अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اخْتَلَفْتُمْ – तुमने मतभेद किया
- فَحُكْمُهُ – तो उसका फ़ैसला
- أُنِيبُ – मैं रुजू करता हूँ, लौटता हूँ
तफ़सीर:
ऐ लोगों! तुम जिस भी चीज़ में मतभेद करते हो—चाहे वह दीन के मूल सिद्धांत हों या उसकी शाखाएँ, चाहे अक़ीदे का मामला हो या अमल का—तो उसका फ़ैसला अल्लाह की तरफ़ लौटाया जाता है। यानी जब भी कोई विवाद पैदा हो, तो उसे अल्लाह की किताब (क़ुरआन) और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत की तरफ़ रुजू करना चाहिए। यही वह मीज़ान है जो हर झगड़े को ख़त्म कर सकता है और हर इख़्तिलाफ़ को हल कर सकता है।
यह अल्लाह ही है जो इन सिफ़ात से मौसूफ़ है—वही मेरा रब है। मैंने अपने सारे मामलों में उसी पर भरोसा किया है, उसी पर तवक्कुल किया है, और उसी की तरफ़ मैं रुजू करता हूँ। मेरी ज़िंदगी का हर पहलू, हर मोड़, हर फ़ैसला—सब कुछ उसी की मर्ज़ी के ताबे है।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमारे बीच कोई मसला पैदा हो, तो हमें अपनी राय, अपनी ख्वाहिश या अपने तअस्सुब को हक़ नहीं समझ लेना चाहिए, बल्कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की तरफ़ लौटना चाहिए। यही सच्ची इताअत है और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है। जो शख्स अपने इख्तिलाफ़ात को अल्लाह की किताब और सुन्नत की रोशनी में हल करता है, वह कभी गुमराह नहीं होता।
और जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं और उसी की तरफ़ पलटते हैं, तो हमारा दिल इत्मिनान पाता है, हमारी मुश्किलें आसान होती हैं और हमें हर हाल में सब्र और यक़ीन हासिल होता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की भलाई तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें अपनी किताब और अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 8-12 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 10
सूरा अश-शूरा आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम लोग जिस चीज़ में बाहम एख्तेलाफ़ात रखते हो…सूरा आयत 10/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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