साद · 62/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَقَالُوا مَا لَنَا لَا نَرَىٰ رِجَالًا كُنَّا نَعُدُّهُم مِّنَ الْأَشْرَارِ ۝٦٢
Wa qaaloo ma lanaa laa naraa rijaalan kunnaa na`udduhum minal ashraar
📖 हिंदी अर्थ
और (फिर) खुद भी कहेगें हमें क्या हो गया है कि हम जिन लोगों को (दुनिया में) शरीर शुमार करते थे हम उनको यहाँ (दोज़ख़) में नहीं देखते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا لَنَا لَا نَرَىٰ – हमें क्या हो गया है कि हम नहीं देख रहे हैं?
  • رِجَالًا – पुरुषों को (यहाँ अर्थ: लोगों को)
  • كُنَّا نَعُدُّهُم – जिन्हें हम गिनते थे (अर्थात जिन्हें हम समझते थे)
  • مِنَ الْأَشْرَارِ – बुरे लोगों में से (अर्थात दुष्ट और पतित लोग)

विस्तृत तफ़सीर:

जब अहले-जहन्नम (नर्क वाले) लोग नर्क में प्रवेश कर चुके होंगे और अपनी आँखों से वहाँ के भयानक दृश्य देख रहे होंगे, तो वे आपस में हैरानी और अफ़सोस के साथ कहेंगे: "हमें क्या हो गया है कि हम उन लोगों को नहीं देख रहे हैं जिन्हें हम दुनिया में बुरे और पतित लोगों में गिनते थे?"

ये बात वे उन गरीब और कमज़ोर मुसलमानों के बारे में कहेंगे, जिन्हें दुनिया में वे अपने से नीचे समझते थे, उनका मज़ाक उड़ाते थे और उन्हें तुच्छ जानते थे। वे उन्हें "बुरे लोग" कहते थे, क्योंकि वे ईमान लाए थे और उन्होंने अल्लाह के रसूल का साथ दिया था। अब नर्क में जब वे अपने चारों ओर देखते हैं, तो उन्हें वे लोग नज़र नहीं आते, जिन्हें वे दुनिया में हेय दृष्टि से देखते थे। वे सोचते हैं: क्या हमारा उन्हें तुच्छ समझना गलत था? या वे भी यहाँ हैं, लेकिन हमारी नज़रों से छिपे हुए हैं?

यह उनकी हैरानी और पछतावे का वह लम्हा होगा, जब उन्हें एहसास होगा कि असली इज़्ज़त और बड़ाई अल्लाह के पास ईमान और अच्छे आचरण से है, न कि दुनिया के माल और ओहदे से। वे देखेंगे कि जिन्हें वे "बुरे" कहते थे, वे जन्नत में हैं, और वे खुद जहन्नम में हैं। यह उनके लिए सबसे बड़ी रुसवाई और अफ़सोस का कारण होगा।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें सिखाती है कि किसी इंसान को उसकी दुनियावी हैसियत, माल, ज़ात या रूप-रंग की वजह से हेय न समझें। अल्लाह के पास इज़्ज़त का पैमाना तक़वा (परहेज़गारी) और ईमान है। जिन लोगों को हम दुनिया में कमज़ोर और बेहक़ीक़त समझते हैं, वे अल्लाह के यहाँ बहुत बड़े और मुक़र्रब हो सकते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हर इंसान के साथ अच्छा सुलूक करें, किसी का मज़ाक न उड़ाएँ और न ही किसी को अपने से बेहतर समझने में अहंकार करें। याद रखें, आज जिसे आप तुच्छ समझ रहे हैं, कल वही आपके लिए शफ़ाअत (सिफ़ारिश) करने वाला हो सकता है। अल्लाह हमें अहंकार और दूसरों को नीचा दिखाने से बचाए। आमीन।



📜 आयत 60-64 — साद

60قَالُوا بَلْ أَنتُمْ لَا مَرْحَبًا بِكُمْ ۖ أَنتُمْ قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا ۖ فَبِئْسَ الْقَرَارُ
तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है
61قَالُوا رَبَّنَا مَن قَدَّمَ لَنَا هَٰذَا فَزِدْهُ عَذَابًا ضِعْفًا فِي النَّارِ
(फिर वह) अर्ज़ करेगें परवरदिगार जिस शख्स ने हमारा इस (बला) से सामना करा दिया तो तू उस पर हमसे बढ़कर जहन्नुम में दो गुना अज़ाब कर
62وَقَالُوا مَا لَنَا لَا نَرَىٰ رِجَالًا كُنَّا نَعُدُّهُم مِّنَ الْأَشْرَارِ
और (फिर) खुद भी कहेगें हमें क्या हो गया है कि हम जिन लोगों को (दुनिया में) शरीर शुमार करते थे हम उनको यहाँ (दोज़ख़) में नहीं देखते
63أَتَّخَذْنَاهُمْ سِخْرِيًّا أَمْ زَاغَتْ عَنْهُمُ الْأَبْصَارُ
क्या हम उनसे (नाहक़) मसखरापन करते थे या उनकी तरफ से (हमारी) ऑंखे पलट गयी हैं
64إِنَّ ذَٰلِكَ لَحَقٌّ تَخَاصُمُ أَهْلِ النَّارِ
इसमें शक नहीं कि जहन्नुमियों का बाहम झगड़ना ये बिल्कुल यक़ीनी ठीक है
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अनुवाद — साद 62

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सूरा आयत 62/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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