अद-दुखान · 51/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينٍ ۝٥١
Innal muttaqeena fee maqaamin ameen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक परहेज़गार लोग अमन की जगह

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-मुत्तक़ीन: वे लोग जो अल्लाह से डरते हैं और उसके आदेशों का पालन करते हैं तथा उसकी मनाही से बचते हैं।
  • मक़ाम: ठहरने की जगह, निवास स्थान।
  • अमीन: सुरक्षित, जहाँ किसी प्रकार का भय, चिंता या कष्ट न हो।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है जो दुनिया में अल्लाह से डरकर जीते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग परहेज़गार हैं—यानी जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को माना और उसकी मनाही से बचे रहे—वे क़ियामत के दिन एक ऐसी जगह पर होंगे जो पूरी तरह सुरक्षित और अमन वाली होगी।

यह "मक़ाम-ए-अमीन" (सुरक्षित ठिकाना) जन्नत का वह मुक़ाम है जहाँ हर तरह का डर, ग़म, दर्द, बुढ़ापा, बीमारी, मौत—सब कुछ ख़त्म हो जाएगा। वहाँ न कोई चिंता होगी, न कोई ख़ौफ़। यह वह जगह है जहाँ अल्लाह के नेक बंदे हमेशा हमेशा के लिए रहेंगे, और उन्हें किसी भी बुराई या तकलीफ़ का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि दुनिया की यह ज़िंदगी चाहे जितनी भी आरामदेह लगे, असली सुकून और असली अमन तो आख़िरत में ही मिलेगा। जो लोग आज अल्लाह की राह पर चलते हैं, मुश्किलों में सब्र करते हैं, और अपने नफ़्स को अल्लाह की मरज़ी के ताबे करते हैं, उनके लिए अल्लाह ने यह शानदार इनाम तैयार किया है।

अल्लाह तआला ने इस आयत में "मक़ाम" का लफ़्ज़ इस्तेमाल किया है, जो ठहरने की जगह को दर्शाता है—यानी वह जगह जहाँ हमेशा रहना हो। और "अमीन" कहकर यह बताया कि वहाँ हर तरह की बुराई से हिफ़ाज़त होगी। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में तक़वा (अल्लाह से डर) अपनाएँ, अपने फ़र्ज़ अदा करें, और उन कामों से बचें जो अल्लाह को नापसंद हैं। यही रास्ता हमें उस सुरक्षित मुक़ाम तक पहुँचाएगा, जहाँ हर दर्द और हर ग़म का अंत हो जाएगा। अल्लाह हम सबको इस मुक़ाम-ए-अमीन तक पहुँचाने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 49-53 — अद-दुखान

49ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْكَرِيمُ
बेशक तू तो बड़ा इज्ज़त वाला सरदार है
50إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِ تَمْتَرُونَ
ये वही दोज़ख़ तो है जिसमें तुम लोग शक़ किया करते थे
51إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينٍ
बेशक परहेज़गार लोग अमन की जगह
52فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
(यानि) बाग़ों और चश्मों में होंगे
53يَلْبَسُونَ مِن سُندُسٍ وَإِسْتَبْرَقٍ مُّتَقَابِلِينَ
रेशम की कभी बारीक़ और कभी दबीज़ पोशाकें पहने हुए एक दूसरे के आमने सामने बैठे होंगे
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
51आयत

अनुवाद — अद-दुखान 51

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Tuesday, August 18, 2026

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