Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خطيئة (खती'अह): अनजाने में होने वाला छोटा गुनाह या भूल।
- إثم (इस्म): जानबूझकर किया गया बड़ा पाप।
- يرمي (यरमी): आरोप लगाना, थोपना।
- بريئًا (बरी'अन): निर्दोष, बेकसूर व्यक्ति।
- بهتان (बुहतान): झूठा आरोप, ऐसा कलंक जिससे सुनने वाला भी हैरान रह जाए।
- مبين (मुबीन): स्पष्ट, खुला हुआ।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो गुनाह करते हैं और फिर उसका ठीकरा किसी मासूम के सिर फोड़ देते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि जो कोई भी कोई भूल या छोटी सी गलती कर बैठे, या जानबूझकर कोई बड़ा पाप करे, और फिर उस पाप का आरोप किसी बेगुनाह, पाक-साफ इंसान पर लगा दे, तो उसने अपने ऊपर दोहरा बोझ लाद लिया। पहला, वह मूल गुनाह जो उसने किया था, और दूसरा, वह झूठा आरोप और बदनामी जो उसने किसी निर्दोष पर लगाई। यह काम इतना घिनौना है कि इसे "बुहतान" कहा गया — यानी ऐसा जघन्य झूठ जिसे सुनकर इंसान दंग रह जाए। इस तरह वह व्यक्ति स्पष्ट और खुले गुनाह का भारी बोझ उठाता है, जिसकी सज़ा अल्लाह के यहाँ बहुत सख्त है। यहाँ यह भी संकेत है कि जो व्यक्ति दूसरों पर झूठा दोष मढ़ता है, वह अपने असली गुनाह से बच नहीं पाता, बल्कि उसका गुनाह और भी बढ़ जाता है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी गलतियों की ज़िम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। दूसरों पर दोष मढ़ना कायरता है और अल्लाह की नज़र में बहुत बड़ा पाप है।
- इस्लाम में किसी निर्दोष की इज़्ज़त और आबरू की हिफाज़त का बहुत बड़ा महत्व है। किसी को बदनाम करना, उस पर झूठा आरोप लगाना उसकी जान लेने से भी बदतर समझा गया है।
- यह आयत हमें सच्चाई और ईमानदारी की तरफ बुलाती है। एक सच्चा मुसलमान वही है जो अपनी गलती मान ले और दूसरों को तकलीफ न दे।
- अल्लाह का इंसाफ़ बहुत सख्त है — वह हर ज़ालिम को पकड़ेगा, चाहे वह कितनी भी चालाकी से अपने गुनाह को छिपाने की कोशिश करे। यह बात हमें अल्लाह के डर और उसकी निगरानी का एहसास दिलाती है।
- यह आयत समाज में भरोसे और सद्भावना को बढ़ावा देती है। जब लोग एक-दूसरे पर झूठे आरोप नहीं लगाएँगे, तो समाज में शांति और भाईचारा कायम रहेगा।
📜 आयत 110-114 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 112
सूरा अन-निसा आयत 112 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स कोई ख़ता या गुनाह करे फिर उसे…सूरा आयत 112/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 110–114. हिंदी अर्थ: اردو.
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Monday, September 28, 2026
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