अन-निसा · 79/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
مَّا أَصَابَكَ مِنْ حَسَنَةٍ فَمِنَ اللَّهِ ۖ وَمَا أَصَابَكَ مِن سَيِّئَةٍ فَمِن نَّفْسِكَ ۚ وَأَرْسَلْنَاكَ لِلنَّاسِ رَسُولًا ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا ۝٧٩
Maaa asaabaka min hasanatin faminal laahi wa maaa asaaabaka min saiyi`atin famin nafsik; wa arsalnaaka linnaasi Rasoolaa; wa kafaa billaahi Shaheedaa
📖 हिंदी अर्थ
हालॉकि (सच तो यूं है कि) जब तुमको कोई फ़ायदा पहुंचे तो (समझो कि) ख़ुदा की तरफ़ से है और जब तुमको कोई फ़ायदा पहुंचे तो (समझो कि) ख़ुद तुम्हारी बदौलत है और (ऐ रसूल) हमने तुमको लोगों के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा है और (इसके लिए) ख़ुदा की गवाही काफ़ी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَسَنَةٍ (हसनah): भलाई, नेमत, ख़ैर
  • سَیِّئَةٍ (सय्यि'अह): बुराई, मुसीबत, तकलीफ़
  • فَمِنَ اللَّهِ: तो अल्लाह की तरफ़ से है
  • فَمِن نَّفْسِكَ: तो तुम्हारे अपने नफ़्स (अपनी कमाई) की तरफ़ से है
  • شَهِیدًا (शहीदन): गवाह

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ इंसान! तुझे जो भलाई, ख़ुशी, रिज़्क़, सेहत, औलाद और नेमतें मिलती हैं, वह सब अल्लाह तआला की तरफ़ से है — यह उसका फ़ज़्ल और एहसान है, जो वह अपनी रहमत से तुझ पर करता है। और तुझे जो मुसीबत, तकलीफ़, बीमारी या कमी पहुँचती है, वह तेरे अपने कर्मों का नतीजा है — तेरे गुनाहों और तेरी ग़लतियों की वजह से आती है। यह अल्लाह का इंसाफ़ है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि इंसान ख़ुद अपने हाथों अपने लिए बुराई कमाता है।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ से फ़रमाता है: "ऐ मुहम्मद! हमने तुम्हें पूरी इंसानियत के लिए रसूल बनाकर भेजा है — तुम सब लोगों तक हमारा पैग़ाम पहुँचाओ। और यह काफ़ी है कि अल्लाह ख़ुद तुम्हारी सच्चाई का गवाह है। उसने तुम्हें जो मौजिज़े और दलीलें दी हैं, वह तुम्हारे सच्चे रसूल होने की सबसे बड़ी गवाही हैं।"


दावत और नसीहत:

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि जब हम पर नेमतें आएँ तो हम अल्लाह का शुक्र अदा करें और जान लें कि हर अच्छाई उसी की तरफ़ से है। और जब कोई मुसीबत आए तो हम अपने आप को देखें, अपने अमाल का जायज़ा लें और तौबा करें — क्योंकि हमारी बुराइयाँ ही हमारी मुसीबतों का सबब बनती हैं। यह हमारे लिए एक बड़ी तरबियत है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की तरफ़ रुजू करें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ और अच्छे कर्मों को अपनाएँ।

और यह भी याद रखें कि हमारे प्यारे नबी ﷺ पूरी दुनिया के लिए रहमत बनाकर आए हैं। उनकी सच्चाई पर अल्लाह ख़ुद गवाह है — तो हमें उन पर ईमान लाना चाहिए, उनकी सुन्नत पर चलना चाहिए और उनके लाए हुए दीन को अपनी ज़िंदगी में अपनाना चाहिए। यही हमारी कामयाबी और दोनों जहान की भलाई का रास्ता है।



