अन-निसा · 168/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَظَلَمُوا لَمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَرِيقًا ۝١٦٨
Innal lazeenakafaroo wa zalamoo lam yakkunillaahu liyaghfira lahum wa laa liyahdiyahum tareeqaa
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और (उस पर) ज़ुल्म (भी) करते रहे न तो ख़ुदा उनको बख्शेगा ही और न ही उन्हें किसी तरीक़े की हिदायत करेगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाना, उसे नकारना।
  • وَظَلَمُوا: अपने ऊपर अत्याचार करना, यानी कुफ्र पर डटे रहना और सच्चाई को छिपाना।
  • لَمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ: अल्लाह का यह तरीका नहीं कि वह उन्हें माफ करे।
  • وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَرِيقًا: और न ही उन्हें किसी ऐसे रास्ते पर चलाए जो उन्हें नजात (मुक्ति) तक पहुँचाए।

तफसीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान नहीं लाया और अपने कुफ्र पर अड़े रहे। उन्होंने अपनी जानों पर जुल्म किया, क्योंकि उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे कबूल नहीं किया और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्ची निशानियों को छिपाया। अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे लोगों के लिए माफी का कोई रास्ता नहीं है, और न ही अल्लाह उन्हें कोई ऐसा रास्ता दिखाएगा जो उन्हें जहन्नुम के अज़ाब से बचा सके। उनके लिए हिदायत का दरवाजा बंद हो चुका है, क्योंकि उन्होंने खुद उसे ठुकरा दिया। यह उनके लिए अल्लाह की ओर से एक कड़ी चेतावनी है कि कुफ्र और जुल्म पर मरने वालों का अंजाम बुरा है।

फायदे और सबक:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और माफी उन लोगों के लिए है जो अपनी गलती का एहसास करके तौबा करें, लेकिन जो लोग जानबूझकर सच्चाई को नकारें और उसे छिपाएँ, उनके लिए माफी की कोई उम्मीद नहीं।
  2. हिदायत अल्लाह के हाथ में है, और वह उसे उन्हीं को देता है जो सच्चाई के लिए अपना दिल खोलते हैं। जो लोग हठ और अहंकार से सच्चाई को ठुकराते हैं, उनके दिल अल्लाह की तरफ से बंद कर दिए जाते हैं।
  3. इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने ईमान की हिफाजत करनी चाहिए और कभी भी सच्चाई को छिपाना नहीं चाहिए, क्योंकि सच्चाई छिपाना भी एक तरह का जुल्म है।
  4. यह हमें अल्लाह के दीन की सच्चाई को कबूल करने की तरफ बुलाती है, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनके लिए माफी और हिदायत का दरवाजा बंद कर दिया गया है।
🎧 सुनें

📜 आयत 166-170 — अन-निसा

166لَّٰكِنِ اللَّهُ يَشْهَدُ بِمَا أَنزَلَ إِلَيْكَ ۖ أَنزَلَهُ بِعِلْمِهِ ۖ وَالْمَلَائِكَةُ يَشْهَدُونَ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا
मगर ख़ुदा तो इस पर गवाही देता है जो कुछ तुम पर नाज़िल किया है ख़ूब समझ बूझ कर नाज़िल किया है (बल्कि) उसकी गवाही तो फ़रिश्ते तक देते हैं हालॉकि ख़ुदा गवाही के लिए काफ़ी है
167إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ قَدْ ضَلُّوا ضَلَالًا بَعِيدًا
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और ख़ुदा की राह से (लोगों) को रोका वह राहे रास्त से भटक के बहुत दूर जा पडे
168إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَظَلَمُوا لَمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَرِيقًا
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और (उस पर) ज़ुल्म (भी) करते रहे न तो ख़ुदा उनको बख्शेगा ही और न ही उन्हें किसी तरीक़े की हिदायत करेगा
169إِلَّا طَرِيقَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا
मगर (हॉ) जहन्नुम का रास्ता (दिखा देगा) जिसमें ये लोग हमेशा (पडे) रहेंगे और ये तो ख़ुदा के वास्ते बहुत ही आसान बात है
170يَا أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ جَاءَكُمُ الرَّسُولُ بِالْحَقِّ مِن رَّبِّكُمْ فَآمِنُوا خَيْرًا لَّكُمْ ۚ وَإِن تَكْفُرُوا فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا
ऐ लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से रसूल (मोहम्मद) दीने हक़ के साथ आ चुके हैं ईमान लाओ (यही) तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अगर इन्कार करोगे तो (समझ रखो कि) जो कुछ ज़मीन और आसमानों में है सब ख़ुदा ही का है और ख़ुदा बड़ा वाक़िफ़कार हकीम है
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अनुवाद — अन-निसा 168

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Tuesday, August 18, 2026

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