अन-निसा · 161/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَأَخْذِهِمُ الرِّبَا وَقَدْ نُهُوا عَنْهُ وَأَكْلِهِمْ أَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِ ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ مِنْهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا ۝١٦١
Wa akhzihimur ribaa wa qad nuhoo `anhu wa aklihim amwaalan naasi bilbaatil; wa a`tadnaa lilkaafireena minhum `azaaban aleema
📖 हिंदी अर्थ
और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों के माल खाने की वजह से उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रिबा (الرِّبَا): सूद, ब्याज। यानी कर्ज़ पर अतिरिक्त राशि वसूलना।
  • अक्ल (أَكْل): खाना, लेकिन यहाँ इसका अर्थ है—हड़पना, अपने कब्ज़े में करना।
  • बातिल (الْبَاطِل): असत्य, गलत तरीका, बिना किसी शरई हक़ के।
  • अ'तदना (أَعْتَدْنَا): हमने तैयार कर रखा है।
  • अलीम (أَلِيم): दर्दनाक, बहुत तकलीफ़ देने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने बनी इसराईल (यहूदियों) के उन गुनाहों का ज़िक्र किया है जिनकी वजह से उन पर कई पाक चीज़ें हराम की गईं और उन्हें सज़ा दी गई। उन गुनाहों में से एक बड़ा गुनाह यह था कि वे सूद (रिबा) खाते थे, हालाँकि उन्हें तौरात में साफ़ तौर पर इससे मना किया गया था। उन्होंने अल्लाह के हुक्म को नज़रअंदाज़ करके सूद को अपने लिए जायज़ ठहरा लिया और उस पर अमल करते रहे।

दूसरा बड़ा गुनाह यह था कि वे लोगों के माल नाहक़ हड़पते थे। यानी वे धोखे, जालसाज़ी, रिश्वत, झूठी गवाही और दूसरे गलत तरीकों से लोगों की कमाई और जायदाद को हड़प लेते थे। वे फ़ैसलों में रिश्वत लेते थे और आम लोगों का माल बिना किसी हक़ के खा जाते थे।

इन्हीं गुनाहों की वजह से अल्लाह ने उन पर सज़ा का ऐलान किया और फ़रमाया कि हमने ऐसे काफ़िरों के लिए, जो इन गुनाहों पर अड़े रहे और तौबा नहीं की, बहुत दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है। यह अज़ाब आख़िरत में उन्हें दिया जाएगा। हालाँकि जिन लोगों ने तौबा कर ली और ईमान ले आए, उनके लिए यह सज़ा नहीं है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. सूद (ब्याज) एक गंभीर गुनाह है जिसे अल्लाह ने हराम किया है। यह सिर्फ़ आर्थिक नुक़सान नहीं, बल्कि आख़िरत में सख़्त सज़ा का कारण है। इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह सूद से बचे और हलाल कमाई पर क़नाअत करे।
  2. दूसरों का माल नाहक़ खाना किसी भी सूरत में जायज़ नहीं है। चाहे वह धोखे से हो, रिश्वत से, या किसी और गलत तरीक़े से। अल्लाह के यहाँ इसकी सख़्त पकड़ है।
  3. अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम बुरा होता है। जब कोई क़ौम अल्लाह के हुक्मों को तोड़ती है और गुनाहों पर अड़ी रहती है, तो अल्लाह उनसे अपनी नेमतें छीन लेता है और सज़ा का हक़दार बनाता है।
  4. तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है। यह आयत बताती है कि सज़ा उन लोगों के लिए है जो कुफ़्र और गुनाह पर ज़िद करें। लेकिन जो लोग तौबा कर लें, ईमान ले आएं और अच्छे काम करें, उनके लिए अल्लाह की रहमत और माफ़ी है। इसलिए कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।
  5. इस्लाम एक पाक और साफ़ दीन है जो न सिर्फ़ इबादत की पाकीज़गी सिखाता है, बल्कि माल और कमाई की पाकीज़गी पर भी ज़ोर देता है। हलाल कमाई और साफ़ लेन-देन ही इंसान को अल्लाह के करीब लाता है।


📜 आयत 159-163 — अन-निसा

159وَإِن مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلَّا لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا
और (जब ईसा मेहदी मौऊद के ज़हूर के वक्त आसमान से उतरेंगे तो) अहले किताब में से कोई शख्स ऐसा न होगा जो उनपर उनके मरने के क़ब्ल ईमान न लाए और ख़ुद ईसा क़यामत के दिन उनके ख़िलाफ़ गवाही देंगे
160فَبِظُلْمٍ مِّنَ الَّذِينَ هَادُوا حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ طَيِّبَاتٍ أُحِلَّتْ لَهُمْ وَبِصَدِّهِمْ عَن سَبِيلِ اللَّهِ كَثِيرًا
ग़रज़ यहूदियों की (उन सब) शरारतों और गुनाह की वजह से हमने उनपर वह साफ़ सुथरी चीजें ज़ो उनके लिए हलाल की गयी थीं हराम कर दी और उनके ख़ुदा की राह से बहुत से लोगों को रोकने कि वजह से भी
161وَأَخْذِهِمُ الرِّبَا وَقَدْ نُهُوا عَنْهُ وَأَكْلِهِمْ أَمْوَالَ النَّاسِ بِالْبَاطِلِ ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ مِنْهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों के माल खाने की वजह से उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है
162لَّٰكِنِ الرَّاسِخُونَ فِي الْعِلْمِ مِنْهُمْ وَالْمُؤْمِنُونَ يُؤْمِنُونَ بِمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَا أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ ۚ وَالْمُقِيمِينَ الصَّلَاةَ ۚ وَالْمُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَالْمُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ أُولَٰئِكَ سَنُؤْتِيهِمْ أَجْرًا عَظِيمًا
लेकिन (ऐ रसूल) उनमें से जो लोग इल्म (दीन) में बड़े मज़बूत पाए पर फ़ायज़ हैं वह और ईमान वाले तो जो (किताब) तुमपर नाज़िल हुई है (सब पर ईमान रखते हैं) और से नमाज़ पढ़ते हैं और ज़कात अदा करते हैं और ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं ऐसे ही लोगों को हम अनक़रीब बहुत बड़ा अज्र अता फ़रमाएंगे
163۞ إِنَّا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ كَمَا أَوْحَيْنَا إِلَىٰ نُوحٍ وَالنَّبِيِّينَ مِن بَعْدِهِ ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَإِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ وَالْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَارُونَ وَسُلَيْمَانَ ۚ وَآتَيْنَا دَاوُودَ زَبُورًا
(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (भी) तो इसी तरह 'वही' भेजी जिस तरह नूह और उसके बाद वाले पैग़म्बरों पर भेजी थी और जिस तरह इबराहीम और इस्माइल और इसहाक़ और याक़ूब और औलादे याक़ूब व ईसा व अय्यूब व युनुस व हारून व सुलेमान के पास 'वही' भेजी थी और हमने दाऊद को ज़ुबूर अता की
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीRevelation
161आयत

अनुवाद — अन-निसा 161

सूरा अन-निसा आयत 161 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों…

सूरा आयत 161/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 159–163. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए