ग़ाफिर · 6/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَكَذَٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ أَصْحَابُ النَّارِ ۝٦
Wa kazaalika haqqat Kalimatu Rabbika `alal lazeena kafarooo annahum Ashaabun Naar
📖 हिंदी अर्थ
और इसी तरह तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब का हुक्म (उन) काफ़िरों पर पूरा हो चुका है कि यह लोग यक़ीनी जहन्नुमी हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَقَّتْ (हक़्क़त): सिद्ध हो गई, अनिवार्य हो गई, पूरी हो गई।
  • كَلِمَتُ رَبِّكَ (कलिमतु रब्बिक): आपके रब का फैसला, उसकी बात जो उसने पहले से लिख दी।
  • أَصْحَابُ النَّارِ (अस्हाबुन्नार): आग के रहने वाले, जहन्नुम में हमेशा रहने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

जिस प्रकार अल्लाह तआला का फैसला और अज़ाब पहले की उन क़ौमों पर सिद्ध हो चुका था जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और कुफ्र पर डटे रहे, ठीक उसी प्रकार ऐ मेरे नबी! आपके रब की वह बात और फैसला उन लोगों पर भी सिद्ध हो गया है जिन्होंने आपको झुठलाया और कुफ्र पर कायम रहे। यह फैसला यह है कि वे आग (जहन्नम) के रहने वाले हैं, उसमें हमेशा रहेंगे। यह अल्लाह का अटल नियम है कि जो सत्य को जानने के बाद भी उसे नकारे और हठधर्मी पर अड़ा रहे, उस पर अल्लाह की यातना अनिवार्य हो जाती है।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई से आगाह करती है कि अल्लाह का कानून बदलता नहीं। जिस तरह अतीत की ज़ालिम क़ौमों को उनके कुफ्र और ज़ुल्म की सज़ा मिली, उसी तरह हर ज़माने में कुफ्र और इन्कार करने वालों का अंजाम वही होगा। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है जो कभी नहीं बदलती।

लेकिन इसी के साथ यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की ओर भी ले जाती है। अल्लाह ने यह फैसला उन लोगों के बारे में सुनाया जो कुफ्र पर मरते दम तक डटे रहे। लेकिन जो कोई भी अपने कुफ्र से तौबा कर ले, अपने रब की ओर लौट आए, उसके लिए अल्लाह के दरवाजे खुले हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और अपनी रहमत से उन्हें माफ कर देता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों, और जितनी जल्दी हो सके अपने गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ रुजू करें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज्यादा वसीअ (विस्तृत) है, और वह हर उस बंदे को माफ कर देता है जो सच्चे दिल से उसकी ओर लौटता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — ग़ाफिर

4مَا يُجَادِلُ فِي آيَاتِ اللَّهِ إِلَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَلَا يَغْرُرْكَ تَقَلُّبُهُمْ فِي الْبِلَادِ
ख़ुदा की आयतों में बस वही लोग झगड़े पैदा करते हैं जो काफिर हैं तो (ऐ रसूल) उन लोगों का शहरों (शहरों) घूमना फिरना और माल हासिल करना
5كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَالْأَحْزَابُ مِن بَعْدِهِمْ ۖ وَهَمَّتْ كُلُّ أُمَّةٍ بِرَسُولِهِمْ لِيَأْخُذُوهُ ۖ وَجَادَلُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ فَأَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ
तुम्हें इस धोखे में न डाले (कि उन पर आज़ाब न होगा) इन के पहले नूह की क़ौम ने और उन के बाद और उम्मतों ने (अपने पैग़म्बरों को) झुठलाया और हर उम्मत ने अपने पैग़म्बरों के बारे में यही ठान लिया कि उन्हें गिरफ्तार कर (के क़त्ल कर डालें) और बेहूदा बातों की आड़ पकड़ कर लड़ने लगें - ताकि उसके ज़रिए से हक़ बात को उखाड़ फेंकें तो मैंने, उन्हें गिरफ्तार कर लिया फिर देखा कि उन पर (मेरा अज़ाब कैसा (सख्त हुआ)
6وَكَذَٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ أَصْحَابُ النَّارِ
और इसी तरह तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब का हुक्म (उन) काफ़िरों पर पूरा हो चुका है कि यह लोग यक़ीनी जहन्नुमी हैं
7الَّذِينَ يَحْمِلُونَ الْعَرْشَ وَمَنْ حَوْلَهُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيُؤْمِنُونَ بِهِ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِلَّذِينَ آمَنُوا رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
जो (फ़रिश्ते) अर्श को उठाए हुए हैं और जो उस के गिर्दा गिर्द (तैनात) हैं (सब) अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और उस पर ईमान रखते हैं और मोमिनों के लिए बख़शिश की दुआएं माँगा करते हैं कि परवरदिगार तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ पर अहाता किए हुए हैं, तो जिन लोगों ने (सच्चे) दिल से तौबा कर ली और तेरे रास्ते पर चले उनको बख्श दे और उनको जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले
8رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّهُمْ وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ऐ हमारे पालने वाले इन को सदाबहार बाग़ों में जिनका तूने उन से वायदा किया है दाख़िल कर और उनके बाप दादाओं और उनकी बीवीयों और उनकी औलाद में से जो लोग नेक हो उनको (भी बख्श दें) बेशक तू ही ज़बरदस्त (और) हिकमत वाला है
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6आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 6

सूरा ग़ाफिर आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसी तरह तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब का हुक्म (उन)…

सूरा आयत 6/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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