Lahoo maqaaleedus samaawaati wal ardi yabsutur rizqa limany yashaaa`u wa yaqdir; innahoo bikulli shai`unw wa Huwas Samee`ul Baseer
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास हैं जिसके लिए चाहता है रोज़ी को फराख़ कर देता है (जिसके लिए) चाहता है तंग कर देता है बेशक वह हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
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آسمانوں اور زمین کی کنجیاں اسی کے ہاتھ میں ہیں۔ وہ جس کے لئے چاہتا ہے رزق فراخ کردیتا ہے (اور جس کے لئے چاہتا ہے) تنگ کردیتا ہے۔ بےشک وہ ہر چیز سے واقف ہے
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास हैं जिसके लिए चाहता है रोज़ी को फराख़ कर देता है (जिसके लिए) चाहता है तंग कर देता है बेशक वह हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
مَقَالِيدُ: चाबियाँ, ख़ज़ानों की कुंजियाँ।
يَبْسُطُ: खोलता है, फैलाता है (रिज़्क़ बढ़ाता है)।
يَقْدِرُ: तंग करता है, सीमित करता है (रिज़्क़ घटाता है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही के पास आसमानों और ज़मीन के सारे ख़ज़ानों की चाबियाँ हैं। उसी के हाथ में रिज़्क़ का पूरा इख़्तियार है — वह जिसे चाहता है खुली रोज़ी देता है और जिसे चाहता है तंग रोज़ी देता है। यह उसकी हिक्मत और मशीयत (इच्छा) पर मुनहसिर है। वह जिसे चाहता है उसकी आज़माइश के लिए रिज़्क़ में कुशादगी (विस्तार) देता है — देखता है कि वह शुक्र करता है या नाशुक्री करता है — और जिसे चाहता है उसकी आज़माइश के लिए तंगी देता है — देखता है कि वह सब्र करता है या क़िस्मत पर बिगड़ता है। यह सब कुछ उसके इल्म के मुताबिक़ होता है, क्योंकि वह हर चीज़ का पूरा जानने वाला है। उसके इल्म से उसके बंदों के मसालिह (भलाई) की कोई चीज़ पोशीदा नहीं है। वह जो कुछ भी करता है अपनी हिक्मत के मुताबिक़ करता है, और उसका हर फ़ैसला अदल और रहमत पर मबनी है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि रिज़्क़ का मालिक सिर्फ़ अल्लाह है। जब हमें यक़ीन हो जाए कि रोज़ी देने वाला, रोकने वाला और बढ़ाने वाला सिर्फ़ वही है, तो हमारा दिल उसी से जुड़ जाता है। हमें किसी इंसान के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहिए, बल्कि सीधे अल्लाह से माँगना चाहिए। यह आयत हमें सब्र और शुक्र का पाठ पढ़ाती है — कुशादगी में शुक्र करो और तंगी में सब्र करो। याद रखो, अल्लाह जो देता है उसमें हमारी भलाई होती है, चाहे हमें समझ न आए। यही ईमान की निशानी है कि हम उसके हर फ़ैसले पर राज़ी रहें। अल्लाह हमें शुक्रगुज़ार और सब्र करने वाले बंदे बनाए। आमीन।
और तुम लोग जिस चीज़ में बाहम एख्तेलाफ़ात रखते हो उसका फैसला ख़ुदा ही के हवाले है वही ख़ुदा तो मेरा परवरदिगार है मैं उसी पर भरोसा रखता हूँ और उसी की तरफ रूजू करता हूँ
सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला (वही) है उसी ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स के जोड़े बनाए और चारपायों के जोड़े भी (उसी ने बनाए) उस (तरफ) में तुमको फैलाता रहता है कोई चीज़ उसकी मिसल नहीं और वह हर चीज़ को सुनता देखता है
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास हैं जिसके लिए चाहता है रोज़ी को फराख़ कर देता है (जिसके लिए) चाहता है तंग कर देता है बेशक वह हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
उसने तुम्हारे लिए दीन का वही रास्ता मुक़र्रर किया जिस (पर चलने का) नूह को हुक्म दिया था और (ऐ रसूल) उसी की हमने तुम्हारे पास वही भेजी है और उसी का इब्राहीम और मूसा और ईसा को भी हुक्म दिया था (वह) ये (है कि) दीन को क़ायम रखना और उसमें तफ़रक़ा न डालना जिस दीन की तरफ तुम मुशरेकीन को बुलाते हो वह उन पर बहुत शाक़ ग़ुज़रता है ख़ुदा जिसको चाहता है अपनी बारगाह का बरगुज़ीदा कर लेता है और जो उसकी तरफ रूजू करे (अपनी तरफ़ (पहुँचने) का रास्ता दिखा देता है
और ये लोग मुतफ़र्रिक़ हुए भी तो इल्म (हक़) आ चुकने के बाद और (वह भी) महज़ आपस की ज़िद से और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से एक वक्ते मुक़र्रर तक के लिए (क़यामत का) वायदा न हो चुका होता तो उनमें कबका फैसला हो चुका होता और जो लोग उनके बाद (ख़ुदा की) किताब के वारिस हुए वह उसकी तरफ से बहुत सख्त शुबहे में (पड़े हुए) हैं
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