Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- रिबा (الرِّبَا): सूद, ब्याज। यानी कर्ज़ पर अतिरिक्त राशि वसूलना।
- अक्ल (أَكْل): खाना, लेकिन यहाँ इसका अर्थ है—हड़पना, अपने कब्ज़े में करना।
- बातिल (الْبَاطِل): असत्य, गलत तरीका, बिना किसी शरई हक़ के।
- अ'तदना (أَعْتَدْنَا): हमने तैयार कर रखा है।
- अलीम (أَلِيم): दर्दनाक, बहुत तकलीफ़ देने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने बनी इसराईल (यहूदियों) के उन गुनाहों का ज़िक्र किया है जिनकी वजह से उन पर कई पाक चीज़ें हराम की गईं और उन्हें सज़ा दी गई। उन गुनाहों में से एक बड़ा गुनाह यह था कि वे सूद (रिबा) खाते थे, हालाँकि उन्हें तौरात में साफ़ तौर पर इससे मना किया गया था। उन्होंने अल्लाह के हुक्म को नज़रअंदाज़ करके सूद को अपने लिए जायज़ ठहरा लिया और उस पर अमल करते रहे।
दूसरा बड़ा गुनाह यह था कि वे लोगों के माल नाहक़ हड़पते थे। यानी वे धोखे, जालसाज़ी, रिश्वत, झूठी गवाही और दूसरे गलत तरीकों से लोगों की कमाई और जायदाद को हड़प लेते थे। वे फ़ैसलों में रिश्वत लेते थे और आम लोगों का माल बिना किसी हक़ के खा जाते थे।
इन्हीं गुनाहों की वजह से अल्लाह ने उन पर सज़ा का ऐलान किया और फ़रमाया कि हमने ऐसे काफ़िरों के लिए, जो इन गुनाहों पर अड़े रहे और तौबा नहीं की, बहुत दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है। यह अज़ाब आख़िरत में उन्हें दिया जाएगा। हालाँकि जिन लोगों ने तौबा कर ली और ईमान ले आए, उनके लिए यह सज़ा नहीं है।
फ़ायदे (सबक़):
- सूद (ब्याज) एक गंभीर गुनाह है जिसे अल्लाह ने हराम किया है। यह सिर्फ़ आर्थिक नुक़सान नहीं, बल्कि आख़िरत में सख़्त सज़ा का कारण है। इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह सूद से बचे और हलाल कमाई पर क़नाअत करे।
- दूसरों का माल नाहक़ खाना किसी भी सूरत में जायज़ नहीं है। चाहे वह धोखे से हो, रिश्वत से, या किसी और गलत तरीक़े से। अल्लाह के यहाँ इसकी सख़्त पकड़ है।
- अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम बुरा होता है। जब कोई क़ौम अल्लाह के हुक्मों को तोड़ती है और गुनाहों पर अड़ी रहती है, तो अल्लाह उनसे अपनी नेमतें छीन लेता है और सज़ा का हक़दार बनाता है।
- तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है। यह आयत बताती है कि सज़ा उन लोगों के लिए है जो कुफ़्र और गुनाह पर ज़िद करें। लेकिन जो लोग तौबा कर लें, ईमान ले आएं और अच्छे काम करें, उनके लिए अल्लाह की रहमत और माफ़ी है। इसलिए कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।
- इस्लाम एक पाक और साफ़ दीन है जो न सिर्फ़ इबादत की पाकीज़गी सिखाता है, बल्कि माल और कमाई की पाकीज़गी पर भी ज़ोर देता है। हलाल कमाई और साफ़ लेन-देन ही इंसान को अल्लाह के करीब लाता है।
📜 आयत 159-163 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 161
सूरा अन-निसा आयत 161 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों…सूरा आयत 161/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 159–163. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, September 30, 2026
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