अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- जन्नात (جَنَّاتٍ): बाग़, बग़ीचे, यानी जन्नत के बाग़।
- उयून (عُيُونٍ): बहते हुए चश्मे, सोते, यानी पानी के झरने।
तफ़सीर:
यह आयत उन मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के ठिकाने का वर्णन कर रही है, जिनका ज़िक्र पिछली आयतों में किया गया था कि वे अल्लाह के डर की वजह से गुनाहों से बचते रहे और उसकी राह में सब्र करते रहे। उनके लिए जन्नत के ऐसे बाग़ हैं, जिनमें हर तरह के फल, सुंदर दृश्य और आराम की चीज़ें मौजूद हैं। साथ ही वहाँ बहते हुए चश्मे और सोते हैं, जिनका पानी साफ़, ठंडा और मीठा होगा, और वे जहाँ चाहें वहाँ से पानी बहता हुआ पाएँगे। यह उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ा सम्मान और इनाम है।
यह वादा सिर्फ़ उन्हीं के लिए है जो दुनिया में अल्लाह के हुक्मों का पालन करते हैं और उसकी नाराज़गी से बचते हैं। जन्नत के ये बाग़ और चश्मे उस शांति और ख़ुशी की निशानी हैं, जो अल्लाह के नेक बंदों के लिए तैयार की गई है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनके लिए आख़िरत में यही स्थायी सुख है। यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की चंद रोज़ की मुश्किलें और परीक्षाएँ उस आराम के सामने कुछ भी नहीं हैं, जो अल्लाह ने अपने प्यारे बंदों के लिए रखा है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इबादत में लगे रहें, उसकी राह में सब्र करें और उससे जुड़े रहें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हो सकें जिन्हें यह अनमोल इनाम मिलेगा।
📜 आयत 50-54 — अद-दुखान
अनुवाद — अद-दुखान 52
सूरा अद-दुखान आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (यानि) बाग़ों और चश्मों में होंगेसूरा आयत 52/59 — अद-दुखान الدخان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अद-दुखान सुनें, अद-दुखान अनुवाद, अद-दुखान mp3, अद-दुखान pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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