अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَاخْتُلِفَ فِيهِ: उसमें मतभेद किया गया (कुछ ने माना, कुछ ने झुठलाया)।
- كَلِمَةٌ سَبَقَتْ: एक बात जो पहले से तय हो चुकी है (अर्थात अल्लाह का वादा)।
- لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ: उनके बीच फैसला कर दिया जाता (यानी सज़ा तुरंत दे दी जाती)।
- مُرِيبٍ: संदेह पैदा करने वाला, जो दिल को बेचैन कर दे।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए फ़रमाते हैं कि हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को भी किताब (तौरात) अता की थी, ठीक उसी तरह जैसे हमने आपको क़ुरआन दिया है। लेकिन उस किताब में भी लोगों ने मतभेद किया—कुछ ने उसे माना और कुछ ने झुठलाया। यह कोई नई बात नहीं है कि आपकी उम्मत में भी कुछ लोग क़ुरआन को नहीं मानते। यह तो पैग़म्बरों की सुन्नत (रीति) रही है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि अगर हमारी ओर से एक बात पहले से तय न होती—और वह यह कि फैसला क़ियामत के दिन होगा—तो इन झुठलाने वालों के बीच दुनिया में ही फैसला कर दिया जाता और झुठलाने वालों को तुरंत सज़ा दे दी जाती। लेकिन अल्लाह की रहमत और उसकी हिकमत यह है कि उसने फैसले को क़ियामत तक के लिए टाल दिया है, ताकि लोगों को मौका मिले, तौबा कर सकें, और सच्चे मोमिनों को सब्र का इनाम मिले।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है कि ये मुशरिकीन क़ुरआन के बारे में ऐसे संदेह में हैं जो उनके दिलों को बेचैन कर देता है। वे न तो पूरी तरह झुठला पाते हैं और न ही मान पाते हैं—यही उनकी गुमराही है।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें सबक मिलता है कि सच्चाई की राह हमेशा कठिन रही है। हर ज़माने में नबियों को झुठलाया गया, लेकिन अल्लाह ने हमेशा अपने नबियों की मदद की और सच्चाई को बुलंद किया। आज भी जो लोग क़ुरआन पर यक़ीन रखते हैं और उस पर अमल करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। यह आयत हमें सब्र और भरोसे की तालीम देती है—अल्लाह का वादा सच्चा है, फैसला ज़रूर होगा, और सच्चाई की जीत ज़रूर होगी। इसलिए हमें बिना झिझक क़ुरआन को अपनाना चाहिए और उस पर अमल करके दुनिया और आख़िरत की कामयाबी हासिल करनी चाहिए।
📜 आयत 43-47 — फुस्सिलत
अनुवाद — फुस्सिलत 45
सूरा फुस्सिलत आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और नहीं सुनते) और हम ही ने मूसा को भी…सूरा आयत 45/54 — फुस्सिलत فصلت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फुस्सिलत सुनें, फुस्सिलत अनुवाद, फुस्सिलत mp3, फुस्सिलत pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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