अज़-ज़ुखरुफ · 43/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
فَاسْتَمْسِكْ بِالَّذِي أُوحِيَ إِلَيْكَ ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝٤٣
Fastamsik billazeee oohi ya ilaika innaka `alaa Siraatim Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम्हारे पास जो वही भेजी गयी है तुम उसे मज़बूत पकड़े रहो इसमें शक़ नहीं कि तुम सीधी राह पर हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاسْتَمْسِكْ: मज़बूती से थाम लो, पकड़ लो।
  • أُوحِيَ إِلَيْكَ: जो कुछ तुम्हारी ओर वह्य (प्रकाशना) की गई है।
  • صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ: सीधा और सच्चा मार्ग, जिसमें कोई टेढ़ापन न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस क़ुरआन को मज़बूती से थाम लो जो तुम्हारे रब की ओर से तुम पर उतारा गया है, और उस पर अमल करते रहो। यह क़ुरआन ही वह रस्सी है जो अल्लाह की तरफ ले जाती है, और यही तुम्हारे लिए सबसे बड़ी नेमत है। अल्लाह तुम्हें बता रहा है कि तुम सीधे रास्ते पर हो — वह रास्ता जिसमें कोई कमी नहीं, कोई टेढ़ापन नहीं, और कोई धोखा नहीं। यह वही रास्ता है जिस पर सभी नबी चले, और यही दीन-ए-इस्लाम है।

इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी ﷺ की तारीफ़ की है और उन्हें मज़बूती प्रदान की है, ताकि वे हर मुश्किल के बावजूद अपने मिशन पर डटे रहें। यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम क़ुरआन को थाम लेते हैं, तो हम कभी गुमराह नहीं हो सकते। क़ुरआन ही वह नूर है जो अंधेरों में रास्ता दिखाता है, और यही वह हिदायत है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाती है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का कलाम ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जब भी ज़िंदगी में उलझनें आएं, जब भी दिल बेचैन हो, तो क़ुरआन की तरफ लौटो — उसे पढ़ो, समझो और उस पर अमल करो। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक ले जाएगा। अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को जो तसल्ली दी, वही तसल्ली हमारे लिए भी है — बशर्ते हम क़ुरआन को अपना रहनुमा बनाएं। क़ुरआन को थामने का मतलब है उसकी तालीमात पर चलना, उसके हुक्मों को अपनाना, और उसकी मनाही से बचना। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह सीधा रास्ता है जिसकी तरफ हमें बुलाया गया है।



📜 आयत 41-45 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

41فَإِمَّا نَذْهَبَنَّ بِكَ فَإِنَّا مِنْهُم مُّنتَقِمُونَ
तो अगर हम तुमको (दुनिया से) ले भी जाएँ तो भी हमको उनसे बदला लेना ज़रूरी है
42أَوْ نُرِيَنَّكَ الَّذِي وَعَدْنَاهُمْ فَإِنَّا عَلَيْهِم مُّقْتَدِرُونَ
या (तुम्हारी ज़िन्दगी ही में) जिस अज़ाब का हमने उनसे वायदा किया है तुमको दिखा दें तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं
43فَاسْتَمْسِكْ بِالَّذِي أُوحِيَ إِلَيْكَ ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
तो तुम्हारे पास जो वही भेजी गयी है तुम उसे मज़बूत पकड़े रहो इसमें शक़ नहीं कि तुम सीधी राह पर हो
44وَإِنَّهُ لَذِكْرٌ لَّكَ وَلِقَوْمِكَ ۖ وَسَوْفَ تُسْأَلُونَ
और ये (क़ुरान) तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए नसीहत है और अनक़रीब ही तुम लोगों से इसकी बाज़पुर्स की जाएगी
45وَاسْأَلْ مَنْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رُّسُلِنَا أَجَعَلْنَا مِن دُونِ الرَّحْمَٰنِ آلِهَةً يُعْبَدُونَ
और हमने तुमसे पहले अपने जितने पैग़म्बर भेजे हैं उन सब से दरियाफ्त कर देखो क्या हमने ख़ुदा कि सिवा और माबूद बनाएा थे कि उनकी इबादत की जाए
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 43

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Saturday, October 3, 2026

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