अद-दुखान · 5/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
أَمْرًا مِّنْ عِندِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ ۝٥
Amram min `indinaaa; innaa kunnaa mursileen
📖 हिंदी अर्थ
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अम्रन (أَمْرًا): आदेश, हुक्म
  • मिन इन्दिना (مِّنْ عِندِنَا): अपनी ओर से, अपने पास से
  • मुरसिलीन (مُرْسِلِينَ): रसूल भेजने वाले

तफसीर (व्याख्या):

यह आदेश, जो कुरआन के रूप में उतारा गया, हमारी ओर से है। यह कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि अल्लाह तआला का वह फरमान है जो उसकी अपनी ओर से नाज़िल हुआ। अल्लाह तआला ने यह कुरआन अपने हुक्म और अपनी मर्ज़ी से उतारा, और यह उसके इल्म और हिक्मत का नतीजा है।

अल्लाह तआला फरमाता है कि हम रसूल भेजने वाले हैं। यानी अल्लाह ने हमेशा से अपने बंदों की हिदायत के लिए रसूल भेजे हैं, और इसी सिलसिले में आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को भेजा। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उनकी रहनुमाई के लिए नबी और रसूल भेजे, ताकि लोगों के पास अल्लाह की हुज्जत (प्रमाण) क़ायम हो जाए।

यह आदेश अपने साथ कई बातें लेकर आया — यह बताता है कि क्या सही है और क्या ग़लत, क्या हलाल है और क्या हराम। यह इंसान को ज़िंदगी का सही रास्ता दिखाता है। जो इसे मान ले, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हो जाता है, और जो इसे ठुकरा दे, वह गुमराही में पड़ा रहता है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह कुरआन अल्लाह की तरफ से हमारे लिए एक बड़ी नेमत है। अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें यह किताब दी, ताकि हम उसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यह हमारे लिए रोशनी है, अंधेरे में रास्ता दिखाने वाली। अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ को भेजकर हम पर बड़ा एहसान किया, इसलिए हमें चाहिए कि हम उनकी सुन्नत को अपनाएं और कुरआन को अपनी ज़िंदगी का नुस्खा बनाएं। याद रखें, अल्लाह का यह आदेश कोई साधारण बात नहीं, बल्कि हमारी कामयाबी की कुंजी है। जो इसे पकड़ ले, वह कभी बर्बाद नहीं हो सकता।



📜 आयत 3-7 — अद-दुखान

3إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُّبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाज़िल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे
4فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं
5أَمْرًا مِّنْ عِندِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं
6رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
7رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है सबका मालिक
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
5आयत

अनुवाद — अद-दुखान 5

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Tuesday, August 18, 2026

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