📜 आयत 77-81 — अन-निसा

77أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ قِيلَ لَهُمْ كُفُّوا أَيْدِيَكُمْ وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ الْقِتَالُ إِذَا فَرِيقٌ مِّنْهُمْ يَخْشَوْنَ النَّاسَ كَخَشْيَةِ اللَّهِ أَوْ أَشَدَّ خَشْيَةً ۚ وَقَالُوا رَبَّنَا لِمَ كَتَبْتَ عَلَيْنَا الْقِتَالَ لَوْلَا أَخَّرْتَنَا إِلَىٰ أَجَلٍ قَرِيبٍ ۗ قُلْ مَتَاعُ الدُّنْيَا قَلِيلٌ وَالْآخِرَةُ خَيْرٌ لِّمَنِ اتَّقَىٰ وَلَا تُظْلَمُونَ فَتِيلًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों (के हाल) पर नज़र नहीं की जिनको (जेहाद की आरज़ू थी) और उनको हुक्म दिया गया था कि (अभी) अपने हाथ रोके रहो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ो और ज़कात दिए जाओ मगर जब जिहाद (उनपर वाजिब किया गया तो) उनमें से कुछ लोग (बोदेपन में) लोगों से इस तरह डरने लगे जैसे कोई ख़ुदा से डरे बल्कि उससे कहीं ज्यादा और (घबराकर) कहने लगे ख़ुदाया तूने हमपर जेहाद क्यों वाजिब कर दिया हमको कुछ दिनों की और मोहलत क्यों न दी (ऐ रसूल) उनसे कह दो कि दुनिया की आसाइश बहुत थोड़ा सा है और जो (ख़ुदा से) डरता है उसकी आख़ेरत उससे कहीं बेहतर है
78أَيْنَمَا تَكُونُوا يُدْرِككُّمُ الْمَوْتُ وَلَوْ كُنتُمْ فِي بُرُوجٍ مُّشَيَّدَةٍ ۗ وَإِن تُصِبْهُمْ حَسَنَةٌ يَقُولُوا هَٰذِهِ مِنْ عِندِ اللَّهِ ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ يَقُولُوا هَٰذِهِ مِنْ عِندِكَ ۚ قُلْ كُلٌّ مِّنْ عِندِ اللَّهِ ۖ فَمَالِ هَٰؤُلَاءِ الْقَوْمِ لَا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ حَدِيثًا
और वहां रेशा (बाल) बराबर भी तुम लोगों पर जुल्म नहीं किया जाएगा तुम चाहे जहॉ हो मौत तो तुमको ले डालेगी अगरचे तुम कैसे ही मज़बूत पक्के गुम्बदों में जा छुपो और उनको अगर कोई भलाई पहुंचती है तो कहने लगते हैं कि ये ख़ुदा की तरफ़ से है और अगर उनको कोई तकलीफ़ पहुंचती है तो (शरारत से) कहने लगते हैं कि (ऐ रसूल) ये तुम्हारी बदौलत है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि सब ख़ुदा की तरफ़ से है पस उन लोगों को क्या हो गया है कि र्कोई बात ही नहीं समझते
79مَّا أَصَابَكَ مِنْ حَسَنَةٍ فَمِنَ اللَّهِ ۖ وَمَا أَصَابَكَ مِن سَيِّئَةٍ فَمِن نَّفْسِكَ ۚ وَأَرْسَلْنَاكَ لِلنَّاسِ رَسُولًا ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا
हालॉकि (सच तो यूं है कि) जब तुमको कोई फ़ायदा पहुंचे तो (समझो कि) ख़ुदा की तरफ़ से है और जब तुमको कोई फ़ायदा पहुंचे तो (समझो कि) ख़ुद तुम्हारी बदौलत है और (ऐ रसूल) हमने तुमको लोगों के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा है और (इसके लिए) ख़ुदा की गवाही काफ़ी है
80مَّن يُطِعِ الرَّسُولَ فَقَدْ أَطَاعَ اللَّهَ ۖ وَمَن تَوَلَّىٰ فَمَا أَرْسَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا
जिसने रसूल की इताअत की तो उसने ख़ुदा की इताअत की और जिसने रूगरदानी की तो तुम कुछ ख्याल न करो (क्योंकि) हमने तुम को पासबान (मुक़र्रर) करके तो भेजा नहीं है
81وَيَقُولُونَ طَاعَةٌ فَإِذَا بَرَزُوا مِنْ عِندِكَ بَيَّتَ طَائِفَةٌ مِّنْهُمْ غَيْرَ الَّذِي تَقُولُ ۖ وَاللَّهُ يَكْتُبُ مَا يُبَيِّتُونَ ۖ فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى اللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
(ये लोग तुम्हारे सामने) तो कह देते हैं कि हम (आपके) फ़रमाबरदार हैं लेकिन जब तुम्हारे पास से बाहर निकले तो उनमें से कुछ लोग जो कुछ तुमसे कह चुके थे उसके ख़िलाफ़ रातों को मशवरा करते हैं हालॉकि (ये नहीं समझते) ये लोग रातों को जो कुछ भी मशवरा करते हैं उसे ख़ुदा लिखता जाता है पास तुम उन लोगों की कुछ परवाह न करो और ख़ुदा पर भरोसा रखो और ख़ुदा कारसाज़ी के लिए काफ़ी है
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अनुवाद — अन-निसा 79

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Tuesday, August 18, 2026

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