अन-निसा · 27/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
وَاللَّهُ يُرِيدُ أَن يَتُوبَ عَلَيْكُمْ وَيُرِيدُ الَّذِينَ يَتَّبِعُونَ الشَّهَوَاتِ أَن تَمِيلُوا مَيْلًا عَظِيمًا ۝٢٧
Wallaahu yureedu ai yatooba `alaikum wa yureedul lazeena yattabi `oonash shahawaati an tameeloo mailan `azeemaa
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा तो चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़ुबूल

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَتُوبَ عَلَيْكُمْ: तुम्हें तौबा की तौफ़ीक़ दे और तुम्हारी ग़लतियों को माफ़ कर दे।
  • يَتَّبِعُونَ الشَّهَوَاتِ: जो अपनी इच्छाओं और ख्वाहिशों के पीछे चलते हैं (जैसे ज़िना, शराब, हराम कमाई आदि)।
  • تَمِيلُوا مَيْلًا عَظِيمًا: सीधे रास्ते से हटकर बुरी तरह झुक जाओ, यानी हक़ से दूर हो जाओ।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है। वह चाहता है कि तुम लोग उसकी तरफ रुजू करो, अपनी ग़लतियों से तौबा करो और वह तुम्हें माफ़ कर दे। उसका दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है, चाहे तुमसे कितनी भी बड़ी ग़लती हुई हो। वह तुम्हारी भलाई चाहता है और तुम्हें पाकीज़गी की राह दिखाना चाहता है।

लेकिन इसके उलट, जो लोग अपनी नफ़्सानी ख्वाहिशों और शहवतों के ग़ुलाम हैं—चाहे वह काफ़िर हों या ज़िना और हराम कामों में मुब्तिला लोग—वह चाहते हैं कि तुम भी सीधे रास्ते से भटक जाओ और हक़ से इतना दूर हो जाओ कि तुम्हारा झुकाव पूरी तरह बातिल की तरफ हो जाए। वह नहीं चाहते कि तुम पाकीज़ा ज़िंदगी गुज़ारो, बल्कि वह चाहते हैं कि तुम भी उन्हीं की तरह गुनाहों में डूब जाओ।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की रहमत और मेहरबानी का तक़ाज़ा है कि वह अपने बंदों की भलाई चाहता है और उन्हें माफ़ी का रास्ता दिखाता है। इससे बंदे को उम्मीद होती है कि चाहे कितनी ही ग़लतियाँ हों, अल्लाह की तौबा का दरवाज़ा बंद नहीं हुआ।
  2. इस आयत से पता चलता है कि बुरे लोगों की कोशिश हमेशा यही होती है कि नेक लोगों को भी अपनी तरफ खींच लें। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह ऐसे लोगों की सोहबत से बचे और अपने ईमान की हिफ़ाज़त करे।
  3. तौबा करना अल्लाह की पसंदीदा चीज़ है, और यह इंसान को गुनाहों की गंदगी से पाक करके उसे अल्लाह का प्यारा बंदा बना देती है। यही इंसान की कामयाबी का ज़रिया है।


📜 आयत 25-29 — सूरा अन-निसा

25وَمَن لَّمْ يَسْتَطِعْ مِنكُمْ طَوْلًا أَن يَنكِحَ الْمُحْصَنَاتِ الْمُؤْمِنَاتِ فَمِن مَّا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُم مِّن فَتَيَاتِكُمُ الْمُؤْمِنَاتِ ۚ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِإِيمَانِكُم ۚ بَعْضُكُم مِّن بَعْضٍ ۚ فَانكِحُوهُنَّ بِإِذْنِ أَهْلِهِنَّ وَآتُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ بِالْمَعْرُوفِ مُحْصَنَاتٍ غَيْرَ مُسَافِحَاتٍ وَلَا مُتَّخِذَاتِ أَخْدَانٍ ۚ فَإِذَا أُحْصِنَّ فَإِنْ أَتَيْنَ بِفَاحِشَةٍ فَعَلَيْهِنَّ نِصْفُ مَا عَلَى الْمُحْصَنَاتِ مِنَ الْعَذَابِ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَشِيَ الْعَنَتَ مِنكُمْ ۚ وَأَن تَصْبِرُوا خَيْرٌ لَّكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और तुममें से जो शख्स आज़ाद इफ्फ़तदार औरतों से निकाह करने की माली हैसियत से क़ुदरत न रखता हो तो वह तुम्हारी उन मोमिना लौन्डियों से जो तुम्हारे कब्ज़े में हैं निकाह कर सकता है और ख़ुदा तुम्हारे ईमान से ख़ूब वाक़िफ़ है (ईमान की हैसियत से तो) तुममें एक दूसरे का हमजिन्स है पस (बे ताम्मुल) उनके मालिकों की इजाज़त से लौन्डियों से निकाह करो और उनका मेहर हुस्ने सुलूक से दे दो मगर उन्हीं (लौन्डियो) से निकाह करो जो इफ्फ़त के साथ तुम्हारी पाबन्द रहें न तो खुले आम ज़िना करना चाहें और न चोरी छिपे से आशनाई फिर जब तुम्हारी पाबन्द हो चुकी उसके बाद कोई बदकारी करे तो जो सज़ा आज़ाद बीवियों को दी जाती है उसकी आधी (सज़ा) लौन्डियों को दी जाएगी (और लौन्डियों) से निकाह कर भी सकता है तो वह शख्स जिसको ज़िना में मुब्तिला हो जाने का ख़ौफ़ हो और सब्र करे तो तुम्हारे हक़ में ज्यादा बेहतर है और ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है
26يُرِيدُ اللَّهُ لِيُبَيِّنَ لَكُمْ وَيَهْدِيَكُمْ سُنَنَ الَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ وَيَتُوبَ عَلَيْكُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
ख़ुदा तो ये चाहता है कि (अपने) एहकाम तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान कर दे और जो (अच्छे) लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनके तरीक़े पर चला दे और तुम्हारी तौबा कुबूल करे और ख़ुदा तो (हर चीज़ से) वाक़िफ़ और हिकमत वाला है
27وَاللَّهُ يُرِيدُ أَن يَتُوبَ عَلَيْكُمْ وَيُرِيدُ الَّذِينَ يَتَّبِعُونَ الشَّهَوَاتِ أَن تَمِيلُوا مَيْلًا عَظِيمًا
और ख़ुदा तो चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़ुबूल
28يُرِيدُ اللَّهُ أَن يُخَفِّفَ عَنكُمْ ۚ وَخُلِقَ الْإِنسَانُ ضَعِيفًا
करे और जो लोग नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पडे हैं वह ये चाहते हैं कि तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है
29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَكُم بَيْنَكُم بِالْبَاطِلِ إِلَّا أَن تَكُونَ تِجَارَةً عَن تَرَاضٍ مِّنكُمْ ۚ وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हॉ) तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूंट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है
अन-निसाकुरान सूची
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मदनीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अन-निसा 27

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Wednesday, September 30, 2026

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