अद-दुखान · 6/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٦
Rahmatam mir rabbik; innahoo Huwas Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَحْمَةً: दया, करुणा, रहमत।
  • مِن رَّبِّكَ: तुम्हारे पालनहार की ओर से।
  • السَّمِيعُ: सब कुछ सुनने वाला।
  • الْعَلِيمُ: सब कुछ जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान रहमत की ओर इशारा करती है जो अल्लाह तआला ने अपने बन्दों पर की—उनके पास रसूलों को भेजा, आसमानी किताबें उतारीं, और हिदायत का रास्ता दिखाया। यह सब कुछ महज़ एक एहसान और रहमत है जो अल्लाह ने अपने नबी ﷺ के ज़रिए उम्मत पर किया। यह रहमत इसलिए नाज़िल हुई ताकि लोग अंधेरे से निकलकर रोशनी की तरफ आएँ, अपने रब की इबादत करें और उसकी राह पर चलें।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह रहमत तुम्हारे रब की ओर से है—ऐ नबी! यह कोई इत्तफ़ाक़ नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से एक योजनाबद्ध एहसान है। फिर अल्लाह अपनी दो सिफ़ात (गुण) बयान करता है: वह सब कुछ सुनने वाला है—हर आवाज़, हर दुआ, हर पुकार, चाहे वो ज़ुबान से हो या दिल से। और वह सब कुछ जानने वाला है—हर दिल का हाल, हर नीयत, हर अमल, छिपा हो या ज़ाहिर, सब कुछ उसके इल्म में है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं, जब हम नमाज़ पढ़ते हैं, जब हम दुआ करते हैं, तो हमें यक़ीन होना चाहिए कि अल्लाह हमारी सुन रहा है और हमारे हाल को जान रहा है। यही हमारे लिए सबसे बड़ी तसल्ली है—कि हमारा रब हमसे बेख़बर नहीं, वह हमारी हर पुकार सुनता है और हमारी हर ज़रूरत जानता है।

इस रहमत का तक़ाज़ा है कि हम अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें, उसकी इबादत करें, और उसके दिए हुए दीन को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह की रहमत असीम है, और वह हर उस बन्दे को नवाज़ता है जो उसकी तरफ रुजू करता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — अद-दुखान

4فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं
5أَمْرًا مِّنْ عِندِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं
6رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
7رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है सबका मालिक
8لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ
अगर तुममें यक़ीन करने की सलाहियत है (तो करो) उसके सिवा कोई माबूद नहीं - वही जिलाता है वही मारता है तुम्हारा मालिक और तुम्हारे (अगले) बाप दादाओं का भी मालिक है
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अद-दुखान 6

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Tuesday, August 18, 2026

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