अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُحَاجُّونَ – वे लोग जो झगड़ा करते हैं, तर्क-वितर्क करते हैं।
- اسْتُجِيبَ لَهُ – जब लोग उसका उत्तर दे चुके (अर्थात ईमान ला चुके)।
- دَاحِضَةٌ – बातिल, झूठी, नष्ट होने वाली।
- عِندَ رَبِّهِمْ – अपने रब के निकट।
- غَضَبٌ – क्रोध, प्रकोप।
- عَذَابٌ شَدِيدٌ – सख्त अज़ाब, कठोर यातना।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अल्लाह के दीन (इस्लाम) में झगड़ा करते हैं और उसके बारे में बहस करते हैं, जबकि लोग पहले ही इस दीन को क़ुबूल कर चुके हैं और ईमान ला चुके हैं। यानी जब सच्चाई स्पष्ट हो गई और लोगों ने रसूलुल्लाह ﷺ की दावत को मान लिया, तो उसके बाद भी कुछ लोग झूठे तर्कों और बेकार की दलीलों से इस दीन को बदनाम करने और लोगों को रोकने की कोशिश करते हैं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों की हुज्जत (दलील) उनके रब के पास बिल्कुल बातिल और नष्ट होने वाली है। उनकी बहस का कोई असर नहीं होता, क्योंकि सच्चाई तो सामने आ चुकी है। जो शख्स सूरज की रोशनी में अंधेरे की दलील दे, उसकी बात कौन मानेगा?
इसके अलावा, ऐसे लोगों पर अल्लाह का क्रोध है, क्योंकि उन्होंने हक़ को जानते हुए भी उसे ठुकराया और जिद्दो-मुहाना किया। और आख़िरत में उनके लिए सख्त अज़ाब है, यानी जहन्नुम की आग, जो उनके इस कुकर्म की सज़ा होगी।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब सच्चाई स्पष्ट हो जाए, तो उसे मान लेना चाहिए। जिद और झगड़ा करना, हक़ के बाद भी बहस करना, अल्लाह की नज़र में बहुत बुरा काम है। मोमिन का काम है कि वह हक़ को सुनते ही क़ुबूल कर ले, क्योंकि हिदायत अल्लाह की तरफ से आती है, और जो हिदायत मिलने के बाद भी अंधा बना रहे, उसका अंजाम बहुत बुरा है।
अल्लाह हमें हक़ को क़ुबूल करने की तौफ़ीक़ दे और जिद्दो-मुहाना से बचाए। आमीन।
📜 आयत 14-18 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 16
सूरा अश-शूरा आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी की तरफ लौट कर जाना है और जो…सूरा आयत 16/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








