ग़ाफिर · 5/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَالْأَحْزَابُ مِن بَعْدِهِمْ ۖ وَهَمَّتْ كُلُّ أُمَّةٍ بِرَسُولِهِمْ لِيَأْخُذُوهُ ۖ وَجَادَلُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ فَأَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ ۝٥
Kazzabat qablahum qawmu Noohinw wal Ahzaabu mim ba`dihim wa hammat kullu ummatim bi Rasoolihim liyaa khuzoobhu wa jaadaloo bilbaatili liyudhidoo bihil haqqa fa akhaztuhum fakifa kaana `iqaab
📖 हिंदी अर्थ
तुम्हें इस धोखे में न डाले (कि उन पर आज़ाब न होगा) इन के पहले नूह की क़ौम ने और उन के बाद और उम्मतों ने (अपने पैग़म्बरों को) झुठलाया और हर उम्मत ने अपने पैग़म्बरों के बारे में यही ठान लिया कि उन्हें गिरफ्तार कर (के क़त्ल कर डालें) और बेहूदा बातों की आड़ पकड़ कर लड़ने लगें - ताकि उसके ज़रिए से हक़ बात को उखाड़ फेंकें तो मैंने, उन्हें गिरफ्तार कर लिया फिर देखा कि उन पर (मेरा अज़ाब कैसा (सख्त हुआ)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الأَحْزَاب: वे समूह और गिरोह जो अपने नबियों के विरुद्ध एकत्र हुए।
  • هَمَّتْ: उन्होंने इरादा किया और दृढ़ संकल्प किया।
  • لِيَأْخُذُوهُ: उसे पकड़कर मार डालें या उसे नुकसान पहुँचाएँ।
  • يُدْحِضُوا: मिटा दें, समाप्त कर दें, या झूठा साबित कर दें।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनके साथियों को दिलासा दे रहे हैं और मक्का के काफ़िरों को चेतावनी दे रहे हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐ नबी! ये काफ़िर अकेले नहीं हैं जिन्होंने आपको झुठलाया, बल्कि इनसे पहले भी बहुत से लोग अपने नबियों को झुठला चुके हैं। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने उन्हें झुठलाया, और उनके बाद भी कई समूह आए—आद, समूद, लूत की क़ौम, मदयन के लोग और फ़िरऔन—जिन्होंने अपने-अपने नबियों के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान किया।

यह केवल झुठलाने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि हर उम्मत ने अपने नबी को पकड़कर क़त्ल करने का इरादा किया। उन्होंने नबियों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, और जब नबी उन्हें सच्चाई की तरफ़ बुलाते तो वे बातिल (झूठ) के सहारे झगड़ा करते, ताकि सच्चाई को मिटा दें और उसे बेअसर कर दें। वे अपने झूठे तर्कों से हक़ को दबाना चाहते थे, लेकिन अल्लाह ने उन सबको अपनी पकड़ में ले लिया और उन्हें हलाक कर दिया।

अल्लाह फ़रमाता है: "फिर कैसा था मेरा अज़ाब!" यानी तुम लोग उनके खंडहरों के पास से गुज़रते हो, उनके अंजाम को देखो और सबक़ लो। उनका अंजाम बहुत भयानक था—किसी को तूफ़ान में डुबोया गया, किसी पर पत्थर बरसाए गए, किसी को चीख़ ने आ दबोचा, और किसी को ज़मीन में धँसा दिया गया। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने अल्लाह के नबियों का विरोध किया और सच्चाई के आगे सर नहीं झुकाया।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की राह हमेशा कठिन रही है, लेकिन अल्लाह हमेशा अपने नबियों की मदद करता है और झूठ को मिटा देता है। आज भी जो लोग अल्लाह के दीन के ख़िलाफ़ साज़िशें करते हैं, उनका अंजाम वही होगा जो पिछली उम्मतों का हुआ। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम सच्चाई पर डटे रहें, चाहे विरोध कितना भी बड़ा क्यों न हो। अल्लाह का वादा है कि सच्चाई ही जीतेगी, और बातिल मिट जाएगा। हमें अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलते हुए सब्र और इस्तिक़ामत (दृढ़ता) अपनानी चाहिए, और यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी।

🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — ग़ाफिर

3غَافِرِ الذَّنبِ وَقَابِلِ التَّوْبِ شَدِيدِ الْعِقَابِ ذِي الطَّوْلِ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ إِلَيْهِ الْمَصِيرُ
गुनाहों का बख्शने वाला और तौबा का क़ुबूल करने वाला सख्त अज़ाब देने वाला साहिबे फज़ल व करम है उसके सिवा कोई माबूद नहीं उसी की तरफ (सबको) लौट कर जाना है
4مَا يُجَادِلُ فِي آيَاتِ اللَّهِ إِلَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَلَا يَغْرُرْكَ تَقَلُّبُهُمْ فِي الْبِلَادِ
ख़ुदा की आयतों में बस वही लोग झगड़े पैदा करते हैं जो काफिर हैं तो (ऐ रसूल) उन लोगों का शहरों (शहरों) घूमना फिरना और माल हासिल करना
5كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَالْأَحْزَابُ مِن بَعْدِهِمْ ۖ وَهَمَّتْ كُلُّ أُمَّةٍ بِرَسُولِهِمْ لِيَأْخُذُوهُ ۖ وَجَادَلُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ فَأَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ
तुम्हें इस धोखे में न डाले (कि उन पर आज़ाब न होगा) इन के पहले नूह की क़ौम ने और उन के बाद और उम्मतों ने (अपने पैग़म्बरों को) झुठलाया और हर उम्मत ने अपने पैग़म्बरों के बारे में यही ठान लिया कि उन्हें गिरफ्तार कर (के क़त्ल कर डालें) और बेहूदा बातों की आड़ पकड़ कर लड़ने लगें - ताकि उसके ज़रिए से हक़ बात को उखाड़ फेंकें तो मैंने, उन्हें गिरफ्तार कर लिया फिर देखा कि उन पर (मेरा अज़ाब कैसा (सख्त हुआ)
6وَكَذَٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ أَصْحَابُ النَّارِ
और इसी तरह तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब का हुक्म (उन) काफ़िरों पर पूरा हो चुका है कि यह लोग यक़ीनी जहन्नुमी हैं
7الَّذِينَ يَحْمِلُونَ الْعَرْشَ وَمَنْ حَوْلَهُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيُؤْمِنُونَ بِهِ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِلَّذِينَ آمَنُوا رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
जो (फ़रिश्ते) अर्श को उठाए हुए हैं और जो उस के गिर्दा गिर्द (तैनात) हैं (सब) अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और उस पर ईमान रखते हैं और मोमिनों के लिए बख़शिश की दुआएं माँगा करते हैं कि परवरदिगार तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ पर अहाता किए हुए हैं, तो जिन लोगों ने (सच्चे) दिल से तौबा कर ली और तेरे रास्ते पर चले उनको बख्श दे और उनको जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले
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अनुवाद — ग़ाफिर 5

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Tuesday, August 18, 2026

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