अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الأَحْزَاب: वे समूह और गिरोह जो अपने नबियों के विरुद्ध एकत्र हुए।
- هَمَّتْ: उन्होंने इरादा किया और दृढ़ संकल्प किया।
- لِيَأْخُذُوهُ: उसे पकड़कर मार डालें या उसे नुकसान पहुँचाएँ।
- يُدْحِضُوا: मिटा दें, समाप्त कर दें, या झूठा साबित कर दें।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनके साथियों को दिलासा दे रहे हैं और मक्का के काफ़िरों को चेतावनी दे रहे हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐ नबी! ये काफ़िर अकेले नहीं हैं जिन्होंने आपको झुठलाया, बल्कि इनसे पहले भी बहुत से लोग अपने नबियों को झुठला चुके हैं। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उन्हें झुठलाया, और उनके बाद भी कई समूह आए—आद, समूद, लूत की क़ौम, मदयन के लोग और फ़िरऔन—जिन्होंने अपने-अपने नबियों के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान किया।
यह केवल झुठलाने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि हर उम्मत ने अपने नबी को पकड़कर क़त्ल करने का इरादा किया। उन्होंने नबियों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, और जब नबी उन्हें सच्चाई की तरफ़ बुलाते तो वे बातिल (झूठ) के सहारे झगड़ा करते, ताकि सच्चाई को मिटा दें और उसे बेअसर कर दें। वे अपने झूठे तर्कों से हक़ को दबाना चाहते थे, लेकिन अल्लाह ने उन सबको अपनी पकड़ में ले लिया और उन्हें हलाक कर दिया।
अल्लाह फ़रमाता है: "फिर कैसा था मेरा अज़ाब!" यानी तुम लोग उनके खंडहरों के पास से गुज़रते हो, उनके अंजाम को देखो और सबक़ लो। उनका अंजाम बहुत भयानक था—किसी को तूफ़ान में डुबोया गया, किसी पर पत्थर बरसाए गए, किसी को चीख़ ने आ दबोचा, और किसी को ज़मीन में धँसा दिया गया। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने अल्लाह के नबियों का विरोध किया और सच्चाई के आगे सर नहीं झुकाया।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की राह हमेशा कठिन रही है, लेकिन अल्लाह हमेशा अपने नबियों की मदद करता है और झूठ को मिटा देता है। आज भी जो लोग अल्लाह के दीन के ख़िलाफ़ साज़िशें करते हैं, उनका अंजाम वही होगा जो पिछली उम्मतों का हुआ। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम सच्चाई पर डटे रहें, चाहे विरोध कितना भी बड़ा क्यों न हो। अल्लाह का वादा है कि सच्चाई ही जीतेगी, और बातिल मिट जाएगा। हमें अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलते हुए सब्र और इस्तिक़ामत (दृढ़ता) अपनानी चाहिए, और यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी।
📜 आयत 3-7 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 5
सूरा ग़ाफिर आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम्हें इस धोखे में न डाले (कि उन पर आज़ाब…सूरा आयत 5/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








