अश-शूरा · 16/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
وَالَّذِينَ يُحَاجُّونَ فِي اللَّهِ مِن بَعْدِ مَا اسْتُجِيبَ لَهُ حُجَّتُهُمْ دَاحِضَةٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۝١٦
Wallazeena yuhaaajjoona fil laahi mim ba`di mastujeeba lahoo hujjatuhum daahidatun `inda Rabbihim wa `alaihim ghadabunw wa lahum `azaabun shadeed
📖 हिंदी अर्थ
और उसी की तरफ लौट कर जाना है और जो लोग उसके मान लिए जाने के बाद ख़ुदा के बारे में (ख्वाहमख्वाह) झगड़ा करते हैं उनके परवरदिगार के नज़दीक उनकी दलील लग़ो बातिल है और उन पर (ख़ुदा का) ग़ज़ब और उनके लिए सख्त अज़ाब है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُحَاجُّونَ – वे लोग जो झगड़ा करते हैं, तर्क-वितर्क करते हैं।
  • اسْتُجِيبَ لَهُ – जब लोग उसका उत्तर दे चुके (अर्थात ईमान ला चुके)।
  • دَاحِضَةٌ – बातिल, झूठी, नष्ट होने वाली।
  • عِندَ رَبِّهِمْ – अपने रब के निकट।
  • غَضَبٌ – क्रोध, प्रकोप।
  • عَذَابٌ شَدِيدٌ – सख्त अज़ाब, कठोर यातना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह के दीन (इस्लाम) में झगड़ा करते हैं और उसके बारे में बहस करते हैं, जबकि लोग पहले ही इस दीन को क़ुबूल कर चुके हैं और ईमान ला चुके हैं। यानी जब सच्चाई स्पष्ट हो गई और लोगों ने रसूलुल्लाह ﷺ की दावत को मान लिया, तो उसके बाद भी कुछ लोग झूठे तर्कों और बेकार की दलीलों से इस दीन को बदनाम करने और लोगों को रोकने की कोशिश करते हैं।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों की हुज्जत (दलील) उनके रब के पास बिल्कुल बातिल और नष्ट होने वाली है। उनकी बहस का कोई असर नहीं होता, क्योंकि सच्चाई तो सामने आ चुकी है। जो शख्स सूरज की रोशनी में अंधेरे की दलील दे, उसकी बात कौन मानेगा?

इसके अलावा, ऐसे लोगों पर अल्लाह का क्रोध है, क्योंकि उन्होंने हक़ को जानते हुए भी उसे ठुकराया और जिद्दो-मुहाना किया। और आख़िरत में उनके लिए सख्त अज़ाब है, यानी जहन्नुम की आग, जो उनके इस कुकर्म की सज़ा होगी।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब सच्चाई स्पष्ट हो जाए, तो उसे मान लेना चाहिए। जिद और झगड़ा करना, हक़ के बाद भी बहस करना, अल्लाह की नज़र में बहुत बुरा काम है। मोमिन का काम है कि वह हक़ को सुनते ही क़ुबूल कर ले, क्योंकि हिदायत अल्लाह की तरफ से आती है, और जो हिदायत मिलने के बाद भी अंधा बना रहे, उसका अंजाम बहुत बुरा है।

अल्लाह हमें हक़ को क़ुबूल करने की तौफ़ीक़ दे और जिद्दो-मुहाना से बचाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अश-शूरा

