अन-निसा · 16/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَاللَّذَانِ يَأْتِيَانِهَا مِنكُمْ فَآذُوهُمَا ۖ فَإِن تَابَا وَأَصْلَحَا فَأَعْرِضُوا عَنْهُمَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ تَوَّابًا رَّحِيمًا ۝١٦
Wallazaani yaatiyaanihaa minkum fa aazoohumaa fa in taabaa wa aslahaa fa a`ridoo `anhumaaa; innal laaha kaana Tawwaabar Raheema
📖 हिंदी अर्थ
और तुम लोगों में से जिनसे बदकारी सरज़द हुई हो उनको मारो पीटो फिर अगर वह दोनों (अपनी हरकत से) तौबा करें और इस्लाह कर लें तो उनको छोड़ दो बेशक ख़ुदा बड़ा तौबा कुबूल करने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اللَّذَانِ: वे दो (स्त्री-पुरुष) जो यह कार्य करें।
  • يَأْتِيَانِهَا: उस अश्लील कार्य (व्यभिचार) को करें।
  • فَآذُوهُمَا: उन दोनों को दण्ड दो (ताड़ना, फटकार, अपमान आदि से)।
  • تَابَا: तौबा कर लें (अपने किए पर पश्चाताप करें)।
  • أَصْلَحَا: अपने आचरण को सुधार लें।
  • فَأَعْرِضُوا عَنْهُمَا: उन्हें छोड़ दो (उन्हें तंग न करो)।
  • تَوَّابًا: बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला।
  • رَّحِيمًا: बहुत दयालु।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन दो लोगों (स्त्री-पुरुष) के बारे में है जो व्यभिचार (ज़िना) जैसे अश्लील कार्य में लिप्त हों। उन्हें दण्ड दिया जाए — जैसे मारना, डाँटना-फटकारना, अपमानित करना, और उनसे किनारा करना — ताकि वे इस बुराई से बाज़ आएँ। यह दण्ड उन्हें शर्मिंदा करने और रोकने के लिए था।

लेकिन यदि वे दोनों अपने इस गुनाह से तौबा कर लें और अपने आचरण को सुधार लें, तो उन्हें छोड़ दिया जाए और उन्हें तंग न किया जाए। क्योंकि जो व्यक्ति सच्चे दिल से तौबा कर लेता है, वह ऐसा हो जाता है जैसे उसने कभी गुनाह किया ही न हो। अल्लाह तआला अपने बंदों की तौबा क़बूल करने वाला और उन पर दया करने वाला है।

यह आयत इस्लाम के शुरुआती दौर में उतरी थी, जब व्यभिचार की सज़ा के बारे में पूरा क़ानून नाज़िल नहीं हुआ था। बाद में यह हुक्म मंसूख़ (रद्द) हो गया और अल्लाह ने स्पष्ट सज़ा निर्धारित कर दी — कुंवारे (जिन्होंने विवाह नहीं किया) के लिए सौ कोड़े और एक साल के लिए देश से निष्कासन, और विवाहित (शादीशुदा) के लिए रज्म (पत्थर मारकर मौत की सज़ा)।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है: चाहे गुनाह कितना भी बड़ा हो, अल्लाह तआला अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है। यह अल्लाह की रहमत की सबसे बड़ी निशानी है।
  2. इस्लाम में सज़ा का उद्देश्य सुधार है: सज़ा सिर्फ़ बदला लेने के लिए नहीं, बल्कि इंसान को बुराई से रोकने और उसे सुधारने के लिए दी जाती है। जब इंसान सुधर जाए, तो उसे छोड़ देना चाहिए।
  3. समाज में पवित्रता का महत्व: इस्लाम समाज को पाक और पवित्र रखने पर बहुत ज़ोर देता है। व्यभिचार जैसी बुराइयाँ समाज को तबाह कर देती हैं, इसलिए उन्हें रोकना ज़रूरी है।
  4. अल्लाह की रहमत से निराश न होना: यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी खुशख़बरी है जो गुनाह कर बैठते हैं और फिर पछताते हैं। अल्लाह उन्हें माफ़ करने के लिए तैयार है।
  5. इस्लामी क़ानून की हिकमत: इस्लाम में सज़ाएँ इसलिए निर्धारित की गई हैं ताकि समाज में अमन और सुकून बना रहे। ये सज़ाएँ इंसान की इज़्ज़त और समाज की सलामती के लिए हैं।


