Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لا مرحبًا بكم: तुम्हारे लिए कोई स्वागत नहीं, तुम्हारा कोई अभिवादन नहीं।
- قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا: तुमने इसे हमारे लिए आगे बढ़ाया, अर्थात तुमने हमें इस रास्ते पर डाला।
- الْقَرَار: ठहरने की जगह, स्थायी निवास।
तफ़सीर:
जब अहले जहन्नम (नर्क वाले) एक-दूसरे से झगड़ेंगे और बहस करेंगे, तो कमज़ोर अनुयायी (पैरोकार) अपने बड़ों और सरदारों से कहेंगे: "बल्कि तुम्हीं पर कोई स्वागत नहीं, तुम्हीं लानत के हक़दार हो!" यानी जिस तरह तुमने हमें बुरा भला कहा और हमें अपने पीछे चलने के लिए मजबूर किया, उसी तरह अब हम तुम्हें जवाब देते हैं कि तुम्हारा कोई स्वागत नहीं।
फिर वे कहेंगे: "तुमने ही तो यह अंजाम हमारे लिए आगे बढ़ाया।" यानी तुमने हमें गुमराह किया, हमें कुफ्र और शिर्क की राह दिखाई, और हमें अपने पीछे चलने पर मजबूर किया। तुमने हमारे लिए इस आग का रास्ता तैयार किया, और अब इसका अंजाम यह है कि हम सब इसी में झुलसेंगे।
आखिर में वे कहेंगे: "तो कितना बुरा है यह ठहरने का स्थान!" यानी यह जहन्नम कितनी बुरी जगह है, जो हम सबका स्थायी निवास बन गई है। यह वाक्य उनके दिल के दर्द, पछतावे और निराशा का इज़हार है, लेकिन वहाँ पछताने का कोई फायदा नहीं होगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है कि हमें अपने बड़ों, उस्तादों और नेताओं की आँख बंद करके पैरवी नहीं करनी चाहिए। हर इंसान को खुद अक्ल से काम लेना चाहिए और सच्चाई को जाँच-परख कर अपनाना चाहिए। अगर कोई हमें गलत रास्ते पर ले जा रहा है, तो हमें उसका साथ छोड़ देना चाहिए, क्योंकि क़यामत के दिन हर कोई अपने किए का ज़िम्मेदार होगा।
साथ ही यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें दूसरों को गुमराह करने से बचना चाहिए। जो लोग दूसरों को गलत रास्ते पर ले जाते हैं, वे सिर्फ दूसरों का नुकसान नहीं करते, बल्कि खुद भी उसी अंजाम में फँसते हैं।
अल्लाह तआला ने हमें कुरान और सुन्नत दी है, ताकि हम सच्चाई की राह पहचानें और उस पर चलें। जो लोग इस राह पर चलेंगे, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो इससे मुँह मोड़ेंगे, उनके लिए यह बुरा अंजाम है। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफीक दे। आमीन।
📜 आयत 58-62 — सूरा साद
अनुवाद — साद 60
सूरा साद आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा…सूरा आयत 60/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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