14وَمَا تَفَرَّقُوا إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْعِلْمُ بَغْيًا بَيْنَهُمْ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى لَّقُضِيَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّ الَّذِينَ أُورِثُوا الْكِتَابَ مِن بَعْدِهِمْ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ
और ये लोग मुतफ़र्रिक़ हुए भी तो इल्म (हक़) आ चुकने के बाद और (वह भी) महज़ आपस की ज़िद से और अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से एक वक्ते मुक़र्रर तक के लिए (क़यामत का) वायदा न हो चुका होता तो उनमें कबका फैसला हो चुका होता और जो लोग उनके बाद (ख़ुदा की) किताब के वारिस हुए वह उसकी तरफ से बहुत सख्त शुबहे में (पड़े हुए) हैं
15فَلِذَٰلِكَ فَادْعُ ۖ وَاسْتَقِمْ كَمَا أُمِرْتَ ۖ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَاءَهُمْ ۖ وَقُلْ آمَنتُ بِمَا أَنزَلَ اللَّهُ مِن كِتَابٍ ۖ وَأُمِرْتُ لِأَعْدِلَ بَيْنَكُمُ ۖ اللَّهُ رَبُّنَا وَرَبُّكُمْ ۖ لَنَا أَعْمَالُنَا وَلَكُمْ أَعْمَالُكُمْ ۖ لَا حُجَّةَ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمُ ۖ اللَّهُ يَجْمَعُ بَيْنَنَا ۖ وَإِلَيْهِ الْمَصِيرُ
तो (ऐ रसूल) तुम (लोगों को) उसी (दीन) की तरफ बुलाते रहे जो और जैसा तुमको हुक्म हुआ है (उसी पर क़ायम रहो और उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों की पैरवी न करो और साफ़ साफ़ कह दो कि जो किताब ख़ुदा ने नाज़िल की है उस पर मैं ईमान रखता हूँ और मुझे हुक्म हुआ है कि मैं तुम्हारे एख्तेलाफात के (दरमेयान) इन्साफ़ (से फ़ैसला) करूँ ख़ुदा ही हमारा भी परवरदिगार है और वही तुम्हारा भी परवरदिगार है हमारी कारगुज़ारियाँ हमारे ही लिए हैं और तुम्हारी कारस्तानियाँ तुम्हारे वास्ते हममें और तुममें तो कुछ हुज्जत (व तक़रार की ज़रूरत) नहीं ख़ुदा ही हम (क़यामत में) सबको इकट्ठा करेगा
16وَالَّذِينَ يُحَاجُّونَ فِي اللَّهِ مِن بَعْدِ مَا اسْتُجِيبَ لَهُ حُجَّتُهُمْ دَاحِضَةٌ عِندَ رَبِّهِمْ وَعَلَيْهِمْ غَضَبٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ
और उसी की तरफ लौट कर जाना है और जो लोग उसके मान लिए जाने के बाद ख़ुदा के बारे में (ख्वाहमख्वाह) झगड़ा करते हैं उनके परवरदिगार के नज़दीक उनकी दलील लग़ो बातिल है और उन पर (ख़ुदा का) ग़ज़ब और उनके लिए सख्त अज़ाब है
17اللَّهُ الَّذِي أَنزَلَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ وَالْمِيزَانَ ۗ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ قَرِيبٌ
ख़ुदा ही तो है जिसने सच्चाई के साथ किताब नाज़िल की और अदल (व इन्साफ़ भी नाज़िल किया) और तुमको क्या मालूम यायद क़यामत क़रीब ही हो
18يَسْتَعْجِلُ بِهَا الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِهَا ۖ وَالَّذِينَ آمَنُوا مُشْفِقُونَ مِنْهَا وَيَعْلَمُونَ أَنَّهَا الْحَقُّ ۗ أَلَا إِنَّ الَّذِينَ يُمَارُونَ فِي السَّاعَةِ لَفِي ضَلَالٍ بَعِيدٍ
(फिर ये ग़फ़लत कैसी) जो लोग इस पर ईमान नहीं रखते वह तो इसके लिए जल्दी कर रहे हैं और जो मोमिन हैं वह उससे डरते हैं और जानते हैं कि क़यामत यक़ीनी बरहक़ है आगाह रहो कि जो लोग क़यामत के बारे में शक़ किया करते हैं वह बड़े परले दर्जे की गुमराही में हैं
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीRevelation
16आयत

अनुवाद — अश-शूरा 16

सूरा अश-शूरा आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी की तरफ लौट कर जाना है और जो…

सूरा आयत 16/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए