अन-निसा · 167/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ قَدْ ضَلُّوا ضَلَالًا بَعِيدًا ۝١٦٧
Innal lazeena kafaroo wa saddoo `an sabeelil laahi qad dalloo dalaalam ba`eedaa
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और ख़ुदा की राह से (लोगों) को रोका वह राहे रास्त से भटक के बहुत दूर जा पडे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَفَرُوا: अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाना, सत्य को जानते हुए भी उसे छिपाना और अस्वीकार करना।
  • وَصَدُّوا: रोका, बाधा डाली, लोगों को मार्ग से हटाया।
  • سَبِيلِ اللهِ: अल्लाह का मार्ग, अर्थात इस्लाम, ईमान और सत्य का रास्ता।
  • ضَلُّوا: भटक गए, सत्य से विचलित हो गए।
  • ضَلَالًا بَعِيدًا: अत्यंत दूर की गुमराही, सत्य से बहुत दूर जाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने दो बड़े अपराध किए: पहला, उन्होंने स्वयं अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर ईमान नहीं लाया और सत्य को अस्वीकार किया; दूसरा, उन्होंने दूसरे लोगों को भी अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) पर चलने से रोका और उन्हें सत्य से दूर रखने की कोशिश की। उन्होंने अल्लाह के मार्ग को बंद करने और लोगों को उससे विचलित करने का प्रयास किया। इस प्रकार उन्होंने दोहरी गुमराही अपनाई — एक स्वयं सत्य से भटकना, और दूसरा दूसरों को भटकाना। इसलिए अल्लाह ने उनके बारे में फरमाया कि वे सत्य से अत्यंत दूर जा चुके हैं, उनकी गुमराही बहुत गहरी और दूर तक फैली हुई है। यह उन लोगों के लिए एक कठोर चेतावनी है जो न केवल स्वयं सत्य से दूर रहते हैं बल्कि दूसरों को भी सत्य के मार्ग से रोकते हैं।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि केवल स्वयं सत्य पर होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूसरों को भी सत्य के मार्ग पर लाने का प्रयास करना चाहिए। जो लोग दूसरों को सत्य से रोकते हैं, वे अत्यंत घोर गुमराही में हैं।
  2. इससे यह भी पता चलता है कि सत्य को छिपाना और लोगों को धर्म से दूर करना बहुत बड़ा पाप है, और ऐसे लोग अल्लाह की दृष्टि में बहुत दूर भटके हुए हैं।
  3. यह आयत मुसलमानों को प्रेरित करती है कि वे स्वयं सत्य पर स्थिर रहें और दूसरों को भी सत्य का मार्ग दिखाएँ, क्योंकि यही सच्ची भलाई और सफलता का मार्ग है।
  4. हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह का मार्ग (इस्लाम) ही एकमात्र सत्य मार्ग है, और जो लोग इससे दूर होते हैं या दूसरों को इससे दूर करते हैं, वे वास्तव में असफल और घाटे में हैं।


📜 आयत 165-169 — अन-निसा

165رُّسُلًا مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى اللَّهِ حُجَّةٌ بَعْدَ الرُّسُلِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
और हमने नेक लोगों को बेहिश्त की ख़ुशख़बरी देने वाले और बुरे लोगों को अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बर (भेजे) ताकि पैग़म्बरों के आने के बाद लोगों की ख़ुदा पर कोई हुज्जत बाक़ी न रह जाए और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त हकीम है (ये कुफ्फ़ार नहीं मानते न मानें)
166لَّٰكِنِ اللَّهُ يَشْهَدُ بِمَا أَنزَلَ إِلَيْكَ ۖ أَنزَلَهُ بِعِلْمِهِ ۖ وَالْمَلَائِكَةُ يَشْهَدُونَ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا
मगर ख़ुदा तो इस पर गवाही देता है जो कुछ तुम पर नाज़िल किया है ख़ूब समझ बूझ कर नाज़िल किया है (बल्कि) उसकी गवाही तो फ़रिश्ते तक देते हैं हालॉकि ख़ुदा गवाही के लिए काफ़ी है
167إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ قَدْ ضَلُّوا ضَلَالًا بَعِيدًا
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और ख़ुदा की राह से (लोगों) को रोका वह राहे रास्त से भटक के बहुत दूर जा पडे
168إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَظَلَمُوا لَمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَرِيقًا
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और (उस पर) ज़ुल्म (भी) करते रहे न तो ख़ुदा उनको बख्शेगा ही और न ही उन्हें किसी तरीक़े की हिदायत करेगा
169إِلَّا طَرِيقَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا
मगर (हॉ) जहन्नुम का रास्ता (दिखा देगा) जिसमें ये लोग हमेशा (पडे) रहेंगे और ये तो ख़ुदा के वास्ते बहुत ही आसान बात है
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अनुवाद — अन-निसा 167

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Tuesday, August 18, 2026

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