साद · 60/88
अनुवाद उच्चारण — साद
قَالُوا بَلْ أَنتُمْ لَا مَرْحَبًا بِكُمْ ۖ أَنتُمْ قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا ۖ فَبِئْسَ الْقَرَارُ ۝٦٠
Qaaloo bal antum laa marhabam bikum; antum qaddamtumoohu lanaa fabi`sal qaraar
📖 हिंदी अर्थ
तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لا مرحبًا بكم: तुम्हारे लिए कोई स्वागत नहीं, तुम्हारा कोई अभिवादन नहीं।
  • قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا: तुमने इसे हमारे लिए आगे बढ़ाया, अर्थात तुमने हमें इस रास्ते पर डाला।
  • الْقَرَار: ठहरने की जगह, स्थायी निवास।

तफ़सीर:

जब अहले जहन्नम (नर्क वाले) एक-दूसरे से झगड़ेंगे और बहस करेंगे, तो कमज़ोर अनुयायी (पैरोकार) अपने बड़ों और सरदारों से कहेंगे: "बल्कि तुम्हीं पर कोई स्वागत नहीं, तुम्हीं लानत के हक़दार हो!" यानी जिस तरह तुमने हमें बुरा भला कहा और हमें अपने पीछे चलने के लिए मजबूर किया, उसी तरह अब हम तुम्हें जवाब देते हैं कि तुम्हारा कोई स्वागत नहीं।

फिर वे कहेंगे: "तुमने ही तो यह अंजाम हमारे लिए आगे बढ़ाया।" यानी तुमने हमें गुमराह किया, हमें कुफ्र और शिर्क की राह दिखाई, और हमें अपने पीछे चलने पर मजबूर किया। तुमने हमारे लिए इस आग का रास्ता तैयार किया, और अब इसका अंजाम यह है कि हम सब इसी में झुलसेंगे।

आखिर में वे कहेंगे: "तो कितना बुरा है यह ठहरने का स्थान!" यानी यह जहन्नम कितनी बुरी जगह है, जो हम सबका स्थायी निवास बन गई है। यह वाक्य उनके दिल के दर्द, पछतावे और निराशा का इज़हार है, लेकिन वहाँ पछताने का कोई फायदा नहीं होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बहुत बड़ी सीख देती है कि हमें अपने बड़ों, उस्तादों और नेताओं की आँख बंद करके पैरवी नहीं करनी चाहिए। हर इंसान को खुद अक्ल से काम लेना चाहिए और सच्चाई को जाँच-परख कर अपनाना चाहिए। अगर कोई हमें गलत रास्ते पर ले जा रहा है, तो हमें उसका साथ छोड़ देना चाहिए, क्योंकि क़यामत के दिन हर कोई अपने किए का ज़िम्मेदार होगा।

साथ ही यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें दूसरों को गुमराह करने से बचना चाहिए। जो लोग दूसरों को गलत रास्ते पर ले जाते हैं, वे सिर्फ दूसरों का नुकसान नहीं करते, बल्कि खुद भी उसी अंजाम में फँसते हैं।

अल्लाह तआला ने हमें कुरान और सुन्नत दी है, ताकि हम सच्चाई की राह पहचानें और उस पर चलें। जो लोग इस राह पर चलेंगे, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो इससे मुँह मोड़ेंगे, उनके लिए यह बुरा अंजाम है। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 58-62 — साद

58وَآخَرُ مِن شَكْلِهِ أَزْوَاجٌ
तो ये लोग उन्हीं पड़े चखा करें (कुछ लोगों के बारे में) बड़ों से कहा जाएगा
59هَٰذَا فَوْجٌ مُّقْتَحِمٌ مَّعَكُمْ ۖ لَا مَرْحَبًا بِهِمْ ۚ إِنَّهُمْ صَالُو النَّارِ
ये (तुम्हारी चेलों की) फौज भी तुम्हारे साथ ही ढूँसी जाएगी उनका भला न हो ये सब भी दोज़ख़ को जाने वाले हैं
60قَالُوا بَلْ أَنتُمْ لَا مَرْحَبًا بِكُمْ ۖ أَنتُمْ قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا ۖ فَبِئْسَ الْقَرَارُ
तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा ही भला न हो तो तुम ही लोगों ने तो इस (बला) से हमारा सामना करा दिया तो जहन्नुम भी क्या बुरी जगह है
61قَالُوا رَبَّنَا مَن قَدَّمَ لَنَا هَٰذَا فَزِدْهُ عَذَابًا ضِعْفًا فِي النَّارِ
(फिर वह) अर्ज़ करेगें परवरदिगार जिस शख्स ने हमारा इस (बला) से सामना करा दिया तो तू उस पर हमसे बढ़कर जहन्नुम में दो गुना अज़ाब कर
62وَقَالُوا مَا لَنَا لَا نَرَىٰ رِجَالًا كُنَّا نَعُدُّهُم مِّنَ الْأَشْرَارِ
और (फिर) खुद भी कहेगें हमें क्या हो गया है कि हम जिन लोगों को (दुनिया में) शरीर शुमार करते थे हम उनको यहाँ (दोज़ख़) में नहीं देखते
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अनुवाद — साद 60

सूरा साद आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो चेले कहेंगें (हम क्यों) बल्कि तुम (जहन्नुमी हो) तुम्हारा…

सूरा आयत 60/88 — साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: साद सुनें, साद अनुवाद, साद mp3, साद pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.




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Wednesday, August 19, 2026

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