Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كَفَرُوا: अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाना, सत्य को जानते हुए भी उसे छिपाना और अस्वीकार करना।
- وَصَدُّوا: रोका, बाधा डाली, लोगों को मार्ग से हटाया।
- سَبِيلِ اللهِ: अल्लाह का मार्ग, अर्थात इस्लाम, ईमान और सत्य का रास्ता।
- ضَلُّوا: भटक गए, सत्य से विचलित हो गए।
- ضَلَالًا بَعِيدًا: अत्यंत दूर की गुमराही, सत्य से बहुत दूर जाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने दो बड़े अपराध किए: पहला, उन्होंने स्वयं अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर ईमान नहीं लाया और सत्य को अस्वीकार किया; दूसरा, उन्होंने दूसरे लोगों को भी अल्लाह के मार्ग (इस्लाम) पर चलने से रोका और उन्हें सत्य से दूर रखने की कोशिश की। उन्होंने अल्लाह के मार्ग को बंद करने और लोगों को उससे विचलित करने का प्रयास किया। इस प्रकार उन्होंने दोहरी गुमराही अपनाई — एक स्वयं सत्य से भटकना, और दूसरा दूसरों को भटकाना। इसलिए अल्लाह ने उनके बारे में फरमाया कि वे सत्य से अत्यंत दूर जा चुके हैं, उनकी गुमराही बहुत गहरी और दूर तक फैली हुई है। यह उन लोगों के लिए एक कठोर चेतावनी है जो न केवल स्वयं सत्य से दूर रहते हैं बल्कि दूसरों को भी सत्य के मार्ग से रोकते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि केवल स्वयं सत्य पर होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूसरों को भी सत्य के मार्ग पर लाने का प्रयास करना चाहिए। जो लोग दूसरों को सत्य से रोकते हैं, वे अत्यंत घोर गुमराही में हैं।
- इससे यह भी पता चलता है कि सत्य को छिपाना और लोगों को धर्म से दूर करना बहुत बड़ा पाप है, और ऐसे लोग अल्लाह की दृष्टि में बहुत दूर भटके हुए हैं।
- यह आयत मुसलमानों को प्रेरित करती है कि वे स्वयं सत्य पर स्थिर रहें और दूसरों को भी सत्य का मार्ग दिखाएँ, क्योंकि यही सच्ची भलाई और सफलता का मार्ग है।
- हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह का मार्ग (इस्लाम) ही एकमात्र सत्य मार्ग है, और जो लोग इससे दूर होते हैं या दूसरों को इससे दूर करते हैं, वे वास्तव में असफल और घाटे में हैं।
📜 आयत 165-169 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 167
सूरा अन-निसा आयत 167 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और ख़ुदा की…सूरा आयत 167/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 165–169. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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