📜 आयत 14-18 — अन-निसा

14وَمَن يَعْصِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيَتَعَدَّ حُدُودَهُ يُدْخِلْهُ نَارًا خَالِدًا فِيهَا وَلَهُ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जिस शख्स से ख़ुदा व रसूल की नाफ़रमानी की और उसकी हदों से गुज़र गया तो बस ख़ुदा उसको जहन्नुम में दाख़िल करेगा
15وَاللَّاتِي يَأْتِينَ الْفَاحِشَةَ مِن نِّسَائِكُمْ فَاسْتَشْهِدُوا عَلَيْهِنَّ أَرْبَعَةً مِّنكُمْ ۖ فَإِن شَهِدُوا فَأَمْسِكُوهُنَّ فِي الْبُيُوتِ حَتَّىٰ يَتَوَفَّاهُنَّ الْمَوْتُ أَوْ يَجْعَلَ اللَّهُ لَهُنَّ سَبِيلًا
और वह उसमें हमेशा अपना किया भुगतता रहेगा और उसके लिए बड़ी रूसवाई का अज़ाब है और तुम्हारी औरतों में से जो औरतें बदकारी करें तो उनकी बदकारी पर अपने लोगों में से चार गवाही लो और फिर अगर चारों गवाह उसकी तसदीक़ करें तो (उसकी सज़ा ये है कि) उनको घरों में बन्द रखो यहॉ तक कि मौत आ जाए या ख़ुदा उनकी कोई (दूसरी) राह निकाले
16وَاللَّذَانِ يَأْتِيَانِهَا مِنكُمْ فَآذُوهُمَا ۖ فَإِن تَابَا وَأَصْلَحَا فَأَعْرِضُوا عَنْهُمَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ تَوَّابًا رَّحِيمًا
और तुम लोगों में से जिनसे बदकारी सरज़द हुई हो उनको मारो पीटो फिर अगर वह दोनों (अपनी हरकत से) तौबा करें और इस्लाह कर लें तो उनको छोड़ दो बेशक ख़ुदा बड़ा तौबा कुबूल करने वाला मेहरबान है
17إِنَّمَا التَّوْبَةُ عَلَى اللَّهِ لِلَّذِينَ يَعْمَلُونَ السُّوءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ يَتُوبُونَ مِن قَرِيبٍ فَأُولَٰئِكَ يَتُوبُ اللَّهُ عَلَيْهِمْ ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
मगर ख़ुदा की बारगाह में तौबा तो सिर्फ उन्हीं लोगों की (ठीक) है जो नादानिस्ता बुरी हरकत कर बैठे (और) फिर जल्दी से तौबा कर ले तो ख़ुदा भी ऐसे लोगों की तौबा क़ुबूल कर लेता है और ख़ुदा तो बड़ा जानने वाला हकीम है
18وَلَيْسَتِ التَّوْبَةُ لِلَّذِينَ يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ حَتَّىٰ إِذَا حَضَرَ أَحَدَهُمُ الْمَوْتُ قَالَ إِنِّي تُبْتُ الْآنَ وَلَا الَّذِينَ يَمُوتُونَ وَهُمْ كُفَّارٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَعْتَدْنَا لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
और तौबा उन लोगों के लिये (मुफ़ीद) नहीं है जो (उम्र भर) तो बुरे काम करते रहे यहॉ तक कि जब उनमें से किसी के सर पर मौत आ खड़ी हुई तो कहने लगे अब मैंने तौबा की और (इसी तरह) उन लोगों के लिए (भी तौबा) मुफ़ीद नहीं है जो कुफ़्र ही की हालत में मर गये ऐसे ही लोगों के वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
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Tuesday, August 18, 2026

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