अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- काफ़ी — पर्याप्त, काफी होने वाला
- युख़व्विफ़ूनक — वे आपको डराते हैं
- मिन दूनिही — उस (अल्लाह) के सिवा
- युद्लिल — गुमराह करे
- हादी — मार्गदर्शन करने वाला
तफ़सीर:
क्या अल्लाह अपने बंदे (पैगंबर मुहम्मद ﷺ) के लिए पर्याप्त नहीं है? बेशक वह पर्याप्त है! यह एक ऐसा प्रश्न है जो अपने आप में उत्तर समेटे हुए है। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ के लिए दीन और दुनिया दोनों मामलों में काफी है। उसने अपने नबी की हिफाज़त का जिम्मा लिया है और दुश्मनों के मक्र (चाल) से उन्हें बचाने का वादा किया है।
मगर देखिए इन मुशरिकों की नादानी! वे आपको उन माबूदों से डराते हैं जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पूजते हैं। वे कहते हैं कि हमें डर है कि ये देवता आपको नुकसान पहुंचा देंगे या आपको पागल कर देंगे। यानी वे बेजान बुतों से डराते हैं, जो न खुद कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं और न किसी को फायदा दे सकते हैं। कितनी बड़ी जहालत है यह!
फिर अल्लाह तआला फरमाता है: "जिसे अल्लाह गुमराह कर दे, उसके लिए कोई मार्गदर्शन करने वाला नहीं है।" यानी जिसे अल्लाह ने हिदायत से महरूम कर दिया, उसे कोई हिदायत नहीं दे सकता। यह बात उन लोगों के लिए सख्त चेतावनी है जो हक को ठुकराते हैं और बुतों की पूजा पर अड़े रहते हैं।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है — हमें भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब अल्लाह हमारे साथ है तो किसी की परवाह नहीं। दुनिया की तमाम ताकतें मिलकर भी उस बंदे का कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं जिसका साथ अल्लाह दे। यही तो सच्चे मोमिन की पहचान है कि वह अल्लाह पर पूरा भरोसा रखता है और उसकी राह में किसी से नहीं डरता। अल्लाह हमें इसी तौफीक अता फरमाए। आमीन।
📜 आयत 34-38 — अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 36
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ख़ुदा अपने बन्दों (की मदद) के लिए काफ़ी नहीं…सूरा आयत 36/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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