अन-निसा · 113/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكَ وَرَحْمَتُهُ لَهَمَّت طَّائِفَةٌ مِّنْهُمْ أَن يُضِلُّوكَ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ ۖ وَمَا يَضُرُّونَكَ مِن شَيْءٍ ۚ وَأَنزَلَ اللَّهُ عَلَيْكَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَكَ مَا لَمْ تَكُن تَعْلَمُ ۚ وَكَانَ فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكَ عَظِيمًا ۝١١٣
Wa law laa fadlul laahi `alaika wa rahmatuhoo lahammat taaa`ifatum minhum ai yudillooka wa maa yudilloona illaaa anfusahum wa maa yadurroonaka min shai`; wa anzalal laahu `alaikal Kitaaba wal Hikmata wa `allamaka maa lam takun ta`lam; wa kaana fadlul laahi `alaika `azeemaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो उन (बदमाशों) में से एक गिरोह तुमको गुमराह करने का ज़रूर क़सद करता हालॉकि वह लोग बस अपने आप को गुमराह कर रहे हैं और यह लोग तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुंचा सकते और ख़ुदा ही ने तो (मेहरबानी की कि) तुमपर अपनी किताब और हिकमत नाज़िल की और जो बातें तुम नहीं जानते थे तुम्हें सिखा दी और तुम पर तो ख़ुदा का बड़ा फ़ज़ल है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَهَمَّتْ – उसने इरादा किया, दृढ़ संकल्प किया।
  • طَائِفَةٌ – एक समूह, एक गिरोह।
  • يُضِلُّوكَ – तुम्हें गुमराह करें, सत्य से भटका दें।
  • الْحِكْمَةَ – सुन्नत (पैगंबर की शिक्षाएँ और मार्गदर्शन)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अगर अल्लाह का आप पर विशेष अनुग्रह और दया न होती, तो उनमें से एक समूह (जो स्वयं अपने नुक़सान में था) ने आपको सत्य से भटकाने का इरादा कर ही लिया था, ताकि आप उनके पक्ष में फ़ैसला कर दें। लेकिन अल्लाह ने अपनी कृपा से आपकी रक्षा की। ये लोग वास्तव में अपने इस प्रयास से खुद को ही नुक़सान पहुँचा रहे थे, क्योंकि उनके इस बुरे इरादे का वबाल उन्हीं पर पड़ता है। वे आपको ज़रा भी हानि नहीं पहुँचा सकते, क्योंकि अल्लाह ने आपको अपनी सुरक्षा में रखा है। अल्लाह ने आप पर क़ुरआन और सुन्नत (हिक्मत) उतारी, और आपको वह ज्ञान सिखाया जो आप पहले नहीं जानते थे। आप पर अल्लाह का अनुग्रह वास्तव में महान है, क्योंकि उसने आपको नबुव्वत और सुरक्षा जैसी बड़ी नेमतें प्रदान कीं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की कृपा और दया ही सबसे बड़ी ढाल है जो इंसान को गुमराही और बुराई से बचाती है।
  2. जो लोग दूसरों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, वे वास्तव में अपना ही नुक़सान करते हैं; उनका बुरा इरादा उन्हीं पर लौटता है।
  3. अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है, और दुश्मनों की साज़िशें उन्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकतीं।
  4. क़ुरआन और सुन्नत सबसे बड़ा ज्ञान हैं; इनके माध्यम से अल्लाह इंसान को वह रास्ते दिखाता है जो अक़्ल और तजुर्बे से नहीं मिल सकते।
  5. नबुव्वत और हिदायत अल्लाह का सबसे बड़ा अनुग्रह है, जो किसी और के पास नहीं हो सकता।


📜 आयत 111-115 — अन-निसा

111وَمَن يَكْسِبْ إِثْمًا فَإِنَّمَا يَكْسِبُهُ عَلَىٰ نَفْسِهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
और जो शख्स कोई गुनाह करता है तो उससे कुछ अपना ही नुक़सान करता है और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ (और) बड़ी तदबीर वाला है
112وَمَن يَكْسِبْ خَطِيئَةً أَوْ إِثْمًا ثُمَّ يَرْمِ بِهِ بَرِيئًا فَقَدِ احْتَمَلَ بُهْتَانًا وَإِثْمًا مُّبِينًا
और जो शख्स कोई ख़ता या गुनाह करे फिर उसे किसी बेक़सूर के सर थोपे तो उसने एक बड़े (इफ़तेरा) और सरीही गुनाह को अपने ऊपर लाद लिया
113وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكَ وَرَحْمَتُهُ لَهَمَّت طَّائِفَةٌ مِّنْهُمْ أَن يُضِلُّوكَ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ ۖ وَمَا يَضُرُّونَكَ مِن شَيْءٍ ۚ وَأَنزَلَ اللَّهُ عَلَيْكَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَكَ مَا لَمْ تَكُن تَعْلَمُ ۚ وَكَانَ فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكَ عَظِيمًا
और (ऐ रसूल) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो उन (बदमाशों) में से एक गिरोह तुमको गुमराह करने का ज़रूर क़सद करता हालॉकि वह लोग बस अपने आप को गुमराह कर रहे हैं और यह लोग तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुंचा सकते और ख़ुदा ही ने तो (मेहरबानी की कि) तुमपर अपनी किताब और हिकमत नाज़िल की और जो बातें तुम नहीं जानते थे तुम्हें सिखा दी और तुम पर तो ख़ुदा का बड़ा फ़ज़ल है
114۞ لَّا خَيْرَ فِي كَثِيرٍ مِّن نَّجْوَاهُمْ إِلَّا مَنْ أَمَرَ بِصَدَقَةٍ أَوْ مَعْرُوفٍ أَوْ إِصْلَاحٍ بَيْنَ النَّاسِ ۚ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ ابْتِغَاءَ مَرْضَاتِ اللَّهِ فَسَوْفَ نُؤْتِيهِ أَجْرًا عَظِيمًا
(ऐ रसूल) उनके राज़ की बातों में अक्सर में भलाई (का तो नाम तक) नहीं मगर (हॉ) जो शख्स किसी को सदक़ा देने या अच्छे काम करे या लोगों के दरमियान मेल मिलाप कराने का हुक्म दे (तो अलबत्ता एक बात है) और जो शख्स (महज़) ख़ुदा की ख़ुशनूदी की ख्वाहिश में ऐसे काम करेगा तो हम अनक़रीब ही उसे बड़ा अच्छा बदला अता फरमाएंगे
115وَمَن يُشَاقِقِ الرَّسُولَ مِن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُ الْهُدَىٰ وَيَتَّبِعْ غَيْرَ سَبِيلِ الْمُؤْمِنِينَ نُوَلِّهِ مَا تَوَلَّىٰ وَنُصْلِهِ جَهَنَّمَ ۖ وَسَاءَتْ مَصِيرًا
और जो शख्स राहे रास्त के ज़ाहिर होने के बाद रसूल से सरकशी करे और मोमिनीन के तरीक़े के सिवा किसी और राह पर चले तो जिधर वह फिर गया है हम भी उधर ही फेर देंगे और (आख़िर) उसे जहन्नुम में झोंक देंगे और वह तो बहुत ही बुरा ठिकाना
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अनुवाद — अन-निसा 113

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Tuesday, August 18, 2026

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