Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَكْسِبْ إِثْمًا: जानबूझकर पाप कमाना, गुनाह करना।
- عَلَىٰ نَفْسِهِ: उसके अपने ही ऊपर (उसका नुक़सान उसी को होगा)।
- عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला (उसके कर्मों से पूर्ण अवगत)।
- حَكِيمًا: बड़ी हिकमत (समझदारी) वाला, जो हर काम उचित और सही ढंग से करता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
जो कोई भी जानबूझकर पाप या गुनाह करता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, उसका बुरा परिणाम उसी के ऊपर पड़ता है। उसका नुक़सान किसी और को नहीं, बल्कि केवल उसी को होता है। यह पाप उसके अलावा किसी और के ज़िम्मे नहीं लगाया जाएगा, और न ही इसका दुष्प्रभाव किसी दूसरे व्यक्ति तक फैलेगा। अल्लाह तआला अपने बंदों के हर काम को पूरी तरह जानता है — चाहे वह छिपा हो या खुला। वह अपनी हिकमत के अनुसार हर व्यक्ति के साथ वैसा ही व्यवहार करता है जैसा उसका कर्म उचित ठहराता है। उसका फैसला पूर्ण न्याय और बुद्धिमत्ता पर आधारित होता है, और उसके ज्ञान से कोई भी बात छिपी नहीं है।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में हर व्यक्ति अपने कर्मों का स्वयं ज़िम्मेदार है। कोई किसी दूसरे का पाप नहीं उठाएगा, और न ही किसी के गुनाह का बोझ किसी और पर डाला जाएगा। यह न्याय का सबसे सुंदर सिद्धांत है।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह हर चीज़ से बाख़बर है — हमारे छिपे और खुले सभी कर्म उसकी नज़र में हैं। इस एहसास से इंसान में अल्लाह का खौफ़ और उसकी निगरानी का एहसास पैदा होता है, जो उसे गुनाहों से बचाता है।
- अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर भरोसा करना सिखाती है — वह जो भी फैसला करता है, उसमें भलाई और न्याय होता है। इससे मुसलमान का दिल अल्लाह के फैसलों पर संतुष्ट रहता है।
- यह आयत इंसान को यह भी समझाती है कि पाप करने से वह अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकता, बल्कि सिर्फ अपना ही नुक़सान करता है। यह एक प्यार भरा एहसास दिलाता है कि अल्लाह ने हमें गुनाहों से बचने की ताक़त दी है, ताकि हम अपनी ही भलाई कमा सकें।
📜 आयत 109-113 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 111
सूरा अन-निसा आयत 111 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स कोई गुनाह करता है तो उससे कुछ…सूरा आयत 111/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 109–113. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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