Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَّن يُطِعِ الرَّسُولَ: जो रसूल (ﷺ) की आज्ञा का पालन करे।
- فَقَدْ أَطَاعَ اللَّهَ: तो उसने वास्तव में अल्लाह की आज्ञा का पालन किया।
- وَمَن تَوَلَّىٰ: और जो (आज्ञा पालन से) मुँह मोड़े।
- حَفِيظًا: निगरानी करने वाला, रक्षक, हिसाब लेने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत रसूलुल्लाह (ﷺ) की आज्ञा पालन की अहमियत को स्पष्ट करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो व्यक्ति रसूल (ﷺ) की आज्ञा का पालन करता है—यानी जो कुछ वे आदेश दें उसे माने और जिससे रोकें उससे बचे—तो उसने वास्तव में अल्लाह की आज्ञा का पालन किया। ऐसा इसलिए है क्योंकि रसूल (ﷺ) अपनी तरफ से कुछ नहीं कहते, बल्कि जो अल्लाह की ओर से उन्हें प्रकाशित किया गया है उसी का संदेश देते हैं। इसलिए उनकी आज्ञा का पालन अल्लाह की आज्ञा का पालन है।
फिर अल्लाह तआला रसूल (ﷺ) को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है: और जो कोई इस आज्ञा पालन से मुँह मोड़े और अपनी मनमानी करे, तो ऐ रसूल! हमने आपको उन लोगों पर निगरानी रखने वाला और उनके कर्मों का हिसाब लेने वाला नहीं बनाया है। आपका काम केवल संदेश पहुँचाना है। उनके कर्मों का हिसाब लेना और उन्हें उनके कर्मों का बदला देना हमारा काम है। इसलिए उनके इनकार पर आप दुखी न हों और न ही उनकी हिदायत की चिंता में अपने आपको परेशान करें।
फ़ायदे (लाभ):
- रसूल (ﷺ) की आज्ञा पालन ही अल्लाह की आज्ञा पालन है — यह आयत सिखाती है कि रसूल (ﷺ) की सुन्नत पर चलना और उनके बताए रास्ते पर जीवन बिताना अल्लाह की रज़ा और उसकी आज्ञा पालन का सबसे अच्छा ज़रिया है। इससे हमें यह समझ मिलती है कि क़ुरआन और सुन्नत दोनों साथ-साथ हैं।
- रसूल (ﷺ) की मुहब्बत और सम्मान — यह आयत हमें सिखाती है कि रसूल (ﷺ) की इताअत (आज्ञा पालन) हमारे ईमान का हिस्सा है। जो उनसे मुहब्बत करता है और उनके बताए रास्ते पर चलता है, वह अल्लाह के करीब होता है।
- ज़िम्मेदारी का एहसास — यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हर इंसान अपने कर्मों के लिए खुद ज़िम्मेदार है। रसूल (ﷺ) का काम केवल संदेश पहुँचाना था, और हमारा काम उस संदेश को समझकर उस पर अमल करना है। इससे हमें अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास होता है।
- निराशा से बचाव — जब हम दूसरों को सही रास्ते की दावत देते हैं और वे नहीं मानते, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए। हमारा काम केवल सही बात पहुँचाना है, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। यह आयत दावत के काम में लगे लोगों के लिए बहुत बड़ी तसल्ली है।
- अल्लाह पर भरोसा — यह आयत हमें सिखाती है कि हर चीज़ का हिसाब अल्लाह के पास है। हमें अपने कर्मों की चिंता करनी चाहिए, दूसरों के कर्मों की नहीं। अल्लाह पर भरोसा रखने वाला कभी परेशान नहीं होता।
📜 आयत 78-82 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 80
सूरा अन-निसा आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसने रसूल की इताअत की तो उसने ख़ुदा की इताअत…सूरा आयत 80/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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