हमारी बेहिसाब अता है पस (उसे लोगों…सूरा आयत 39/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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