अन-निसा · 111/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَمَن يَكْسِبْ إِثْمًا فَإِنَّمَا يَكْسِبُهُ عَلَىٰ نَفْسِهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا ۝١١١
Wa mai yaksib isman fa innamaa yaksibuhoo `alaa nafsih; wa kaanal laahu `Aleeman hakeemaa
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स कोई गुनाह करता है तो उससे कुछ अपना ही नुक़सान करता है और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ (और) बड़ी तदबीर वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَكْسِبْ إِثْمًا: जानबूझकर पाप कमाना, गुनाह करना।
  • عَلَىٰ نَفْسِهِ: उसके अपने ही ऊपर (उसका नुक़सान उसी को होगा)।
  • عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला (उसके कर्मों से पूर्ण अवगत)।
  • حَكِيمًا: बड़ी हिकमत (समझदारी) वाला, जो हर काम उचित और सही ढंग से करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

जो कोई भी जानबूझकर पाप या गुनाह करता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, उसका बुरा परिणाम उसी के ऊपर पड़ता है। उसका नुक़सान किसी और को नहीं, बल्कि केवल उसी को होता है। यह पाप उसके अलावा किसी और के ज़िम्मे नहीं लगाया जाएगा, और न ही इसका दुष्प्रभाव किसी दूसरे व्यक्ति तक फैलेगा। अल्लाह तआला अपने बंदों के हर काम को पूरी तरह जानता है — चाहे वह छिपा हो या खुला। वह अपनी हिकमत के अनुसार हर व्यक्ति के साथ वैसा ही व्यवहार करता है जैसा उसका कर्म उचित ठहराता है। उसका फैसला पूर्ण न्याय और बुद्धिमत्ता पर आधारित होता है, और उसके ज्ञान से कोई भी बात छिपी नहीं है।

फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में हर व्यक्ति अपने कर्मों का स्वयं ज़िम्मेदार है। कोई किसी दूसरे का पाप नहीं उठाएगा, और न ही किसी के गुनाह का बोझ किसी और पर डाला जाएगा। यह न्याय का सबसे सुंदर सिद्धांत है।
  2. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह हर चीज़ से बाख़बर है — हमारे छिपे और खुले सभी कर्म उसकी नज़र में हैं। इस एहसास से इंसान में अल्लाह का खौफ़ और उसकी निगरानी का एहसास पैदा होता है, जो उसे गुनाहों से बचाता है।
  3. अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर भरोसा करना सिखाती है — वह जो भी फैसला करता है, उसमें भलाई और न्याय होता है। इससे मुसलमान का दिल अल्लाह के फैसलों पर संतुष्ट रहता है।
  4. यह आयत इंसान को यह भी समझाती है कि पाप करने से वह अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकता, बल्कि सिर्फ अपना ही नुक़सान करता है। यह एक प्यार भरा एहसास दिलाता है कि अल्लाह ने हमें गुनाहों से बचने की ताक़त दी है, ताकि हम अपनी ही भलाई कमा सकें।


📜 आयत 109-113 — अन-निसा

109هَا أَنتُمْ هَٰؤُلَاءِ جَادَلْتُمْ عَنْهُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا فَمَن يُجَادِلُ اللَّهَ عَنْهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَم مَّن يَكُونُ عَلَيْهِمْ وَكِيلًا
(मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खडे हो गए (मगर ये तो बताओ) फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर ख़ुदा से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा
110وَمَن يَعْمَلْ سُوءًا أَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهُ ثُمَّ يَسْتَغْفِرِ اللَّهَ يَجِدِ اللَّهَ غَفُورًا رَّحِيمًا
और जो शख्स कोई बुरा काम करे या (किसी तरह) अपने नफ्स पर ज़ुल्म करे उसके बाद ख़ुदा से अपनी मग़फ़िरत की दुआ मॉगे तो ख़ुदा को बड़ा बख्शने वाला मेहरबान पाएगा
111وَمَن يَكْسِبْ إِثْمًا فَإِنَّمَا يَكْسِبُهُ عَلَىٰ نَفْسِهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
और जो शख्स कोई गुनाह करता है तो उससे कुछ अपना ही नुक़सान करता है और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ (और) बड़ी तदबीर वाला है
112وَمَن يَكْسِبْ خَطِيئَةً أَوْ إِثْمًا ثُمَّ يَرْمِ بِهِ بَرِيئًا فَقَدِ احْتَمَلَ بُهْتَانًا وَإِثْمًا مُّبِينًا
और जो शख्स कोई ख़ता या गुनाह करे फिर उसे किसी बेक़सूर के सर थोपे तो उसने एक बड़े (इफ़तेरा) और सरीही गुनाह को अपने ऊपर लाद लिया
113وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكَ وَرَحْمَتُهُ لَهَمَّت طَّائِفَةٌ مِّنْهُمْ أَن يُضِلُّوكَ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ ۖ وَمَا يَضُرُّونَكَ مِن شَيْءٍ ۚ وَأَنزَلَ اللَّهُ عَلَيْكَ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَعَلَّمَكَ مَا لَمْ تَكُن تَعْلَمُ ۚ وَكَانَ فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكَ عَظِيمًا
और (ऐ रसूल) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो उन (बदमाशों) में से एक गिरोह तुमको गुमराह करने का ज़रूर क़सद करता हालॉकि वह लोग बस अपने आप को गुमराह कर रहे हैं और यह लोग तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुंचा सकते और ख़ुदा ही ने तो (मेहरबानी की कि) तुमपर अपनी किताब और हिकमत नाज़िल की और जो बातें तुम नहीं जानते थे तुम्हें सिखा दी और तुम पर तो ख़ुदा का बड़ा फ़ज़ल है
अन-निसाकुरान सूची
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मदनीRevelation
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अनुवाद — अन-निसा 111

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Tuesday, August 18, 2026

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