अश-शूरा · 11/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
فَاطِرُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ جَعَلَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا وَمِنَ الْأَنْعَامِ أَزْوَاجًا ۖ يَذْرَؤُكُمْ فِيهِ ۚ لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ ۖ وَهُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ ۝١١
Faatirus samaawaati wal ard; ja`ala lakum min anfusikum azwaajanw wa minal an`aami azwaajany yazra`ukum feeh; laisa kamislihee shai`unw wa Huwas Samee`ul Baseer
📖 हिंदी अर्थ
सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला (वही) है उसी ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स के जोड़े बनाए और चारपायों के जोड़े भी (उसी ने बनाए) उस (तरफ) में तुमको फैलाता रहता है कोई चीज़ उसकी मिसल नहीं और वह हर चीज़ को सुनता देखता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاطِرُ: पैदा करने वाला, बनाने वाला, अस्तित्व में लाने वाला।
  • يَذْرَؤُكُمْ: वह तुम्हें पैदा करता है, बढ़ाता है और फैलाता है।
  • لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ: उसके समान या उसकी मिसाल जैसा कुछ भी नहीं है।
  • السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
  • البَصِيرُ: सब कुछ देखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की महान शक्ति और उसकी बेमिसाल रचना की ओर संकेत करती है। अल्लाह ही है जिसने आसमानों और ज़मीन को बिना किसी पूर्व नमूने के पैदा किया। वही इस कायनात का ख़ालिक़ और मालिक है। उसी ने अपनी रहमत से तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जाति (इंसानों) में से जोड़े बनाए, ताकि तुम उनमें सुकून और चैन पाओ। और उसी ने चौपायों (जानवरों) में भी नर और मादा के जोड़े बनाए, ताकि उनसे तुम्हें लाभ पहुँचे — उनका दूध, मांस, ऊन और सवारी — और ताकि उनके ज़रिये तुम्हारी रोज़ी का सामान हो।

अल्लाह ने यह सब इसलिए किया कि तुम बढ़ो और फैलो, और उसकी नेमतों से लाभ उठाओ। यह सब उसकी कुदरत और हिकमत का नमूना है। लेकिन इस सबके बावजूद, अल्लाह की ज़ात, उसके नाम, उसकी सिफ़ात और उसके काम — किसी भी चीज़ से मिलते-जुलते नहीं हैं। वह हर चीज़ से बिल्कुल अलग और बेमिसाल है। कोई भी चीज़ उसके समान नहीं हो सकती, न उसकी ज़ात में, न उसके गुणों में, न उसके कामों में। वह हर कमी और हर ऐब से पाक है।

वह सुनने वाला है — तुम्हारी हर दुआ, हर पुकार, हर ज़र्रा-बराबर बात उससे छिपी नहीं है। और वह देखने वाला है — तुम्हारे हर अमल, हर नीयत और हर हरकत को देखता है। वह तुम्हारे अच्छे कामों का अच्छा बदला और बुरे कामों का बुरा बदला देगा। उसकी नज़र से कोई चीज़ बाहर नहीं है, और उसकी सुनने से कोई आवाज़ दूर नहीं है।

दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

यह आयत हमें अल्लाह की उस रहमत और कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है जो हमारे चारों ओर बिखरी हुई है। जब हम अपने जीवनसाथी, अपने बच्चों, अपने घर, और उन जानवरों को देखते हैं जो हमारी खिदमत करते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब अल्लाह की देन है। वह हमें बढ़ाता है, हमारी रोज़ी का इंतज़ाम करता है, और हमारी हर ज़रूरत को पूरा करता है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इन नेमतों पर शुक्र करें, उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, और उसकी रहमत से कभी निराश न हों। वह हमारी हर पुकार सुनता है और हमारी हर हालत देखता है। उस पर भरोसा रखें, उसी से मदद माँगें, और उसी की राह पर चलें। यही सच्ची कामयाबी है — इस दुनिया में भी और आख़िरत में भी।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — अश-शूरा

9أَمِ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۖ فَاللَّهُ هُوَ الْوَلِيُّ وَهُوَ يُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
क्या उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा (दूसरे) कारसाज़ बनाए हैं तो कारसाज़ बस ख़ुदा ही है और वही मुर्दों को ज़िन्दा करेगा और वही हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
10وَمَا اخْتَلَفْتُمْ فِيهِ مِن شَيْءٍ فَحُكْمُهُ إِلَى اللَّهِ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبِّي عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ أُنِيبُ
और तुम लोग जिस चीज़ में बाहम एख्तेलाफ़ात रखते हो उसका फैसला ख़ुदा ही के हवाले है वही ख़ुदा तो मेरा परवरदिगार है मैं उसी पर भरोसा रखता हूँ और उसी की तरफ रूजू करता हूँ
11فَاطِرُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ جَعَلَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا وَمِنَ الْأَنْعَامِ أَزْوَاجًا ۖ يَذْرَؤُكُمْ فِيهِ ۚ لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ ۖ وَهُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला (वही) है उसी ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स के जोड़े बनाए और चारपायों के जोड़े भी (उसी ने बनाए) उस (तरफ) में तुमको फैलाता रहता है कोई चीज़ उसकी मिसल नहीं और वह हर चीज़ को सुनता देखता है
12لَهُ مَقَالِيدُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास हैं जिसके लिए चाहता है रोज़ी को फराख़ कर देता है (जिसके लिए) चाहता है तंग कर देता है बेशक वह हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
13۞ شَرَعَ لَكُم مِّنَ الدِّينِ مَا وَصَّىٰ بِهِ نُوحًا وَالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ وَمَا وَصَّيْنَا بِهِ إِبْرَاهِيمَ وَمُوسَىٰ وَعِيسَىٰ ۖ أَنْ أَقِيمُوا الدِّينَ وَلَا تَتَفَرَّقُوا فِيهِ ۚ كَبُرَ عَلَى الْمُشْرِكِينَ مَا تَدْعُوهُمْ إِلَيْهِ ۚ اللَّهُ يَجْتَبِي إِلَيْهِ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي إِلَيْهِ مَن يُنِيبُ
उसने तुम्हारे लिए दीन का वही रास्ता मुक़र्रर किया जिस (पर चलने का) नूह को हुक्म दिया था और (ऐ रसूल) उसी की हमने तुम्हारे पास वही भेजी है और उसी का इब्राहीम और मूसा और ईसा को भी हुक्म दिया था (वह) ये (है कि) दीन को क़ायम रखना और उसमें तफ़रक़ा न डालना जिस दीन की तरफ तुम मुशरेकीन को बुलाते हो वह उन पर बहुत शाक़ ग़ुज़रता है ख़ुदा जिसको चाहता है अपनी बारगाह का बरगुज़ीदा कर लेता है और जो उसकी तरफ रूजू करे (अपनी तरफ़ (पहुँचने) का रास्ता दिखा देता है
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अनुवाद — अश-शूरा 11

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Tuesday, August 18, 2026

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