साद · 65/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
قُلْ إِنَّمَا أَنَا مُنذِرٌ ۖ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ ۝٦٥
Qul innamaaa ana munzirunw wa maa min ilaahim illal laahul Waahidul Qahhaar
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो बस (अज़ाबे खुदा से) डराने वाला हूँ और यकता क़हार खुदा के सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मुन्ज़िर (منذر): डराने वाला, सचेत करने वाला
  • वाहिद (الواحد): एक, जिसका कोई साझी न हो
  • क़ह्हार (القهار): सब पर प्रभुत्व रखने वाला, हर चीज़ को अपने वश में करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपनी क़ौम के इनकार करने वालों से कह दें कि मैं केवल एक डराने वाला हूँ। मेरा काम यही है कि तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से सचेत कर दूँ, जो तुम्हारे कुफ़्र और उसके रसूलों को झुठलाने की वजह से तुम पर आ सकता है। मैं कोई ऐसा इंसान नहीं हूँ जो अपनी तरफ़ से कोई बात कहता हो, बल्कि मैं तो बस अल्लाह का भेजा हुआ सचेत करने वाला हूँ।

और यह भी कह दें कि इस पूरी कायनात में कोई सच्चा माबूद नहीं है, जो इबादत के लायक़ हो, सिवाय अल्लाह के। वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं, न उसकी ज़ात में, न उसके नामों में, न उसकी सिफ़ात में और न उसके कामों में। वही एकमात्र सच्चा ख़ुदा है।

वह क़ह्हार है, यानी सब पर ग़ालिब और सब कुछ उसके क़ाबू में है। हर चीज़ उसके सामने झुकी हुई है, हर मख़लूक़ उसकी ताबेदारी में है। उसकी अज़मत के आगे कोई सर उठा नहीं सकता, और उसके इरादे के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यह सिखाती है कि नबी का काम सिर्फ़ सचेत करना है, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। और जब हम यह जान लें कि अल्लाह एक है और वही सब पर क़ुदरत रखने वाला है, तो हमारा दिल उसी की तरफ़ मुड़ जाता है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले में उसी को अपना मालिक और मददगार बनाएँ। जब हम उसकी क़ुदरत पर यक़ीन करेंगे, तो हमारे अंदर उसका ख़ौफ़ और उसकी मुहब्बत दोनों पैदा होंगे, और यही दोनों चीज़ें हमें नेक रास्ते पर चलाने के लिए काफ़ी हैं। याद रखें, जो इंसान अल्लाह के सिवा किसी और से डरता है या किसी और से उम्मीद रखता है, वह भटक जाता है। सच्ची कामयाबी सिर्फ़ उसी को मिलती है जो अल्लाह को अपना एकमात्र माबूद बनाकर उसी की इबादत करता है।



📜 आयत 63-67 — सूरा साद

63أَتَّخَذْنَاهُمْ سِخْرِيًّا أَمْ زَاغَتْ عَنْهُمُ الْأَبْصَارُ
क्या हम उनसे (नाहक़) मसखरापन करते थे या उनकी तरफ से (हमारी) ऑंखे पलट गयी हैं
64إِنَّ ذَٰلِكَ لَحَقٌّ تَخَاصُمُ أَهْلِ النَّارِ
इसमें शक नहीं कि जहन्नुमियों का बाहम झगड़ना ये बिल्कुल यक़ीनी ठीक है
65قُلْ إِنَّمَا أَنَا مُنذِرٌ ۖ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो बस (अज़ाबे खुदा से) डराने वाला हूँ और यकता क़हार खुदा के सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं
66رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الْعَزِيزُ الْغَفَّارُ
सारे आसमान और ज़मीन का और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान हैं (सबका) परवरदिगार ग़ालिब बड़ा बख्शने वाला है
67قُلْ هُوَ نَبَأٌ عَظِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये (क़यामत) एक बहुत बड़ा वाक़िया है
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
65आयत

अनुवाद — साद 65

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Monday, September 28, 2026

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