अज़-ज़ुमर · 37/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
وَمَن يَهْدِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن مُّضِلٍّ ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِعَزِيزٍ ذِي انتِقَامٍ ۝٣٧
Wa mai yahdil laahu famalahoo mim mudlil; alai sal laahu bi`azeezin zin tiqaam
📖 हिंदी अर्थ
और जिस शख्स की हिदायत करे तो उसका कोई गुमराह करने वाला नहीं। क्या ख़दा ज़बरदस्त और बदला लेने वाला नहीं है (ज़रूर है)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَهْدِ: मार्गदर्शन करना, सत्य की ओर मार्ग दिखाना
  • مُضِلّ: गुमराह करने वाला, पथभ्रष्ट करने वाला
  • عَزِيز: प्रभुत्वशाली, सर्वशक्तिमान, जिसे कोई पराजित न कर सके
  • ذِي انتِقَام: बदला लेने वाला, प्रतिशोध करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की उस महान शक्ति और कृपा का वर्णन करती है जो वह अपने बंदों पर करता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिसे अल्लाह हिदायत दे दे, उसे कोई गुमराह नहीं कर सकता। यानी जब अल्लाह किसी बंदे को सत्य का मार्ग दिखा देता है, उसके दिल में ईमान की रोशनी डाल देता है, और उसे अपनी किताब पर अमल करने और अपने रसूल की पैरवी करने की तौफ़ीक़ देता है, तो फिर पूरी दुनिया की ताकतें भी उसे रास्ते से भटका नहीं सकतीं।

यह बात हमें बहुत बड़ी खुशखबरी देती है कि अगर हम अल्लाह से जुड़ जाएं, उसकी राह पर चलें, तो कोई शैतान, कोई इंसान, कोई भी ताकत हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकती। अल्लाह की हिफाज़त में जो आ जाए, वह सबसे महफूज़ हो जाता है।

फिर अल्लाह तआला पूछता है: "क्या अल्लाह अपने दुश्मनों से बदला लेने में शक्तिशाली नहीं है?" यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर मुसलमान के दिल में बैठा हुआ है — हाँ, बेशक अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, कोई उसे हरा नहीं सकता, और वह उन लोगों से जरूर बदला लेगा जो उसके साथ कुफ्र करते हैं, उसकी आयतों को झुठलाते हैं, और उसकी नाफरमानी करते हैं।

यह आयत मोमिनीन के लिए सबसे बड़ी तसल्ली है कि अगर दुनिया में जुल्म करने वाले, काफिर और मुनाफिकीन बड़े ताकतवर नजर आते हैं, तो उनकी ताकत अल्लाह के सामने कुछ भी नहीं। अल्लाह उन्हें उनके किए की सजा जरूर देगा। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा संरक्षक और सहायक है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हम अपनी जिंदगी में अल्लाह की हिदायत को सबसे बड़ी नेमत समझें, उस पर अमल करें, और यकीन रखें कि अल्लाह की पकड़ बहुत मजबूत है। जो लोग अल्लाह के दीन का मुकाबला करते हैं, वे चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, अल्लाह उन्हें नाकाम करके रहेगा। यही हमारे ईमान की ताकत है, और यही हमारी कामयाबी का राज़ है।

🎧 सुनें

📜 आयत 35-39 — अज़-ज़ुमर

35لِيُكَفِّرَ اللَّهُ عَنْهُمْ أَسْوَأَ الَّذِي عَمِلُوا وَيَجْزِيَهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ
ताकि ख़ुदा उन लोगों की बुराइयों को जो उन्होने की हैं दूर कर दे और उनके अच्छे कामों के एवज़ जो वह कर चुके थे उसका अज्र (सवाब) अता फरमाए
36أَلَيْسَ اللَّهُ بِكَافٍ عَبْدَهُ ۖ وَيُخَوِّفُونَكَ بِالَّذِينَ مِن دُونِهِ ۚ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ
क्या ख़ुदा अपने बन्दों (की मदद) के लिए काफ़ी नहीं है (ज़रूर है) और (ऐ रसूल) तुमको लोग ख़ुदा के सिवा (दूसरे माबूदों) से डराते हैं और ख़ुदा जिसे गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई राह पर लाने वाला नहीं है
37وَمَن يَهْدِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِن مُّضِلٍّ ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِعَزِيزٍ ذِي انتِقَامٍ
और जिस शख्स की हिदायत करे तो उसका कोई गुमराह करने वाला नहीं। क्या ख़दा ज़बरदस्त और बदला लेने वाला नहीं है (ज़रूर है)
38وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۚ قُلْ أَفَرَأَيْتُم مَّا تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ إِنْ أَرَادَنِيَ اللَّهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كَاشِفَاتُ ضُرِّهِ أَوْ أَرَادَنِي بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكَاتُ رَحْمَتِهِ ۚ قُلْ حَسْبِيَ اللَّهُ ۖ عَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُونَ
और (ऐ रसूल) अगर तुम इनसे पूछो कि सारे आसमान व ज़मीन को किसने पैदा किया तो ये लोग यक़ीनन कहेंगे कि ख़ुदा ने, तुम कह दो कि तो क्या तुमने ग़ौर किया है कि ख़ुदा को छोड़ कर जिन लोगों की तुम इबादत करते हो अगर ख़ुदा मुझे कोई तक़लीफ पहुँचाना चाहे तो क्या वह लोग उसके नुक़सान को (मुझसे) रोक सकते हैं या अगर ख़ुदा मुझ पर मेहरबानी करना चाहे तो क्या वह लोग उसकी मेहरबानी रोक सकते हैं (ऐ रसूल) तुम कहो कि ख़ुदा मेरे लिए काफ़ी है उसी पर भरोसा करने वाले भरोसा करते हैं
39قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) अमल किए जाओ मै
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
37आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 37

सूरा अज़-ज़ुमर आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस शख्स की हिदायत करे तो उसका कोई गुमराह…

सूरा आयत 37/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए