Yureedul laahu liyubai yina lakum wa yahdiyakum sunanal lazeena min qablikum wa yatooba `alaikum; wallaahu `Aleemun Hakeem
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और तुम्हारी तौबा कुबूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और हिकमत वाला है
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خدا چاہتا ہے کہ (اپنی آیتیں) تم سے کھول کھول کر بیان فرمائے اور تم کو اگلے لوگوں کے طریقے بتائے اور تم پر مہربانی کرے اور خدا جاننے والا (اور) حکمت والا ہے
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और तुम्हारी तौबा कुबूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और हिकमत वाला है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
يُبَيِّنَ لَكُمْ: तुम्हारे लिए स्पष्ट करे।
سُنَنَ: रास्ते, तरीके, शरीअतें (कानून)।
يَتُوبَ عَلَيْكُمْ: तुम्हारी तौबा (पश्चाताप) को क़बूल करे और तुम्हें गुनाह से तौबा करने की तौफ़ीक़ दे।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपनी इन शरीअतों और हुक्मों (जो उसने इस सूरह में बयान किए हैं) के ज़रिए यह चाहता है कि तुम्हें अपने दीन की साफ़-साफ़ पहचान कराए और उन रास्तों की रहनुमाई करे जिन पर तुमसे पहले के नबी और नेक लोग चले थे। यानी वह तुम्हें हलाल और हराम के उन्हीं उसूलों पर चलना सिखाना चाहता है जो पहले के अंबिया की शरीअतों में थे, ताकि तुम उनकी पैरवी करो। साथ ही वह चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़बूल करके तुम्हें गुनाहों से पाक करे और तुम्हें अपनी इताअत (आज्ञाकारिता) की तरफ लौटाए। अल्लाह अपने बंदों के मसालिह (भलाई) को खूब जानता है और वह हर उस चीज़ में हकीम (बुद्धिमान) है जो वह तुम्हारे लिए मुक़र्रर करता है। उसका हर हुक्म अदल और हिकमत पर मबनी है।
फ़ायदे:
अल्लाह की शरीअत का हर हुक्म बंदों की भलाई के लिए है, इसलिए हमें उस पर दिल से राज़ी रहना चाहिए और उसे अपनी समझ से बेहतर मानना चाहिए।
अल्लाह का दीन कोई नया दीन नहीं है, बल्कि यह उन्हीं रास्तों की तकमील है जिन पर पहले के नबी चले, इसलिए इस पर चलना हर दौर में इंसान के लिए नजात (मुक्ति) का ज़रिया रहा है।
अल्लाह बंदों की तौबा से बहुत खुश होता है और उसे क़बूल करता है, इसलिए गुनाह करने के बाद मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि तौबा करके उसकी तरफ रुजू करना चाहिए।
अल्लाह की सिफ़ात "अलीम" (सब कुछ जानने वाला) और "हकीम" (बुद्धिमान) हमें यक़ीन दिलाती हैं कि उसके हर हुक्म में हिकमत है, चाहे हमारी अक़्ल उसे समझे या न समझे।
और शौहरदार औरतें मगर वह औरतें जो (जिहाद में कुफ्फ़ार से) तुम्हारे कब्ज़े में आ जाएं हराम नहीं (ये) ख़ुदा का तहरीरी हुक्म (है जो) तुमपर (फ़र्ज़ किया गया) है और उन औरतों के सिवा (और औरतें) तुम्हारे लिए जायज़ हैं बशर्ते कि बदकारी व ज़िना नहीं बल्कि तुम इफ्फ़त या पाकदामिनी की ग़रज़ से अपने माल (व मेहर) के बदले (निकाह करना) चाहो हॉ जिन औरतों से तुमने मुताअ किया हो तो उन्हें जो मेहर मुअय्यन किया है दे दो और मेहर के मुक़र्रर होने के बाद अगर आपस में (कम व बेश पर) राज़ी हो जाओ तो उसमें तुमपर कुछ गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और मसलेहतों का पहचानने वाला है
और तुममें से जो शख्स आज़ाद इफ्फ़तदार औरतों से निकाह करने की माली हैसियत से क़ुदरत न रखता हो तो वह तुम्हारी उन मोमिना लौन्डियों से जो तुम्हारे कब्ज़े में हैं निकाह कर सकता है और ख़ुदा तुम्हारे ईमान से ख़ूब वाक़िफ़ है (ईमान की हैसियत से तो) तुममें एक दूसरे का हमजिन्स है पस (बे ताम्मुल) उनके मालिकों की इजाज़त से लौन्डियों से निकाह करो और उनका मेहर हुस्ने सुलूक से दे दो मगर उन्हीं (लौन्डियो) से निकाह करो जो इफ्फ़त के साथ तुम्हारी पाबन्द रहें न तो खुले आम ज़िना करना चाहें और न चोरी छिपे से आशनाई फिर जब तुम्हारी पाबन्द हो चुकी उसके बाद कोई बदकारी करे तो जो सज़ा आज़ाद बीवियों को दी जाती है उसकी आधी (सज़ा) लौन्डियों को दी जाएगी (और लौन्डियों) से निकाह कर भी सकता है तो वह शख्स जिसको ज़िना में मुब्तिला हो जाने का ख़ौफ़ हो और सब्र करे तो तुम्हारे हक़ में ज्यादा बेहतर है और ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और तुम्हारी तौबा कुबूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और हिकमत वाला है
करे और जो लोग नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पडे हैं वह ये चाहते हैं कि तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है
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