साद · 61/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
قَالُوا رَبَّنَا مَن قَدَّمَ لَنَا هَٰذَا فَزِدْهُ عَذَابًا ضِعْفًا فِي النَّارِ ۝٦١
Qaaloo Rabbanaa man qaddama lanaa haaza fazidhu `azaaban di`fan fin Naar
📖 हिंदी अर्थ
(फिर वह) अर्ज़ करेगें परवरदिगार जिस शख्स ने हमारा इस (बला) से सामना करा दिया तो तू उस पर हमसे बढ़कर जहन्नुम में दो गुना अज़ाब कर

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَن قَدَّمَ لَنَا هَذَا: जिसने हमें इस (कुफ्र) की ओर अग्रसर किया और हमारे लिए इसका रास्ता आसान बनाया।
  • عَذَابًا ضِعْفًا: दोगुना या कई गुना बढ़ा हुआ अज़ाब।

तफ़सीर:

यह आयत उस हालत का वर्णन करती है जब जहन्नम के अंदर गुनहगार लोग एक-दूसरे को देखेंगे और आपस में झगड़ेंगे। जो लोग कमज़ोर और पैरोकार (अनुयायी) थे, वे अपने सरदारों और बड़ों की तरफ इशारा करके कहेंगे: "ऐ हमारे रब! जिसने हमें इस अंजाम तक पहुँचाया और हमें गुमराही की राह पर डाला, उसे तू आग में दोगुना अज़ाब दे।" यानी वे उन लोगों के लिए अज़ाब में बढ़ोतरी की दुआ करेंगे, जिन्होंने उन्हें सच्चाई से भटकाया और कुफ्र व गुनाह की तरफ बुलाया। यह उनकी मजबूरी और पछतावे का इज़हार होगा, लेकिन उस दिन यह पछतावा और यह दुआ उनके किसी काम न आएगी।

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में हमें बहुत होशियार रहना चाहिए कि हम किसकी बात मान रहे हैं और किसके पीछे चल रहे हैं। जो लोग हमें अल्लाह की राह से भटकाते हैं, वे क़यामत के दिन हमारे दुश्मन बन जाएँगे और हम उन्हें बुरा भला कहेंगे, लेकिन वहाँ कोई मदद नहीं मिलेगी। इसलिए आज ही हमें सच्चाई को पहचानना चाहिए और अल्लाह की किताब व उसके नबी ﷺ की सुन्नत को अपना रहनुमा बनाना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की नेमतों तक पहुँचाएगा। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो दूसरों को गुमराह करते हैं या गुमराहों के पीछे चलते हैं। आमीन।



📜 आयत 59-63 — सूरा साद

59هَٰذَا فَوْجٌ مُّقْتَحِمٌ مَّعَكُمْ ۖ لَا مَرْحَبًا بِهِمْ ۚ إِنَّهُمْ صَالُو النَّارِ
ये (तुम्हारी चेलों की) फौज भी तुम्हारे साथ ही ढूँसी जाएगी उनका भला न हो ये सब भी दोज़ख़ को जाने वाले हैं
60قَالُوا بَلْ أَنتُمْ لَا مَرْحَبًا بِكُمْ ۖ أَنتُمْ قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا ۖ فَبِئْسَ الْقَرَارُ
तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है
61قَالُوا رَبَّنَا مَن قَدَّمَ لَنَا هَٰذَا فَزِدْهُ عَذَابًا ضِعْفًا فِي النَّارِ
(फिर वह) अर्ज़ करेगें परवरदिगार जिस शख्स ने हमारा इस (बला) से सामना करा दिया तो तू उस पर हमसे बढ़कर जहन्नुम में दो गुना अज़ाब कर
62وَقَالُوا مَا لَنَا لَا نَرَىٰ رِجَالًا كُنَّا نَعُدُّهُم مِّنَ الْأَشْرَارِ
और (फिर) खुद भी कहेगें हमें क्या हो गया है कि हम जिन लोगों को (दुनिया में) शरीर शुमार करते थे हम उनको यहाँ (दोज़ख़) में नहीं देखते
63أَتَّخَذْنَاهُمْ سِخْرِيًّا أَمْ زَاغَتْ عَنْهُمُ الْأَبْصَارُ
क्या हम उनसे (नाहक़) मसखरापन करते थे या उनकी तरफ से (हमारी) ऑंखे पलट गयी हैं
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — साद 61

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Friday, October 2, 2026

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