ग़ाफिर · 53/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْهُدَىٰ وَأَوْرَثْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ ۝٥٣
Wa laqad aatainaa Moosal hudaa wa awrasnaa Baneee Israaa `eelal Kitaab
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने मूसा को हिदायत (की किताब तौरेत) दी और बनी इसराईल को (उस) किताब का वारिस बनाया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْهُدَىٰ (अल-हुदा): मार्गदर्शन, वह ज्ञान और बुद्धि जो सत्य की ओर ले जाए। यहाँ इसका अर्थ नबुव्वत (पैग़म्बरी), हिक्मत (बुद्धि) और वे चमत्कार (मो'जिज़ात) हैं जो मूसा (अलैहिस्सलाम) को दिए गए।
  • وَأَوْرَثْنَا (और हमने विरासत में दिया): यानी एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी को सौंपना, ताकि वह उसे संभाल कर रखे और उस पर अमल करे।
  • الْكِتَابَ (अल-किताब): यहाँ तौरात (तोराह) मुराद है, जो मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी महान क़ुदरत और एहसान का ज़िक्र करते हुए फ़रमाते हैं कि हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को वह मार्गदर्शन अता किया जो सत्य तक पहुँचाने वाला था — यानी नबुव्वत, हिक्मत, और वे मो'जिज़ात जो उनके दौर में लोगों के लिए रहनुमा बने। यह हिदायत सिर्फ़ उनके ज़माने तक सीमित नहीं रही, बल्कि अल्लाह ने बनी इसराईल को यह सौगात दी कि वे तौरात को विरासत के तौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाते रहे। यह किताब उनके लिए रहनुमा, रोशनी और नसीहत बनकर आई, ताकि वे सीधे रास्ते पर चलें और अक्लमंद लोग इससे सबक़ हासिल करें।

यहाँ अल्लाह तआला हमें बताना चाहते हैं कि हिदायत उन्हीं को नसीब होती है जो इसे क़द्र की नज़र से देखें और उस पर अमल करें। बनी इसराईल को यह शरफ़ हासिल हुआ कि उनके पास आसमानी किताब रही, लेकिन जब उन्होंने उसके साथ बेवफ़ाई की और उसे तहरीफ़ (बदलाव) का निशाना बनाया, तो वह नेअमत उनसे छीन ली गई और आख़िरी नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कुरआन उतारा गया, जो हमेशा के लिए महफ़ूज़ है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की नेअमतों की क़द्र करनी चाहिए और उन्हें अपनी औलाद तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए। जिस तरह बनी इसराईल को किताब विरासत में मिली थी, उसी तरह हम मुसलमानों को कुरआन विरासत में मिला है। हमें चाहिए कि इसे सिर्फ़ पढ़ें ही नहीं, बल्कि इस पर अमल करें और अपनी आने वाली नस्लों को भी इससे जोड़ें। यही वह रास्ता है जो दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको कुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसे आगे बढ़ाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 51-55 — ग़ाफिर

51إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيَوْمَ يَقُومُ الْأَشْهَادُ
हम अपने पैग़म्बरों की और ईमान वालों की दुनिया की ज़िन्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फरिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे
52يَوْمَ لَا يَنفَعُ الظَّالِمِينَ مَعْذِرَتُهُمْ ۖ وَلَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ
(उस दिन भी) जिस दिन ज़ालिमों को उनकी माज़ेरत कुछ भी फायदे न देगी और उन पर फिटकार (बरसती) होगी और उनके लिए बहुत बुरा घर (जहन्नुम) है
53وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْهُدَىٰ وَأَوْرَثْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ
और हम ही ने मूसा को हिदायत (की किताब तौरेत) दी और बनी इसराईल को (उस) किताब का वारिस बनाया
54هُدًى وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ
जो अक्लमन्दों के लिए (सरतापा) हिदायत व नसीहत है
55فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ وَاسْتَغْفِرْ لِذَنبِكَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِبْكَارِ
(ऐ रसूल) तुम (उनकी शरारत) पर सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है, और अपने (उम्मत की) गुनाहों की माफी माँगो और सुबह व शाम अपने परवरदिगार की हम्द व सना के साथ तसबीह करते रहो
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अनुवाद — ग़ाफिर 53

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सूरा आयत 53/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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