अल-जासिया · 23/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
أَفَرَأَيْتَ مَنِ اتَّخَذَ إِلَٰهَهُ هَوَاهُ وَأَضَلَّهُ اللَّهُ عَلَىٰ عِلْمٍ وَخَتَمَ عَلَىٰ سَمْعِهِ وَقَلْبِهِ وَجَعَلَ عَلَىٰ بَصَرِهِ غِشَاوَةً فَمَن يَهْدِيهِ مِن بَعْدِ اللَّهِ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝٢٣
Afara`ayta manit takhaza ilaahahoo hawaahu wa adal lahul laahu `alaa `ilminw wa khatama `alaa sam`ihee wa qalbihee wa ja`ala `alaa basarihee ghishaawatan famany yahdeehi mim ba`dil laah; afalaa tazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
भला तुमने उस शख़्श को भी देखा है जिसने अपनी नफसियानी ख़वाहिशों को माबूद बना रखा है और (उसकी हालत) समझ बूझ कर ख़ुदा ने उसे गुमराही में छोड़ दिया है और उसके कान और दिल पर अलामत मुक़र्रर कर दी है (कि ये ईमान न लाएगा) और उसकी ऑंख पर पर्दा डाल दिया है फिर ख़ुदा के बाद उसकी हिदायत कौन कर सकता है तो क्या तुम लोग (इतना भी) ग़ौर नहीं करते

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هَوَاهُ (हवा): अपनी इच्छा और मन की चाह।
  • أَضَلَّهُ (अज़ल्लहु): उसे पथभ्रष्ट कर दिया।
  • خَتَمَ (ख़तम): मोहर लगा दी, बंद कर दिया।
  • غِشَاوَةً (ग़िशावा): पर्दा, आवरण, ढक्कन।

व्याख्या:

ऐ नबी! क्या आपने उस व्यक्ति को देखा जिसने अपनी इच्छा को ही अपना पूज्य बना लिया? यानी वह जो कुछ भी चाहता है, उसे ही सही समझता है और उसी के पीछे चल पड़ता है, चाहे वह सत्य के विपरीत ही क्यों न हो। ऐसे लोग अपनी मनमर्जी को ही अपना धर्म और अपना ईश्वर बना लेते हैं।

फिर अल्लाह ने उसे उसके ज्ञान के बावजूद पथभ्रष्ट कर दिया—यानी उसके पास सत्य का ज्ञान पहुँच चुका था और उस पर तर्क स्थापित हो चुका था, लेकिन उसने जानबूझकर उसे ठुकरा दिया, इसलिए अल्लाह ने उसे उसकी सज़ा में गुमराही में छोड़ दिया। अल्लाह ने उसके कान पर मोहर लगा दी, जिससे वह नसीहत और उपदेश सुनकर भी लाभ नहीं उठाता, और उसके दिल पर भी मोहर लगा दी, जिससे वह सत्य को समझने और उस पर विचार करने की क्षमता खो बैठा। साथ ही उसकी आँखों पर पर्दा डाल दिया, जिससे वह अल्लाह की निशानियों और सच्चाई के प्रमाणों को देख ही नहीं पाता।

अब जब अल्लाह ने ही उसे गुमराह कर दिया, तो उसे कौन सीधा रास्ता दिखा सकता है? कोई नहीं! क्योंकि जिसे अल्लाह ही भटका दे, उसे कोई हिदायत नहीं दे सकता। क्या तुम लोग इतना भी नहीं सोचते? क्या तुम्हें यह पाठ नहीं मिलता कि अपनी इच्छाओं को पूजा बनाना कितना विनाशकारी है?


शिक्षा और प्रेरणा:

यह आयत हमें बताती है कि सबसे बड़ा खतरा इंसान के लिए उसकी अपनी इच्छाएँ हैं। जब इंसान अपनी हवा-ओ-हवस को अपना मालिक बना लेता है, तो वह सत्य से दूर हो जाता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी इच्छाओं को नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा को अपना लक्ष्य बनाना चाहिए। जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं को छोड़कर अल्लाह के हुक्म के आगे झुक जाता है, अल्लाह उसे सबसे अच्छा रास्ता दिखाता है और उसके दिल को सच्चाई की रोशनी से भर देता है।

याद रखिए! अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा उनके लिए खुला है जो अपनी गलतियों से तौबा करते हैं और सीधे रास्ते पर लौट आते हैं। अल्लाह हम सबको अपनी इच्छाओं के गुलाम होने से बचाए और हमें सच्चे दिल से अपनी बंदगी करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 21-25 — अल-जासिया

21أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ اجْتَرَحُوا السَّيِّئَاتِ أَن نَّجْعَلَهُمْ كَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَوَاءً مَّحْيَاهُمْ وَمَمَاتُهُمْ ۚ سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
जो लोग बुरा काम किया करते हैं क्या वह ये समझते हैं कि हम उनको उन लोगों के बराबर कर देंगे जो ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम भी करते रहे और उन सब का जीना मरना एक सा होगा ये लोग (क्या) बुरे हुक्म लगाते हैं
22وَخَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ وَلِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और ख़ुदा ने सारे आसमान व ज़मीन को हिकमत व मसलेहत से पैदा किया और ताकि हर शख़्श को उसके किये का बदला दिया जाए और उन पर (किसी तरह का) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
23أَفَرَأَيْتَ مَنِ اتَّخَذَ إِلَٰهَهُ هَوَاهُ وَأَضَلَّهُ اللَّهُ عَلَىٰ عِلْمٍ وَخَتَمَ عَلَىٰ سَمْعِهِ وَقَلْبِهِ وَجَعَلَ عَلَىٰ بَصَرِهِ غِشَاوَةً فَمَن يَهْدِيهِ مِن بَعْدِ اللَّهِ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
भला तुमने उस शख़्श को भी देखा है जिसने अपनी नफसियानी ख़वाहिशों को माबूद बना रखा है और (उसकी हालत) समझ बूझ कर ख़ुदा ने उसे गुमराही में छोड़ दिया है और उसके कान और दिल पर अलामत मुक़र्रर कर दी है (कि ये ईमान न लाएगा) और उसकी ऑंख पर पर्दा डाल दिया है फिर ख़ुदा के बाद उसकी हिदायत कौन कर सकता है तो क्या तुम लोग (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
24وَقَالُوا مَا هِيَ إِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا يُهْلِكُنَا إِلَّا الدَّهْرُ ۚ وَمَا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَظُنُّونَ
और वह लोग कहते हैं कि हमारी ज़िन्दगी तो बस दुनिया ही की है (यहीं) मरते हैं और (यहीं) जीते हैं और हमको बस ज़माना ही (जिलाता) मारता है और उनको इसकी कुछ ख़बर तो है नहीं ये लोग तो बस अटकल की बातें करते हैं
25وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ مَّا كَانَ حُجَّتَهُمْ إِلَّا أَن قَالُوا ائْتُوا بِآبَائِنَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और जब उनके सामने हमारी खुली खुली आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनकी कट हुज्जती बस यही होती है कि वह कहते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो हमारे बाप दादाओं को (जिला कर) ले तो आओ
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — अल-जासिया 23

सूरा अल-जासिया आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला तुमने उस शख़्श को भी देखा है जिसने अपनी…

सूरा आयत 23/37 — अल-जासिया الجاثية (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जासिया सुनें, अल-जासिया अनुवाद, अल-जासिया mp3, अल-जासिया pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए