अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَقَّتْ (हक़्क़त): सिद्ध हो गई, अनिवार्य हो गई, पूरी हो गई।
- كَلِمَتُ رَبِّكَ (कलिमतु रब्बिक): आपके रब का फैसला, उसकी बात जो उसने पहले से लिख दी।
- أَصْحَابُ النَّارِ (अस्हाबुन्नार): आग के रहने वाले, जहन्नुम में हमेशा रहने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
जिस प्रकार अल्लाह तआला का फैसला और अज़ाब पहले की उन क़ौमों पर सिद्ध हो चुका था जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और कुफ्र पर डटे रहे, ठीक उसी प्रकार ऐ मेरे नबी! आपके रब की वह बात और फैसला उन लोगों पर भी सिद्ध हो गया है जिन्होंने आपको झुठलाया और कुफ्र पर कायम रहे। यह फैसला यह है कि वे आग (जहन्नम) के रहने वाले हैं, उसमें हमेशा रहेंगे। यह अल्लाह का अटल नियम है कि जो सत्य को जानने के बाद भी उसे नकारे और हठधर्मी पर अड़ा रहे, उस पर अल्लाह की यातना अनिवार्य हो जाती है।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई से आगाह करती है कि अल्लाह का कानून बदलता नहीं। जिस तरह अतीत की ज़ालिम क़ौमों को उनके कुफ्र और ज़ुल्म की सज़ा मिली, उसी तरह हर ज़माने में कुफ्र और इन्कार करने वालों का अंजाम वही होगा। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है जो कभी नहीं बदलती।
लेकिन इसी के साथ यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की ओर भी ले जाती है। अल्लाह ने यह फैसला उन लोगों के बारे में सुनाया जो कुफ्र पर मरते दम तक डटे रहे। लेकिन जो कोई भी अपने कुफ्र से तौबा कर ले, अपने रब की ओर लौट आए, उसके लिए अल्लाह के दरवाजे खुले हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और अपनी रहमत से उन्हें माफ कर देता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों, और जितनी जल्दी हो सके अपने गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ रुजू करें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज्यादा वसीअ (विस्तृत) है, और वह हर उस बंदे को माफ कर देता है जो सच्चे दिल से उसकी ओर लौटता है।
📜 आयत 4-8 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 6
सूरा ग़ाफिर आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसी तरह तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब का हुक्म (उन)…सूरा आयत 6/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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