अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- هَوَاهُ (हवा): अपनी इच्छा और मन की चाह।
- أَضَلَّهُ (अज़ल्लहु): उसे पथभ्रष्ट कर दिया।
- خَتَمَ (ख़तम): मोहर लगा दी, बंद कर दिया।
- غِشَاوَةً (ग़िशावा): पर्दा, आवरण, ढक्कन।
व्याख्या:
ऐ नबी! क्या आपने उस व्यक्ति को देखा जिसने अपनी इच्छा को ही अपना पूज्य बना लिया? यानी वह जो कुछ भी चाहता है, उसे ही सही समझता है और उसी के पीछे चल पड़ता है, चाहे वह सत्य के विपरीत ही क्यों न हो। ऐसे लोग अपनी मनमर्जी को ही अपना धर्म और अपना ईश्वर बना लेते हैं।
फिर अल्लाह ने उसे उसके ज्ञान के बावजूद पथभ्रष्ट कर दिया—यानी उसके पास सत्य का ज्ञान पहुँच चुका था और उस पर तर्क स्थापित हो चुका था, लेकिन उसने जानबूझकर उसे ठुकरा दिया, इसलिए अल्लाह ने उसे उसकी सज़ा में गुमराही में छोड़ दिया। अल्लाह ने उसके कान पर मोहर लगा दी, जिससे वह नसीहत और उपदेश सुनकर भी लाभ नहीं उठाता, और उसके दिल पर भी मोहर लगा दी, जिससे वह सत्य को समझने और उस पर विचार करने की क्षमता खो बैठा। साथ ही उसकी आँखों पर पर्दा डाल दिया, जिससे वह अल्लाह की निशानियों और सच्चाई के प्रमाणों को देख ही नहीं पाता।
अब जब अल्लाह ने ही उसे गुमराह कर दिया, तो उसे कौन सीधा रास्ता दिखा सकता है? कोई नहीं! क्योंकि जिसे अल्लाह ही भटका दे, उसे कोई हिदायत नहीं दे सकता। क्या तुम लोग इतना भी नहीं सोचते? क्या तुम्हें यह पाठ नहीं मिलता कि अपनी इच्छाओं को पूजा बनाना कितना विनाशकारी है?
शिक्षा और प्रेरणा:
यह आयत हमें बताती है कि सबसे बड़ा खतरा इंसान के लिए उसकी अपनी इच्छाएँ हैं। जब इंसान अपनी हवा-ओ-हवस को अपना मालिक बना लेता है, तो वह सत्य से दूर हो जाता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी इच्छाओं को नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा को अपना लक्ष्य बनाना चाहिए। जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं को छोड़कर अल्लाह के हुक्म के आगे झुक जाता है, अल्लाह उसे सबसे अच्छा रास्ता दिखाता है और उसके दिल को सच्चाई की रोशनी से भर देता है।
याद रखिए! अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा उनके लिए खुला है जो अपनी गलतियों से तौबा करते हैं और सीधे रास्ते पर लौट आते हैं। अल्लाह हम सबको अपनी इच्छाओं के गुलाम होने से बचाए और हमें सच्चे दिल से अपनी बंदगी करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 21-25 — अल-जासिया
अनुवाद — अल-जासिया 23
सूरा अल-जासिया आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला तुमने उस शख़्श को भी देखा है जिसने अपनी…सूरा आयत 23/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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