ग़ाफिर · 52/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
يَوْمَ لَا يَنفَعُ الظَّالِمِينَ مَعْذِرَتُهُمْ ۖ وَلَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ ۝٥٢
Yawma laa yanfa`uz zaalimeena ma`ziratuhum wa lahumul la`natu wa lahum soooud daar
📖 हिंदी अर्थ
(उस दिन भी) जिस दिन ज़ालिमों को उनकी माज़ेरत कुछ भी फायदे न देगी और उन पर फिटकार (बरसती) होगी और उनके लिए बहुत बुरा घर (जहन्नुम) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَعْذِرَتُهُمْ: उनका बहाना, उनकी कोशिश (अपने कुकर्मों को सही ठहराने के लिए)।
  • اللَّعْنَةُ: रहमत से दूरी, फटकार और धिक्कार।
  • سُوءُ الدَّارِ: आख़िरत का बुरा ठिकाना, यानी जहन्नम की सख्त सज़ा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन (क़ियामत) का वर्णन कर रही है जब ज़ालिमों (अत्याचारियों) के सारे बहाने बेकार हो जाएंगे। जिन लोगों ने अल्लाह की हदें तोड़ीं, उसके रसूलों को झुठलाया और अपनी ज़िंदगी में ज़ुल्म किया, वे उस दिन कोई ऐसा बहाना पेश नहीं कर सकेंगे जो उन्हें अज़ाब से बचा सके। चाहे वे कितनी ही मिन्नतें करें, कितने ही तर्क गिनाएं, उनका कोई बहाना क़बूल नहीं किया जाएगा।

उस दिन उनके लिए अल्लाह की रहमत से दूरी (लानत) होगी और उनका ठिकाना जहन्नम की आग होगी, जो बुरा ठिकाना है। यह उनके उन कर्मों का सीधा परिणाम है जो उन्होंने दुनिया में किए — क्योंकि जो आज अल्लाह की रहमत से दूर रहता है और उसके हुक्मों को नहीं मानता, उसे उस दिन उसी दूरी का सामना करना पड़ेगा।

दीनी पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस रास्ते पर चल रहे हैं। क्या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह की रहमत के हक़दार बनते हैं, या उनमें से जिन्हें लानत और बुरे ठिकाने का सामना करना पड़ेगा? अल्लाह ने यह दुनिया इम्तिहान के लिए बनाई है — आज हमारे पास तौबा करने, सुधरने और अल्लाह की रहमत कमाने का मौका है। आज अगर हम अपनी गलतियों से बाज़ आ जाएं, अल्लाह से माफ़ी मांगें और उसके हुक्मों पर चलें, तो उस दिन हमें किसी बहाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी — हमारा चेहरा रोशन होगा और हमारा ठिकाना जन्नत होगी। यही अल्लाह का वादा है उन लोगों के लिए जो ईमान लाते हैं और नेक काम करते हैं। आइए, हम आज ही अपने जीवन को सुधारें और उस दिन की शर्मिंदगी से बचने की कोशिश करें, क्योंकि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा अभी खुला है।



📜 आयत 50-54 — ग़ाफिर

50قَالُوا أَوَلَمْ تَكُ تَأْتِيكُمْ رُسُلُكُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۚ قَالُوا فَادْعُوا ۗ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ व रौशन मौजिज़े लेकर नहीं आए थे वह कहेंगे (हाँ) आए तो थे, तब फरिश्ते तो कहेंगे फिर तुम ख़़ुद (क्यों) न दुआ करो, हालाँकि काफ़िरों की दुआ तो बस बेकार ही है
51إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيَوْمَ يَقُومُ الْأَشْهَادُ
हम अपने पैग़म्बरों की और ईमान वालों की दुनिया की ज़िन्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फरिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे
52يَوْمَ لَا يَنفَعُ الظَّالِمِينَ مَعْذِرَتُهُمْ ۖ وَلَهُمُ اللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوءُ الدَّارِ
(उस दिन भी) जिस दिन ज़ालिमों को उनकी माज़ेरत कुछ भी फायदे न देगी और उन पर फिटकार (बरसती) होगी और उनके लिए बहुत बुरा घर (जहन्नुम) है
53وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْهُدَىٰ وَأَوْرَثْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ الْكِتَابَ
और हम ही ने मूसा को हिदायत (की किताब तौरेत) दी और बनी इसराईल को (उस) किताब का वारिस बनाया
54هُدًى وَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ
जो अक्लमन्दों के लिए (सरतापा) हिदायत व नसीहत है
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
52आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 52

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Tuesday, August 18, 2026

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