साद · 66/88
अनुवाद उच्चारण — साद
رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الْعَزِيزُ الْغَفَّارُ ۝٦٦
Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumal `Azeezul Ghaffaar
📖 हिंदी अर्थ
सारे आसमान और ज़मीन का और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान हैं (सबका) परवरदिगार ग़ालिब बड़ा बख्शने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبُّ: पालनहार, स्वामी, मालिक
  • السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आकाशों (आसमानों) और धरती का
  • الْعَزِيزُ: प्रभुत्वशाली, जो सब पर ग़ालिब हो, जिसे कोई हरा न सके
  • الْغَفَّارُ: अत्यधिक क्षमा करने वाला, जो बार-बार गुनाह माफ करता है

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह तआला की महानता और उसकी असीम दया का परिचय कराती है। अल्लाह ही आसमानों और ज़मीन का पालनहार है, और वही उन सब चीज़ों का मालिक है जो इन दोनों के बीच हैं। यानी पूरा ब्रह्मांड—चाहे वह आकाश की ऊँचाइयाँ हों, ज़मीन की गहराइयाँ हों, या इनके बीच की हर चीज़—सब कुछ उसी के अधीन है। वही उन्हें पैदा करता है, उन्हें पालता है, और उनका प्रबंधन करता है।

अल्लाह الْعَزِيزُ है, यानी वह ऐसा प्रभुत्वशाली है जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। उसके सामने हर ताकत बेबस है, हर सत्ता उसके आगे झुकती है। उसके फैसले को कोई बदल नहीं सकता, और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता। जो उसकी नाफ़रमानी करता है, उसके लिए उसकी पकड़ बहुत सख्त है।

लेकिन साथ ही वह الْغَفَّارُ है, यानी अत्यधिक क्षमा करने वाला। यह उसकी दो सिफ़तों का खूबसूरत संगम है—वह जहाँ अपने दुश्मनों पर सख्त है, वहीं अपने तौबा करने वाले बंदों के लिए बेहद रहमदिल और माफ करने वाला है। जो बंदा अपने गुनाहों से तौबा करके उसकी रज़ा (खुशी) की तरफ लौटता है, अल्लाह उसके सारे गुनाह माफ कर देता है, चाहे वे कितने ही बड़े क्यों न हों।

यह आयत हमें दो बातें सिखाती है: पहली, हमें अल्लाह की अज़मत (महानता) का एहसास करना चाहिए और उसी की इबादत करनी चाहिए, क्योंकि वही हमारा असली मालिक है। दूसरी, हमें उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए—चाहे हमसे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, अल्लाह की क्षमा का दरवाज़ा हमेशा खुला है। बस शर्त यह है कि हम सच्चे दिल से तौबा करें और उसकी ओर लौट आएं।

यही अल्लाह की सबसे बड़ी दया है कि वह अपने बंदों को बार-बार मौका देता है, उनकी गलतियों को माफ करता है, और उन्हें अपनी रहमत के साये में ले लेता है। कितना खुशनसीब है वह बंदा जो इस क्षमाशील प्रभु की तरफ दौड़ता है और उसकी रज़ा पाने की कोशिश करता है!



📜 आयत 64-68 — साद

64إِنَّ ذَٰلِكَ لَحَقٌّ تَخَاصُمُ أَهْلِ النَّارِ
इसमें शक नहीं कि जहन्नुमियों का बाहम झगड़ना ये बिल्कुल यक़ीनी ठीक है
65قُلْ إِنَّمَا أَنَا مُنذِرٌ ۖ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो बस (अज़ाबे खुदा से) डराने वाला हूँ और यकता क़हार खुदा के सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं
66رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الْعَزِيزُ الْغَفَّارُ
सारे आसमान और ज़मीन का और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान हैं (सबका) परवरदिगार ग़ालिब बड़ा बख्शने वाला है
67قُلْ هُوَ نَبَأٌ عَظِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ये (क़यामत) एक बहुत बड़ा वाक़िया है
68أَنتُمْ عَنْهُ مُعْرِضُونَ
जिससे तुम लोग (ख्वाहमाख्वाह) मुँह फेरते हो
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अनुवाद — साद 66

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Wednesday, August 19, 2026

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