عَلَىٰ نَفْسِهِ: उसके अपने ही ऊपर (उसका नुक़सान उसी को होगा)।
عَلِيمًا: सब कुछ जानने वाला (उसके कर्मों से पूर्ण अवगत)।
حَكِيمًا: बड़ी हिकमत (समझदारी) वाला, जो हर काम उचित और सही ढंग से करता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
जो कोई भी जानबूझकर पाप या गुनाह करता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, उसका बुरा परिणाम उसी के ऊपर पड़ता है। उसका नुक़सान किसी और को नहीं, बल्कि केवल उसी को होता है। यह पाप उसके अलावा किसी और के ज़िम्मे नहीं लगाया जाएगा, और न ही इसका दुष्प्रभाव किसी दूसरे व्यक्ति तक फैलेगा। अल्लाह तआला अपने बंदों के हर काम को पूरी तरह जानता है — चाहे वह छिपा हो या खुला। वह अपनी हिकमत के अनुसार हर व्यक्ति के साथ वैसा ही व्यवहार करता है जैसा उसका कर्म उचित ठहराता है। उसका फैसला पूर्ण न्याय और बुद्धिमत्ता पर आधारित होता है, और उसके ज्ञान से कोई भी बात छिपी नहीं है।
फ़ायदे (सीख):
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम में हर व्यक्ति अपने कर्मों का स्वयं ज़िम्मेदार है। कोई किसी दूसरे का पाप नहीं उठाएगा, और न ही किसी के गुनाह का बोझ किसी और पर डाला जाएगा। यह न्याय का सबसे सुंदर सिद्धांत है।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह हर चीज़ से बाख़बर है — हमारे छिपे और खुले सभी कर्म उसकी नज़र में हैं। इस एहसास से इंसान में अल्लाह का खौफ़ और उसकी निगरानी का एहसास पैदा होता है, जो उसे गुनाहों से बचाता है।
अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर भरोसा करना सिखाती है — वह जो भी फैसला करता है, उसमें भलाई और न्याय होता है। इससे मुसलमान का दिल अल्लाह के फैसलों पर संतुष्ट रहता है।
यह आयत इंसान को यह भी समझाती है कि पाप करने से वह अल्लाह को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकता, बल्कि सिर्फ अपना ही नुक़सान करता है। यह एक प्यार भरा एहसास दिलाता है कि अल्लाह ने हमें गुनाहों से बचने की ताक़त दी है, ताकि हम अपनी ही भलाई कमा सकें।
(मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खडे हो गए (मगर ये तो बताओ) फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर ख़ुदा से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा
और (ऐ रसूल) अगर तुमपर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी मेहरबानी न होती तो उन (बदमाशों) में से एक गिरोह तुमको गुमराह करने का ज़रूर क़सद करता हालॉकि वह लोग बस अपने आप को गुमराह कर रहे हैं और यह लोग तुम्हें कुछ भी ज़रर नहीं पहुंचा सकते और ख़ुदा ही ने तो (मेहरबानी की कि) तुमपर अपनी किताब और हिकमत नाज़िल की और जो बातें तुम नहीं जानते थे तुम्हें सिखा दी और तुम पर तो ख़ुदा का बड़ा फ़ज़ल है
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